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कॉलेज भूमि विवाद में नया मोड़: संभागायुक्त की चेतावनी अनदेखी; अपर आयुक्त ने लगाया स्टे

KHULASA FIRST

संवाददाता

27 जनवरी 2026, 7:11 पूर्वाह्न
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कॉलेज भूमि विवाद में नया मोड़

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के क्रिश्चियन कॉलेज से जुड़ी करीब 500 करोड़ रुपये की जमीन के मामले में जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब संभागायुक्त कार्यालय से ही पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।

यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी
अपर आयुक्त तरुण भटनागर ने कलेक्टर कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर स्टे देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब जिला प्रशासन वर्षों पुराने रिकॉर्ड खंगालकर सरकारी जमीन को वापस लेने की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका था। मामले में लंबे समय से सक्रिय कथित लाइजनरों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक हार चुके हैं याचिकाकर्ता
इस पूरे विवाद में कॉलेज प्रबंधन की ओर से प्रिंसिपल अमित डेविड पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं, जहां से उन्हें राहत नहीं मिली थी। दोनों अदालतों ने अपील खारिज करते हुए नियमानुसार उपलब्ध वैकल्पिक उपाय अपनाने की बात कही थी।

रिपोर्ट प्रस्तुत की गई
इसके बाद मामला कलेक्टर कोर्ट में पहुंचा, जहां कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त रुख अपनाया। एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी द्वारा विस्तृत जांच कर दशकों पुराने दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

धारा 32 का आवेदन खारिज, फिर भी मिल गया स्टे
कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रबंधन ने प्रतिपरीक्षण के अधिकार को लेकर धारा-32 के तहत आवेदन किया, जिसे कलेक्टर ने खारिज कर दिया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने संभागायुक्त कार्यालय में अपील दायर की, जहां अपर आयुक्त तरुण भटनागर ने कलेक्टर कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

अगली सुनवाई 3 फरवरी को
आदेश में कहा गया कि तर्कों और साक्ष्यों के प्रतिपरीक्षण का अधिकार आवेदक को मिलना चाहिए और प्रक्रिया नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। इसी आधार पर 26 दिसंबर को दिए गए आदेश पर स्टे लगाया गया और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए। अगली सुनवाई 3 फरवरी तय की गई है।

संभागायुक्त की चेतावनी दरकिनार?
सूत्रों के अनुसार जब यह अपील संभागायुक्त कार्यालय पहुंची थी, तब संभागायुक्त सुदाम पी. खाड़े ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए पूरी प्रक्रिया नियमों और शासन हित में करने की स्पष्ट हिदायत दी थी। इसके बावजूद अपर आयुक्त द्वारा स्टे आदेश जारी किए जाने से प्रशासनिक हलकों में असहजता बढ़ गई है।

आदेश से भोपाल तक हलचल
हैरानी की बात यह रही कि कलेक्टर कार्यालय को इस स्टे की जानकारी तब लगी, जब कॉलेज प्रबंधन ने खुद प्रशासन को सूचित किया। इसके बाद इंदौर से लेकर भोपाल तक हलचल मच गई है। अब शासन स्तर पर यह समझने की कोशिश हो रही है कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राहत नहीं मिली, तब संभागीय स्तर पर प्रक्रिया पर स्टे कैसे दे दिया गया।

सूत्र बताते हैं कि पूरे मामले की रिपोर्ट भोपाल भेजी जा रही है और आदेश की वैधानिकता को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है।

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