कांग्रेस विधायक को हाईकोर्ट से झटका: जीत को चुनौती देने वाली याचिका नहीं होगी खारिज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, रीवा।
सेमरिया विधानसभा सीट से महज 637 वोटों से जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की विधायकी अब कानूनी जांच के दायरे में आ गई है।
याचिका को खारिज करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज करने से इनकार कर दिया है और मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ा दिया है।
कोर्ट ने माने आरोप गंभीर
जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और इनकी विस्तृत सुनवाई जरूरी है। कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा प्रत्याशी ने दी थी चुनौती
यह याचिका भाजपा उम्मीदवार कृष्णपति त्रिपाठी द्वारा दायर की गई थी। 2023 विधानसभा चुनाव में अभय मिश्रा को 56,024 वोट मिले थे, जबकि त्रिपाठी को 55,387 वोट प्राप्त हुए थे।
शपथ पत्र में जानकारी छिपाने का आरोप
याचिका में सबसे गंभीर आरोप नामांकन के दौरान दिए गए शपथ पत्र (फॉर्म-26) को लेकर है। आरोप है कि विधायक ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाते हुए “Not Applicable” लिखा।
याचिकाकर्ता ने RTI के जरिए 9 मामलों का हवाला दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं, तो इसे “भ्रष्ट आचरण” माना जा सकता है।
लोन और आय संबंधी जानकारी पर भी सवाल
मामले में ICICI Bank से लिए गए कथित लोन को छिपाने का आरोप भी लगाया गया है। दावा है कि करीब 23 लाख का लोन बढ़कर 50 लाख से अधिक हो गया था, जिसे हलफनामे में नहीं दिखाया गया।
हालांकि, बचाव पक्ष का कहना है कि यह लोन व्यक्तिगत नहीं बल्कि कंपनी से जुड़ा था और वे 2008 में उस कंपनी से अलग हो चुके थे। कोर्ट ने इस बिंदु को भी जांच योग्य माना है।
अन्य आरोप भी जांच के दायरे में
याचिका में आय के स्रोत की अधूरी जानकारी, कंपनी का स्पष्ट विवरण न देना और सरकारी विभागों से जुड़े कथित अनुबंध जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि ये सभी पहलू चुनाव की वैधता को प्रभावित कर सकते हैं।
अब क्या होगा?
अब इस मामले में ट्रायल के दौरान सभी साक्ष्यों और आरोपों की विस्तार से जांच होगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो विधायक की सदस्यता रद्द होने तक की स्थिति बन सकती है।
महज 637 वोट से मिली जीत अब अदालत की कसौटी पर है, जिससे आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
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