ढोल-नगाड़े पर झूमने के बाद फिर नाराज किसान: लैंड पूल की कवायद एक झटके में बैकफुट पर
17 से 21 नवंबर तक क्या हुआ खुलासा फर्स्ट, इंदौर । देश और मध्य प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन सिंहस्थ पर्व के लिए तैयारी चल रही है। वहीं, इसमें लंबे समय से चल रही लैंड पूल की कवायद एक झटके में बैकफु
Khulasa First
संवाददाता

17 से 21 नवंबर तक क्या हुआ
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश और मध्य प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन सिंहस्थ पर्व के लिए तैयारी चल रही है। वहीं, इसमें लंबे समय से चल रही लैंड पूल की कवायद एक झटके में बैकफुट पर आ गई। आखिरकार बैठक का दौर हुआ और इस स्कीम से सरकार पीछे हट गई है।
किसानों ने ढोल-नगाड़े बजा लिए, फिर एक पन्ने का नया आदेश आया था।
इसके बाद किसान फिर नाराज हो गए थे। भोपाल में बंद कमरे में दो दौर की मुलाकात हुई। वहीं, संघ पदाधिकारी कमल सिंह आंजना खफा होकर लौट गए। इस मामले में 17 से 21 नवंबर तक क्या कहानी हुई और स्कीम कितनी बदल गई। इंदौर हाई कोर्ट में लगी याचिका में क्या दम।
क्या थी सिंहस्थ लैंड पूल स्कीम
उज्जैन में 17 गांवों में सिंहस्थ क्षेत्र में 2378 हेक्टेयर जमीन पर यह स्कीम आ रही थी। टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) व यूडीए (उज्जैन डेवलपमेंट अथॉरिटी) के जरिए यह स्कीम लाई जा रही थी। इसे टीडीएस 8,9,10 और 11 नाम दिया गया था। इसमें किसानों से करीब 1900 हेक्टेयर जमीन ली जाती। इसके बदले 50 प्रतिशत डेवलपमेंट प्लॉट यानी 950 हेक्टेयर जमीन किसानों को वापस लौटाई जाती। ली गई जमीन पर स्थायी सिंहस्थ सिटी का निर्माण किया जाता।
स्कीम नोटिफिकेशन
17 मार्च 2025 को।
लेआउट सेंशन- 25 सितंबर 2025।
फाइनल नोटिफिकेशन- 25 सितंबर।
आपत्तियां खारिज 28 अक्टूबर।
कुल एरिया 41.89 लाख वर्गमीटर।
किसानों को वापस मिलता करीब 20 लाख वर्गमीटर।
रोड में जा रहा- 8.37 लाख वर्गमीटर।
सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर में- 3 लाख वर्गमीटर
खुली जमीन/पार्क- दो लाख वर्गमीटर करीब।
जमीन कई टुकड़ों में बंट जाएगी
भारतीय किसान संघ ने इस स्कीम का शुरू से विरोध किया। किसानों का कहना था कि स्थायी निर्माण की जरूरत है। अभी तक जो होता आया है कि सरकार अस्थायी तौर पर किसानों से जमीन लेती है और एक साल का फसल का मुआवजा देती है। वही प्रथा कायम रखी जाए।
उज्जैन सिंहस्थ 2028 में स्थायी निर्माण से नुकसान होगा और जमीन कई टुकड़ों में बंट जाएगी। इससे खेती के काम की नहीं रहेगी। वहीं कई स्थायी निर्माण, मकान हैं जो टूट जाएंगे। यह भी आपत्ति थी कि किसान को वापस मिली जमीन में से निर्माण के लिए कम से कम 0.4 हेक्टेयर प्लॉट की शर्त रखी गई है।
यह शर्त हर किसान के लिए संभव नहीं है। सरकार ने सालों से इस क्षेत्र की गाइडलाइन नहीं बढ़ाई। अब भी यहां 16 लाख बीघा का भाव गाइडलाइन में है, जबकि बाजार में दो करोड़ प्रति बीघा है, इसलिए किसानों को नुकसान होगा। 50 फीसदी प्लॉट भी सभी किसानों को नहीं मिलेंगे, यह रेंडम आधार पर है।
17 नवंबर की बैठक
17 नवंबर को भोपाल में रात नौ बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बैठक हुई। इसमें बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी थे। बैठक के बाद सीएम ने कहा कि सिंहस्थ दिव्य, भव्य और विश्वस्तरीय होगा।
