करोड़ों की जमीन पर कॉलोनाइजरों की नजर: एयरपोर्ट की जमीन पर कब्जे का खेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, मामला कलेक्टर और सांसद तक पहुंचा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के देवी अहिल्या बाई होलकर एयरपोर्ट की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जों का बड़े खेल का खुलासा हुआ है। करोड़ों रुपए कीमत की एयरपोर्ट भूमि पर कॉलोनाइजरों और व्यवसायियों द्वारा अतिक्रमण कर प्लॉट बेचे जाने और व्यावसायिक निर्माण करने के आरोप लगे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत और जांच के बाद भी संबंधित विभाग के कर्मचारी कब्जा हटाने में असमर्थता जताते नजर आ रहे हैं, जिससे पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता और संभावित संरक्षण पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायत में बताया गया है कि एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल भवन के सामने से लेकर पंचशील नगर, बापू मुराई कॉलोनी और आगे चौरसिया नगर तक की जमीन एयरपोर्ट सीमा में आती थी। इस क्षेत्र में पहले सूचना पटल लगाए गए थे और पंचशील नगर से चौरसिया नगर तक कंपाउंड वॉल भी बनाई गई थी, जो आज भी मौजूद है।
इसके बावजूद गजाधर नगर क्षेत्र में एक कॉलोनाइजर द्वारा एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण कर उसे अपने प्लॉट का हिस्सा बताकर बेचने और किराये पर देने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि भदौरिया बोरवेल से लेकर आसपास के कई रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण भी इसी जमीन पर खड़े कर दिए गए हैं।
कर्मचारियों ने जताई लाचारी, नहीं लगाए सूचना पटल
सबसे चौंकाने वाला पहलू का खुलासा हुआ है कि शिकायत की जांच में कई तथ्य सही पाए गए, लेकिन एयरपोर्ट विभाग के कर्मचारियों ने कब्जा हटाने में असमर्थता जता दी। यहां तक कि विवादित जमीनों पर स्पष्ट सूचना पटल तक नहीं लगाए गए, जिससे अतिक्रमण करने वालों के हौसले और बुलंद हो गए।
रेस्टोरेंट और होटल ने भी बनाई पार्किंग, जमीन पर कब्जा जारी
आरोप है कि आनंदम और मिड पाइड जैसे रेस्टोरेंट और होटल संचालकों ने भी एयरपोर्ट की जमीन पर कब्जा कर पार्किंग बना ली है। इतना ही नहीं, एयरपोर्ट रोड पर विद्युत मंडल के पास और रिलायंस पेट्रोल पंप के आसपास भी कॉलोनाइजरों द्वारा मलबा डालकर जमीन कब्जाने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस इलाके में जमीन का बाजार मूल्य करीब 20 से 25 हजार रुपए प्रति वर्गफुट तक पहुंच चुका है, ऐसे में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
पूरे मामले की सप्रमाण शिकायत
मप्र कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने बताया कि एयरपोर्ट डायरेक्टर ने शिकायत को आगे बढ़ाते हुए पूरे मामले को जिला कलेक्टर को भेज दिया है। वहीं यह मुद्दा सांसद शंकर लालवानी तक भी पहुंच चुका है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत सप्रमाण की है और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह माना जाएगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहे हैं।
अब बड़ा सवाल: करोड़ों की जमीन बचाएगा कौन?
एयरपोर्ट जैसी संवेदनशील और महंगी सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन और एयरपोर्ट प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराते हैं या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
एयरपोर्ट डायरेक्टर सुनील ने बताया कि कब्जे के संबंध में शिकायत आई थी, जिसे कलेक्टर को पहुंचा दिया गया था साथ ही एयरपोर्ट अथॉरिटी के द्वारा जमीन संबंधित मामलों के लिए नियुक्त अधिकारी को भी सूचित किया गया था
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