खबर
टॉप न्यूज

मोक्ष की नगरी ओंकारेश्वर में उमड़ेगा 'आस्था का सैलाब': पुण्य सलिला नर्मदा नदी की लहरों में गूंजता ‘ॐ’...

नव वर्ष की शुरुआत भगवान शिव के साथ होगी, मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मिट जाते हैं पाप हेमंत उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर । ओंकारेश्वर और नर्मदा क्षेत्र की...

Khulasa First

संवाददाता

26 दिसंबर 2025, 11:33 पूर्वाह्न
2 views
शेयर करें:
मोक्ष की नगरी ओंकारेश्वर में उमड़ेगा 'आस्था का सैलाब'

नव वर्ष की शुरुआत भगवान शिव के साथ होगी, मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मिट जाते हैं पाप

हेमंत उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर
ओंकारेश्वर और नर्मदा क्षेत्र की महिमा को दर्शाती इस कहावत का अर्थ है कि इस पावन क्षेत्र में नर्मदा नदी का प्रत्येक पत्थर (कंकर) भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि ओंकारेश्वर में नर्मदा के जल के स्पर्श मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है। यहां का कण-कण शिवमय है।

यही कारण है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान पाने वाले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को केवल एक पल ही निहारने के लिए देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालु बेताब रहते हैं। अंग्रेजी नव वर्ष 2026 के पहले दिन भी यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। भक्तों का मानना है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कष्ट और पाप नष्ट होते हैं। मोक्ष की प्राप्ति होती है।

70 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना
डिप्टी कलेक्टर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने खुलासा फर्स्ट से विशेष बातचीत में बताया कि नए साल के पहले दिन करीब 70 हजार श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर आने की संभावना है। इस दिन सामान्य दर्शन के साथ ही वीआईपी दर्शन और प्रोटोकाल दर्शन की सुविधा भी जारी रहेगी। सीढ़ियों की बजाय भक्त ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रैंप से गुजर कर ही दर्शन कर सकेंगे।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तीर्थ पंडा संघ के प्रमुख पंडित नीलेश पुरोहित ने खुलासा फर्स्ट से बातचीत करते हुए कहा कि वर्तमान में ही प्रतिदिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु ओंकारेश्वर आ रहे हैं। नए साल में यह आंकड़ा 70 हजार के पार पहुंच जाने की उम्मीद है। भक्तों को रैंप से ही दर्शन करवाए जाएंगे। इसमें ढाई घंटे का समय लग सकता है।

"परमेश्वरमं परं पावनं, नर्मदां तटे शिवम्।
ओंकारममलेश्वरं भजे, सर्वपाप प्रणाशनम्॥‘
अर्थात- नर्मदा नदी के पावन तट पर स्थित परमेश्वर और परम पवित्र भगवान शिव के ओंकारेश्वर और ममलेश्वर स्वरूप की मैं आराधना करता हूं, जो भक्तों के सभी पापों का विनाश करने वाले हैं। ‘नर्मदा का हर कंकर, शंकर है।‘

दर्शन में लगेगा दो से ढाई घंटे का समय
मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने बताया कि कतार में लगने वाले सामान्य भक्तों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन में दो से ढाई घंटे का समय लगेगा। एक समय में चार लोग ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पाते हैं। काशिव के अनुसार बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए ही व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। 25 दिसंबर से ही यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। प्रशासन का लक्ष्य है कि देश-विदेश से यहां आने वाले भक्तों को दर्शन और स्नान में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

भक्तों के लिए दस स्थानों पर रहेगी वाहन पार्किंग की सुविधा
पं. नीलेश पुरोहित के अनुसार स्थान की कमी के कारण मंदिर तक वाहन नहीं ले जाए जा सकते। दोनों पुलों के पार ही वाहन रखने की सुविधा है। वैसे एक दर्जन स्थानों पर वाहन पार्किंग की सुविधा जुटाई गई है। देश के तकरीबन सभी प्रांतों से प्रतिदिन श्रद्धालु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनों के लिए आते हैं। नव वर्ष पर भी नर्मदा नदी में स्नान के साथ नाव चालन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनों का अपना महत्व है। हर भक्त यहां के दर्शन करने को आतुर रहता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में कुछ रोचक जानकारी
मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू यानी खुद प्रकट होने वाला स्वरूप है। इसकी स्थापना से एकाधिक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। एक कथा के अनुसार अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता ने नर्मदा तट पर स्थित पर्वत पर भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे। बड़ी संख्या में भक्त मांधाता द्वीप की सात किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने यहां आते हैं।

एक कथा यह भी है कि विंध्याचल पर्वत ने जब नारद मुनि से सुमेरू पर्वत की प्रशंसा सुनी तो खुद की श्रेष्ठता के लिए शिव की आराधना की। इसके बाद शिव ने प्रकट होकर इसे ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में विभाजित किया। एक अन्य कथा के अनुसार असुरों से हार जाने के बाद देवताओं ने भगवान शिव की प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने ओंकारेश्वर स्वरूप में प्रकट होकर असुरों का संहार किया था।

ॐ के आकार के द्वीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और नर्मदा नदी के स्नान से भी तीर्थ दर्शन का पुण्य मिलता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मुख्य द्वीप पर और ममलेश्वर नर्मदा नदी के दक्षिण तट पर है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि अन्य तीर्थों की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक कि वहां का जल ओंकारेश्वर में अर्पित नहीं किया जाए।

मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती हर दिन इस मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए आते हैं। इस कारण प्रतिदिन मंदिर में चौपड़-पासे की बिसात बिछाई जाती है।

खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसे देखने भी लोग आते हैं। यहां आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र एकात्म धाम और अद्वैत लोक संग्रहालय बनाया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि यहीं शंकराचार्य ने युवाकाल में अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से शिक्षा ग्रहण की थी। मध्य प्रदेश सरकार अब इसे धार्मिक नगरी के साथ प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाने में भी जुटी है।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!