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50 मौतें, शव गांव भेजे श्मशान से गायब किया रिकॉर्ड: प्रशासन के वादे और हकीकत के बीच पिसती जनता

Khulasa First

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संवाददाता

19 जनवरी 2026, 8:11 pm
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सैंपल की जांच रिपोर्ट में पानी पीने योग्य होने का दावा

विधानसभा में आएगा स्थगन प्रस्तावराहुल गांधी का बड़ा दांव

भागीरथपुरा जैसी त्रासदी की दहलीज पर परदेशीपुरा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नए वर्ष के दो दिन पूर्व भागीरथपुरा में उस वक्त अफरातफरी मच गई थी जब बड़ी संख्या में लोग परदेशीपुरा स्थित वर्मा अस्पताल में भर्ती होने लगे। बाद में पता चला ये बीमारी दूषित पानी से फैली है। कई मौत के बाद स्थिति और खराब हो गई। देखते ही देखते ये मुद्दा राष्ट्रीय बन गया। कांग्रेस ने लपक लिया और आंदोलन-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े और नगर अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी कार्यकर्ताओं के साथ यहां पहुंचे और पीडि़तों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मिले।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अन्य तमाम नेता-पार्षद-कार्यकर्ता यहां जुट गए। इन हंगामों के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी 17 जनवरी यानी घटना के करीब 20 दिन बाद पहुंचे।

पीडि़तों से मुलाकात की और चित-परिचित शैली में बयान देकर चले गए। कल पार्टी के यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें राहुल की पीडि़तों से मुलाकात और बातचीत रिकॉर्ड है।

क्या है राहुल के वीडियो में... मृतकों के परिजन राहुल गांधी को बता रहे हैं दूषित पानी कई दिनों से पीने को मजबूर थे, लेकिन 22 दिसंबर से बीमारी शुरू हुई। कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए। जीवनलाल बरेड़े और मीराबाई के परिवारों ने बताया बुजुर्ग और अन्य सदस्य बीमार पड़े, कुछ की मौत हो गई, लेकिन मुआवजा अपर्याप्त और प्रशासन की प्रतिक्रिया ढीली रही।

एक पीडि़त कह रहा है निगम अफसरों की लापरवाही और नर्मदा लाइन कनेक्शन के लिए ली गई रकम के बावजूद पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। आयुक्त का तबादला कर जवाबदेही खत्म कर दी गई। राहुल गांधी प्रभावितों से कहते सुने जा रहे हैं उनकी लड़ाई को लड़ी जाएगी ताकि आगे किसी और परिवार के साथ ऐसा न हो। वीडियो 8 मिनट 10 सेकंड का है।

17 जनवरी को दूषित पानी पीने से प्रभावित लोगों से मिले कांग्रेस नेता राहुल गांधी का वीडियो कल पार्टी ने अपने यूट्यूब चैनल पर वायरल किया। इसमें एक कार्यकर्ता कह रहा है 50 से ज्यादा मौतें हुई हैं। सरकार आंकड़े छिपा रही है। कई शव रातोरात गांव भेज दिए गए तो श्मशान से भी रिकॉर्ड गायब करवा दिया गया।

राहुल गांधी व पीड़ितों की बातचीत
राहुल गांधी- परिवार में और

कोई बीमार हुआ?

जीवनलाल बरेड़े के परिजन- बड़ी मम्मी बीमार हुईं। मां को भी दस्त लगे थे।

राहुल- कब शुरू हुई ये समस्या?

परिजन- 22 दिसंबर से लोगों की

तबीयत खराब होने लगी। आधा मोहल्ला अस्पताल में भर्ती हो गया।

राहुल-क्या सीवेज का पानी घुस गया था?

परिजन- हां, दस्त ऐसे कि आधे घंटे

में 27-28 डाइपर बदलने पड़े।

राहुल- अब आप कैसा पानी पी रहे हैं?

परिजन- बाजार से आरओ का। प्रशासन सुन ही नहीं रहा। टैंकर फ्री में थोड़े आ रहे हैं।

राहुल- जिनकी मौत हुई उनके परिवार को मुआवजा मिला?

परिजन- हमारे यहां कोई मिलने तक नहीं आया। मीडिया में 5-10 लाख का दावा किया जा रहा है, लेकिन सिर्फ 2 लाख मिले। बाकी पैसा कहां गया?

मीराबाई के परिवार से भी राहुल की कुछ ऐसी ही बातचीत है। उनका बेटा कह रहा है-नगर निगम के अफसर ही जिम्मेदार हैं। उनकी लापरवाही से यह सब हुआ। मेरी मां को तीन दिन वेंटिलेटर पर रखा गया, फिर उनकी मौत हो गई।

सरकार ने चार दिन बाद माना मौत दूषित पानी के कारण हुई। हम चाहते हैं कि हमारी लड़ाई लड़ी जाए ताकि आगे किसी और परिवार के साथ ऐसा न हो। एक अन्य परिजन कह रहा है-हम 6 माह से शिकायत कर रहे हैं। कोई सुन नहीं रहा था।

