ग्राम पंचायत बड़वाह कस्बा में भ्रष्टाचार: जीएसटी पंजीयन नहीं; वेंडरों को भुगतान में काटा, कई गड़बड़ियां
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, बड़वाह।
खरगोन जिले की बड़वाह तहसील की ग्राम पंचायत बड़वाह कस्बा में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। सरपंच चेतना पाटीदार, सचिव मनोहर मंडलोई, बाबूलाल सिटोले मिलकर न केवल पंचायत का खजाना खाली कर रहे हैं बल्कि शासन को भी चूना लगा रहे हैं। पंचायत ने नियम विरुद्ध जीएसटी पंजीयन नहीं कराया है और न ही वेंडरों को किए भुगतान में जीएसटी काटा है।
मामले की शिकायत बड़वाह के सुराणा नगर निवासी संतोष मालवीय जो पूर्व सरपंच हैं, ने सीईओ को की है। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है कि सरपंच और सचिवों ने मप्र भंडार 94 नियम एवं मप्र ग्राम पंचायतराज अधिनियम 1993 के नियमों को ताक में रख दिया है।
नियम है कि सामग्री क्रय करने पर वेंडरों को भुगतान राशि का 2 प्रतिशत जीएसटी और 2 प्रतिशत आयकर (टीडीएस) काटा जाए, लेकिन सरपंच के हस्ताक्षर से किए गए भुगतान में कुछ भी नहीं काटा गया और वेंडरों को पूरा भुगतान कर दिया गया।
वेंडरों ने जो बिल लगाए हैं, वो भी संदिग्ध हैं। पंचायत ने जीएसटी काटा जाना दर्शाया है, लेकिन ये अपंजीकृत बिल और हस्तलिखित रसीदों पर है। यदि बिलों की जांच हो तो सच सामने आ जाएगा कि पंचायत द्वारा वाकई खरीदी की गई है या नहीं।
पंचायत ने शासन के निर्देश के बाद भी जीएसटी पंजीयन नहीं कराया है, जो गंभीर अनियमितता है। पंचायत इसके बिना ही बिलों और रसीदों का भुगतान कर रही है। पंचायत को नियमानुसार पैन नंबर और टेन नंबर लेना था, ताकि जीएसटी काटा जा सके, लेकिन पंचायत ने ऐसा नहीं किया।
सरपंच और सचिवों ने आर्थिक गड़बड़ी करने के उद्देश्य से पैन-टेन नंबर नहीं लिए। सूचना के अधिकार में दी गई जानकारी में पंचायत ने नंबर न लेना स्वीकारा है। एक और नियम ये है कि पंचायत को तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के बाद स्वयं कार्य करना था, लेकिन उसने नियम विरुद्ध ठेके पर काम कराया। हद तो ये है कि सरपंच चेतना पाटीदार ने पंच वैभव जोशी से ही कार्य करवाए और तुरंत भुगतान भी किया।
यही नहीं, पंचायत को मप्र भंडार क्रय नियम 2015 के तहत जैम पोर्टल पर पंजीयन करवाकर समस्त खरीदी करना थी, लेकिन ऐसा न करके मनमानी करते हुए ऐसे दुकानदारों से सामग्री खरीदी कर भुगतान कर दिया गया जिनका जैम पंजीयन नहीं था। जाहिर है कि इसमें लाखों रुपयों की गड़बड़ी की गई है।
जो भुगतान किए गए वो मप्र ग्राम पंचायत लेख नियम 1999 के नियम 20, 35, 36,37,38, 39 का खुला उल्लंघन है। पंचायत द्वारा बिना टेंडर सामग्री खरीदी जा रही है, जो मप्र ग्राम पंचायत भंडार नियमों 3, 3(1), 3(2), 3(3), 3(4), 3(5), 3(6), 3(7), 3(8) का खुला उल्लंघन है।
धारा 46 के तहत ग्राम पंचायत की स्थायी समिति की बैठक होगी, जो सरपंच बुलाएंगी, लेकिन 1 अगस्त 2022 से लेकर 14 अक्टूबर 2025 तक कोई बैठक आयोजित नहीं की गई। हर माह पंचायत और वर्ष में चार बार ग्रामसभा की बैठक बुलाने का भी नियम है, लेकिन सरपंच चेतना पाटीदार ने ऐसा नहीं किया।
धारा 44 में नियम है कि यदि कोई सरपंच लगातार बैठकें बुलाने में असमर्थ रहा है तो उसे पद से हटाया जा सकता है, लेकिन सरपंच पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आश्चर्य की बात ये है कि भ्रष्टाचार में लिप्त रहने से सरपंच ने बैठकें बुलाए बिना ही फर्जी तरीके से प्रस्ताव तैयार और स्वीकृत कर लिए निर्माणों का वर्क ऑर्डर दे दिया और भुगतान भी कर दिया गया।
अनुमान है कि करीब 25 करोड़ रुपये का सरपंच और सचिवों ने गबन कर लिया है। पता चला है कि पंचायत कार्यालय से सरपंच चेतना पाटीदार ने कार्यालय से रोकड़ बही गायब कर दी है, जिसे सूचना के अधिकार में स्वीकारा गया है कि कार्यालय में केशबुक मौजूद नहीं है। शासन ने पंचायतों के लिए बजट स्वीकृति नियम बनाए हैं, लेकिन सरपंच ने सारे कार्य और भुगतान बिना बजट स्वीकृति के कराए हैं।
नियमानुसार ऐसे व्यय विधिमान्य न होकर सरपंच-सचिवों से वसूली योग्य हैं। शिकायत में ये भी कहा गया है कि पंचायत द्वारा नल-जल और भवन अनुमति की राशि वसूली की इंट्री रोकड़ बही में किया जाना चाहिए, लेकिन सरपंच ने फर्जी रोकड़ बही और बिल वाउचर बना रखे हैं जो सीधा-सीधा गबन है।
शिकायतकर्ता संतोष मालवीय ने आग्रह किया है कि उपरोक्त सभी बिंदुओं पर जांच की जाए ताकि जनता से प्राप्त करों की राशि में गबन को रोका जा सके। मामले में पंचायत सचिव बाबूलाल सिटोले ने कहा कि जो भी शिकायत की गई है, वो झूठी हैं।
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