शराब ठेकेदार के कब्जे पर सीएमओ खामोश: रसूख के आगे नगर पालिका नतमस्तक
KHULASA FIRST
संवाददाता

सार्वजनिक मार्गों पर माफिया का अवैध अतिक्रमण और जनता को धमकियां
खुलासा फर्स्ट, नीमच।
शराब ठेकेदार अशोक अरोरा द्वारा शहर के सार्वजनिक रास्तों पर किए गए अवैध अतिक्रमण का खुलासा होने के बाद भी प्रशासन का मौन शासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रसूख के नशे में चूर इस विवादित शराब ठेकेदार ने न केवल सरकारी सड़कों को अपनी जागीर समझकर लोहे के तारों से बंधक बना लिया है, बल्कि वहां से गुजरने वाली आम जनता को धमकियां भी दी जा रही हैं।
इस गंभीर मामले का खुलासा होने व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक जनहित में शिकायत पहुंचने के बावजूद नपा परिषद व सीएमओ दुर्गा बामनिया की चुप्पी शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या नीमच में नगर हित और सरकारी नियमों से ऊपर किसी माफिया का रसूख हो गया है, जिसके आगे पूरी नगर पालिका नतमस्तक नजर आ रही है?
बंगला नंबर 48, हनुमान चाट भंडार से जैन भवन मार्ग व सीआरपीएफ रोड जैसे मुख्य रास्तों पर अवैध कब्जा कर एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं का रास्ता रोकना सीधे तौर पर जनहित के विरुद्ध है।
बागेश्वर मंदिर के समीप भी इसी तरह की अवैध हरकतों का खुलासा हुआ है, जहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
पूरे प्रदेश में जहां अवैध अतिक्रमण पर शासन का बुलडोजर मजबूती से चल रहा है, वहीं नीमच नगरपालिका की यह निष्क्रियता शासन की जीरो टॉलरेंस नीति को चुनौती दे रही है। जागरूक नागरिक अब यह पूछ रहे हैं कि क्या नगरपालिका की जिम्मेदारी जनता के हितों की रक्षा करना है या रसूखदारों के अवैध कब्जों को संरक्षण देना?
मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार और माफिया मुक्त प्रदेश की संकल्पना के बीच नीमच प्रशासन का यह ढुलमुल रवैया शासन की छवि को धूमिल कर रहा है।
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