अस्पताल पहुंचे तब हडक़ंप मचा। एक परिजन कह रहा है-पूरा भागीरथपुरा श्मशान बन गया। कई शव रातोरात गांव भिजवा दिए गए। 28 दिसंबर से श्मशान का रिकॉर्ड भी गायब कर दिया गया। मुआवजा कुछ को 2 लाख मिला, जबकि मीडिया को 5-10 लाख बताया गया।

मरीज 447, रिफंड 17 को ही
भागीरथपुरा व्यवस्था की नाकामी का गवाह बना हुआ है। दूषित पानी की त्रासदी झेल रहे सैंकड़ों परिवारों के लिए अब इलाज का खर्च जी का जंजाल बन गया है। शासन-प्रशासन द्वारा खर्च वहन करने के बड़े-बड़े दावों के उलट हकीकत यह है अब तक केवल 17 मरीजों के हिस्से ही 1.71 लाख रुपए का रिफंड आया है, जबकि अस्पतालों के बिलों का आंकड़ा 1 करोड़ रुपए को छूने का अनुमान है।

राहुल गांधी के सामने छलका दर्द... शनिवार को जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भागीरथपुरा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे, तो सरकारी दावों की कलई खुल गई। पीड़ितों ने आपबीती सुनाते हुए बताया किसी के घर का बजट अस्पताल की 17 बोतलों ने बिगाड़ दिया, तो अन्य को 45 हजार से 1.5 लाख रुपए तक कर्ज लेकर चुकाने पड़े। मरीजों का स्पष्ट कहना है प्रशासन ने पैसे लौटाने की बात तो कही, लेकिन फाइलों के चक्कर में अभी तक फूटी कौड़ी भी हाथ नहीं आई है।

आंकड़ों के आईने में त्रासदी...
त्रासदी की भयावहता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:

कुल भर्ती मरीज: 447 (निजी अस्पतालों में)

डिस्चार्ज हुए: 432 मरीज

गंभीर स्थिति: 6 मरीज अब भी आईसीयू में

अनुमानित खर्च: ₹1 करोड़ के पार होने की आशंका।

दावे बनाम वास्तविकता: 41 अस्पतालों ने लिखित में ‹नो पेंडिंग बिल› रिपोर्ट दी है, लेकिन हकीकत में मरीज अब भी रिफंड का इंतजार कर रहे हैं।

प्रशासनिक आदेश और अस्पतालों की मनमानी
जिला प्रशासन ने स्पष्ट आदेश जारी किया था डायरिया पीड़ितों का इलाज नि:शुल्क होगा और जो भुगतान कर चुके हैं उन्हें रिफंड दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 25 दिसंबर के बाद भर्ती मरीजों के लिए विशेष निर्देश जारी हुए थे। बावजूद अस्पतालों ने बिल कलेक्टोरेट को नहीं भेजे, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधर में है।

दावों और शिकायतों के बीच का गैप... एक तरफ स्वास्थ्य विभाग का कहना है उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है, दूसरी तरफ पीड़ितों का शोर बता रहा है सिस्टम और जनता के बीच संवादहीनता की बड़ी खाई है। सवाल है जब प्रशासन को पता है 447 मरीज भर्ती हुए थे, तो रिफंड केवल 17 को ही क्यों मिला? क्या 1 करोड़ के बिलों का बोझ इन गरीब परिवारों के कंधों पर ही रहेगा?

अस्पतालों को लौटाना है पैसा... अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए हैं मरीजों से लिया गया पैसा तत्काल लौटाएं। 41 अस्पतालों ने लिखित सूचना दी है उनका कोई बकाया नहीं है। किसी मरीज को रिफंड नहीं मिला है तो अवगत कराए। भुगतान सुनिश्चित कराएंगे। - डॉ. माधवप्रसाद हासानी, सीएमएचओ

पाइप लाइन का काम जारी, सप्लाई शुरु
भागीरथपुरा में नगर निगम ने नर्मदा की नई पाइप लाइन का काम जोरशोर से जारी है। करीब आधे क्षेत्र में लाइन डल गई है। पानी सप्लाई शुरु कर दी गई है। सैंपल की जांच में पीने योग्य घोषित किया गया है। इसके बाद भी मरीजों का मिलना जारी है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मौजूदगी में नई पाइपलाइन से सप्लाई शुरु की गई। पानी पीकर महापौर ने टेस्ट किया। चार सैंपल की जांच के बाद पानी पीने योग्य बताया गया है। करीब 30 प्रतिशत क्षेत्र में सप्लाई नई पाइप लाइन से शुरु हो गई है। हालांकि, लोग इस पानी का उपयोग नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने रहवासियों को सलाह दी है पानी उबालकर ही उपयोग करें।

मरीजों का मिलना जारी... प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाकर लोगों को समुचित सहायता मुहैया की जा रही है। इसके बाद भी नए मरीजों का मिलना जारी है। बताया जाता है रविवार को भी दो मरीज निकले। इस तरह पूरे भागीरथपुरा में अभी भी बीमारी का प्रकोप बना हुआ है। ड्रेनेजयुक्त पानी से अब तक 24 लोगों की मौत हुई है जबकि सैकड़ों मरीज अब तक अस्पतालों में इलाज करा रहे है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग लगातार मरीजों के ठीक होने का दावा कर रहा है लेकिन नए मरीज अफसरों की चिंता का कारण बने हुए हैं।

