हाथ कंगन को आरसी क्या: जज स्वयं मौके पर जाकर देखेंगे भोजशाला मंदिर या मस्जिद
KHULASA FIRST
संवाददाता

धार की धड़कन तेज, वाग्देवी मां सरस्वतीजी का जल्द खत्म होगा वनवास..!
कमाल मौला मस्जिद की हकीकत का खुलासा अब किसी भी वक्त, हाई कोर्ट खुद करेगी भोजशाला का निरीक्षण
सोमवार को हुई सुनवाई, पहले भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेंगे हाई कोर्ट जज, फिर 2 अप्रैल को सुनवाई
हिंदू पक्ष की मांग- सभी अंतरिम आवेदन खारिज करें, मुस्लिम पक्ष ने की हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका खारिज करने की मांग
एएसआई का 91 दिन चला था सर्वे, खुदाई में मिले थे कई ऐतिहासिक प्रमाण, फोटो-वीडियो में दर्ज मंदिर-पाठशाला होने का सच
भोजशाला के लिए 3 दशक से भी ज्यादा समय से आंदोलनरत हैं धार-झाबुआ अंचल, वसंत पंचमी पर हर बार बनती है टकराव की स्थिति
नंगी आंखों से भी साफ नजर आता है भोजशाला का सच, लंदन में है वाग्देवी की प्राचीन-ऐतिहासिक प्रतिमा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारतवर्ष में एक कहावत बरस-ओ-बरस से प्रचलन में है- "हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या’। इस कहावत का अर्थ है कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। जो चीज सामने स्पष्ट दिख रही हो, उसे साबित करने के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं पड़ती।
यह कहावत उस स्थिति में कही जाती है, जब बात साफ हो, फिर भी कोई सबूत मांगे। हाथ कंगन को आरसी क्या यानी आरसी का मतलब आईना (शीशा) होता है। अगर हाथ में कंगन पहना है, तो उसे देखने के लिए आईने की जरूरत नहीं पड़ती। पढ़े-लिखे को फारसी क्या यानी जो व्यक्ति पढ़ा-लिखा और बुद्धिमान है, उसके लिए कठिन भाषा (जैसे फारसी) को समझना बहुत आसान है। ये कहावत हमारे अपने मालवा-निमाड़ अंचल की पुरातात्विक महत्व की धार स्थित ऐतिहासिक धरोहर भोजशाला के मामले में सामने आई है। मामला भोजशाला के मंदिर होने या न होने से जुड़ा है।
मुस्लिम तबका इस धरोहर को मस्जिद मुकर्रर कर रहा है और बरसों से अड़ा हुआ है कि ये कमाल मौला मस्जिद है। हिंदू पक्ष इसे संस्कृत पाठशाला व मां वाग्देवी सरस्वतीजी का मंदिर बताता है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क-दावों के साथ बरसों से आमने-सामने हैं और हर बरस वसंत पंचमी पर धार-झाबुआ अंचल में टकराव की स्थिति बनती है। लड़ाई कोर्ट की चौखट पर भी है और उसी चौखट पर सोमवार को हुई सुनवाई में से निकलकर ये कहावत सामने आई है।
हाई कोर्ट ने तय किया है कि जज स्वयं मौके पर जाकर देखेंगे कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद? ये असमंजस तब उभरकर सामने आया, जब एएसआई की 91 दिन चली खुदाई में कई अकाट्य साक्ष्य सामने आए कि भोजशाला एक मंदिर का भग्नावशेष है। इस मसले पर मुस्लिम पक्ष कोर्ट के समक्ष हाजिर हुआ है कि भावनाओं से नहीं, सबूतों के आधार पर न्याय हो।
मुस्लिम पक्ष ने तो हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका ही खारिज करने की मांग की है। हिंदू पक्ष ने कोर्ट से सभी अंतरिम आवेदन खारिज करने की मांग की है। अब तय हुआ है कि पहले भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेंगे हाई कोर्ट जज, फिर 2 अप्रैल को करेंगे सुनवाई।
भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े विवाद पर सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्तिद्वय विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ द्वारा की गई इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विवाद की प्रकृति को देखते हुए स्वयं भोजशाला परिसर का निरीक्षण करने का निर्णय लिया और अगली सुनवाई 2 अप्रैल निर्धारित की है।
हिंदू पक्ष की ओर से याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी, हरप्रसाद तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का पक्ष रखा गया। लखनऊ से आए याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी सहित अन्य सदस्यों की ओर से यह तर्क दिया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में परिसर के भीतर अनेक ऐसे अवशेष मिले हैं जो इस स्थल के मूल रूप से मंदिर होने के संकेत देते हैं।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं में मनीष गुप्ता, सहज चौधरी एवं विनय जोशी ने उक्त प्रकरण पर कोर्ट में अपना पक्ष रखा। मुकदमा संख्या 10484/2022 में कुलदीप तिवारी की तरफ से एक संशोधन एप्लीकेशन भी दाखिल की गई, जिसमें राजा भोज द्वारा लिखित कुछ किताबों और अन्य प्रमाणों को प्रस्तुत किया। हिंदू पक्ष ने कोर्ट के समक्ष यह भी कहा कि सर्वेक्षण में मंदिर शैली के स्तंभ, प्राचीन शिलालेख, मूर्तिकला के अवशेष तथा परमारकालीन स्थापत्य से जुड़े प्रमाण सामने आए हैं।
केवल जज करेंगे दौरा, किसी अन्य को अनुमति नहीं रहेगी
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा सर्वेक्षण की व्याख्या विवादित है और उसके निष्कर्षों को चुनौती दी जाएगी। यह परिसर ऐतिहासिक रूप से कमाल मौला मस्जिद के रूप में भी जाना जाता रहा है और इस पक्ष को भी कोर्ट के समक्ष रखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा मामले में अनेक ऐतिहासिक और पुरातात्विक दावे किए जा रहे हैं, इसलिए वास्तविक स्थिति को समझने के लिए कोर्ट स्वयं स्थल का निरीक्षण करेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि निरीक्षण की प्रक्रिया नियंत्रित होगी और उस दौरान किसी भी पक्ष की उपस्थिति की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ज्ञात हो कि भोजशाला व उसके आसपास वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है। अब दोनों पक्षों को इस रिपोर्ट पर अपनी-अपनी आपत्तियां और सुझाव देने का अवसर दिया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी, हरप्रसाद तिवारी के साथ गोपाल शर्मा, अशोक जैन, राजेश बिंजवे, संजय सकलेचा व अन्य लोग उपस्थित थे।
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