उन्होंने कहा कि साधु-संतों और किसानों की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। वहीं, कमल सिंह आंजना ने कहा कि सरकार ने किसानों की भावनाओं का ध्यान रखा है। बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि लैंड पूलिंग लागू नहीं होगी और सभी काम सहमति से होंगे।
18 नवंबर को यह हुआ
किसान संघ के पदाधिकारियों के साथ किसानों ने जमकर खुशी जताई। उज्जैन में किसानों ने ढोल-नगाड़े बजाए। पदाधिकारियों का स्वागत किया गया कि अब लड़ाई खत्म हुई।
19 नवंबर को यह हुआ
इसके बाद सरकार ने किसानों से हुई बातचीत के बाद संशोधित पत्र जारी किया। इस पत्र में कहा गया कि मप्र नगर और ग्राम निवेश एक्ट 1973 की धारा 52 (1) (ख) का उपयोग किया जाएगा। इस धारा का इस्तेमाल करते हुए यूडीए के जरिए लागू नगर विकास योजना क्रमांक 8,9,10 और 11 में बदलाव किए गए हैं। इसका मतलब है कि कानून में संशोधन किया गया है।
ए- धारा 50(12)(क) के तहत विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए तय भूमियों तक यह योजना लागू होगी।
बी- धारा 50 (12)(क) के तहत तय भूमि के अतिरिक्त भूमि स्कीम से मुक्त होगी और भू-स्वामियों के पास बनी रहेगी।
सी- धारा 50(12)(क) के तहत मार्ग व सामाजिक अधोसंरचना में ली जाने वाली भूमि का प्रतिकर अलग से तय होगा।
अब कितनी जमीन स्थायी तौर पर जाएगी
किसानों की पहले 1900 हेक्टेयर जमीन स्थायी जा रही थी। उन्हें बदले में करीब 950 हेक्टेयर जमीन डेवलप प्लॉट के तौर पर मिल रही थी। अब स्कीम में पास लेआउट प्लान के मुताबिक रोड में 8.37 लाख वर्गमीटर यानी करीब 84 हेक्टेयर जमीन रोड में जा रही है, साथ ही सामाजिक संरचना में करीब तीन लाख वर्गमीटर जमीन भी ली जा सकती है।
संशोधन के बाद भी किसानों की 100 से 150 हेक्टेयर के बीच की जमीन स्थायी तौर पर जाएगी। पहले 1900 हेक्टेयर जा रही थी और 950 हेक्टेयर वापस मिल रही थी। इसमें ली जाने वाली 100-150 हेक्टेयर जमीन का किसानों को भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के तहत मुआवजा देय होगा।
20 व 21 नवंबर को बंद कमरे में क्या हुआ
किसान संघ की मांग थी कि नगर विकास योजना खत्म हो, साथ ही अस्थायी तौर पर सिंहस्थ के लिए जमीन ली जाए। जब 19 नवंबर को नया संशोधन आया तो किसान संघ नाराज हो गया। उनका कहना था कि यह किसानों को उलझाने वाली बात है।
साफ मांग थी कि उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र से नगर विकास योजना (टीडीएस 8,9,10,11) लैंड पूलिंग एक्ट का गजट नोटिफिकेशन रद्द किया जाए। 2013 के तहत होगा भूमि अधिग्रहण
इस संशोधन के बाद सरकार लैंड पूलिंग की जगह अब 50(12)(क) के तहत जमीन लेगी। यह काम रोड जैसे प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत होगा। इसका मतलब है कि मुआवजा मिलेगा, लेकिन कितना होगा, यह तय नहीं है। इसके साथ ही पाइंट सी में सामाजिक अधोसंरचना का भी प्रावधान जोड़ा गया है।
इसके तहत डिस्पेंसरी, स्कूल और धर्मशाला जैसी सुविधाओं के लिए भी सरकार जमीन ले सकती है। किसान पहले ही आपत्ति जता चुके हैं कि सिंहस्थ क्षेत्र में गाइडलाइंस सालों से नहीं बढ़ी हैं। बाजार और मूल कीमत में भारी अंतर है और स्थायी निर्माण से उन्हें नुकसान होगा।
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