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कलेक्टर को हाईकोर्ट से झटका: डीईओ का प्रभार बदलने के आदेश पर स्टे; निलंबन से पहले कार्रवाई पर उठे सवाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मार्च 2026, 2:39 pm
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कलेक्टर को हाईकोर्ट से झटका

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना और जिला आबकारी अधिकारी (DEO) विनय रंगशाही के बीच चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कलेक्टर के एक आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है और उनकी कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

निलंबन से पहले ही बदल दिया गया था प्रभार
दरअसल, कलेक्टर ऋजु बाफना ने जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को निलंबित करने की अनुशंसा उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को भेजी थी। इसके बाद 16 फरवरी को रंगशाही को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले कलेक्टर की ओर से उन्हें कई नोटिस जारी किए गए थे और प्रमुख सचिव आबकारी व आबकारी आयुक्त को भी पत्र लिखा गया था।

तब गहराया विवाद
हालांकि विवाद तब गहरा गया जब यह सामने आया कि कलेक्टर ने 20 जनवरी को ही रंगशाही से प्रभार लेकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को जिला आबकारी अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया था।

इन अधिकारियों को बनाया गया पक्षकार
विनय रंगशाही ने अपनी याचिका में मध्यप्रदेश शासन, आबकारी आयुक्त, शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना, सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह और उज्जैन की जिला आबकारी अधिकारी निधि जैन को पक्षकार बनाया है।

कोर्ट ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि कलेक्टर लगातार रंगशाही को नोटिस जारी कर रही थीं और निलंबन आदेश में तकनीकी त्रुटियां भी हैं। कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर ने संभागायुक्त को निलंबन की अनुशंसा भेजने से पहले ही अधीनस्थ अधिकारी को प्रभार दे दिया था। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि यह कदम निलंबन आदेश के बाद उठाया जाता तो स्थिति अलग होती, लेकिन उससे पहले ऐसा करना निर्णय की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।

आदेश पर अंतरिम रोक
हाईकोर्ट ने फिलहाल 20 जनवरी को जारी उस आदेश पर स्टे लगा दिया है, जिसमें निमिषा परमार को जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। हालांकि संभागायुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश पर भी रोक लगी है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट का विस्तृत लिखित आदेश आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।

सितंबर से चल रहा था विवाद
कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी के बीच विवाद सितंबर-अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था। उस दौरान रंगशाही पर मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर में फूड बास्केट नहीं रखने और ड्यूटी में लापरवाही जैसे आरोप लगे थे।

कई नोटिस जारी किए गए
इसके बाद कलेक्टर की ओर से उन्हें कई नोटिस जारी किए गए, जिनमें टीएल बैठक और जनसुनवाई में अनुपस्थित रहने, फोन नहीं उठाने और काम में लापरवाही के आरोप शामिल थे। विवाद बढ़ने के बाद कलेक्टर ने उनका प्रभार बदलते हुए निलंबन की अनुशंसा कर दी, जिसके खिलाफ रंगशाही ने हाईकोर्ट का रुख किया।

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