सभी का मुफ्त इलाज... सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने बताया पीडि़तों का एमवाय, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय सहित शहर के लगभग 45 निजी अस्पतालों में इलाज किया गया है। इनमें बॉम्बे और अरबिंदो शामिल हैं। शासन द्वारा मुफ्त इलाज की घोषणा के बाद सभी निजी अस्पतालों से इलाज का हिसाब-किताब लिया है। बिलों की जांच के बाद भुगतान कर दिया जाएगा। 45 अस्पतालों में से 39 लिखकर दे चुके हैं मुफ्त इलाज किया है। जिन मरीजों अथवा उनके परिजनों ने रुपए जमा करवाए थे, उनको वापस कर दिए गए हैं। कई मरीज पहले से बीमारियों से पीडि़त रहे हैं। इनमें कैंसर, किडनी, लिवर, हार्ट, डबल निमोनिया सहित हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियां शामिल हैं।

कांग्रेस करेगी सरकार की घेराबंदी
प्रदेश की आर्थिक राजधानी के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने बड़े राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद मुद्दा केवल एक मोहल्ले की समस्या न रहकर अब राष्ट्रीय और राजकीय पटल पर सरकार की घेराबंदी का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।

राहुल गांधी ने इंदौर प्रवास के दौरान स्पष्ट संकेत दिया इस त्रासदी की गूंज देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में सुनाई देगी, वहीं प्रदेश के दिग्गज 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार से जवाब-तलब करेंगे।

विपक्ष ने मामले को नगरीय प्रशासन की गंभीर विफलता करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है जलप्रदाय योजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपए बहाने के बावजूद प्रदेश की जनता को जहर पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मोर्चा खोलते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही से अधिक सत्तारूढ़ दल की जवाबदेही का मामला बताया है।

विपक्षी खेमे का आरोप है करोड़ों के बजट के बावजूद आम जनता की सुरक्षा में सरकारी मशीनरी नाकाम रही। इधर, इस त्रासदी के बाद मुआवजे की सियासत ने भी तूल पकड़ लिया है। शासन द्वारा मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता दी गई है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी सहायता राशि और नए वादों के जरिए मुआवजे पर सरकार के खिलाफ तीखा नैरेटिव बना दिया है। दूसरी ओर प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्थिति को संभालने का प्रयास कर स्पष्ट किया है भागीरथपुरा के नागरिक उनके अपने हैं और सरकार हर संभव सहायता के लिए तत्पर।

महानगरों की रिपोर्ट बनेग कांग्रेस की ढाल... भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख महानगरों से जल के नमूने एकत्र कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। विधानसभा में कांग्रेस इसी रिपोर्ट को ढाल बनाकर बजट सत्र को हंगामेदार बनाने की योजना में है। सवाल केवल भागीरथपुरा का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में जल प्रबंधन और खर्च करोड़ों के हिसाब-किताब का है। विधानसभा के बजट सत्र में दूषित जल का यह मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आने वाला है।

दो साल से नलों में दूषित पानी, शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
स्वच्छता में नंबर वन का तमगा हासिल करने वाले इंदौर के परदेशीपुरा क्षेत्र में सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता दम तोड़ती नजर आ रही है। वार्ड नंबर 23 स्थित अभिभाषक ओमप्रकाश सटके वाली गली (गली नंबर 6) के रहवासी पिछले दो वर्षों से नलों में आने वाले दूषित और बदबूदार पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

विडंबना यह है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से लेकर 311 ऐप तक की गई शिकायतों को बिना किसी समाधान के ही बंद कर दिया गया। आक्रोशित रहवासी जब अपनी व्यथा लेकर विधायक रमेश मेंदोला के द्वार पहुंचे तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, वहीं नगर निगम के कर्मचारी महज औपचारिकता निभाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

क्षेत्र की भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नलों में महज 20 मिनट आने वाला पानी न केवल मटमैला और दुर्गंधयुक्त है, बल्कि उसमें कीड़े-मकोड़े और जीव-जंतु तक निकल रहे हैं। स्थानीय निवासी सुनीता के अनुसार इस दूषित पानी के सेवन से उनका नाती गंभीर बीमारी की चपेट में है और उसका उपचार चल रहा है।

भागीरथपुरा में हाल ही में हुई दूषित जल त्रासदी के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। क्षेत्र की महिलाओं ने जब पार्षद के घर गंदा पानी भरी बाल्टियों के साथ प्रदर्शन किया, तब कहीं जाकर आश्वासन का दौर शुरू हुआ। एक ओर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल कागजों पर चार दिनों में समस्या दूर करने और क्लोरिनेशन के निर्देश दे रहे हैं, वहीं धरातल पर जनता गंदा पानी पीने को मजबूर है।

पार्षद प्रतिनिधि का बयान... पिछले 2 साल से नगर निगम में लेटर लगाए जा चुके हैं और फाइल आगे बढ़ाना प्रशासन का काम है। नर्मदा का पानी गंदा आ रहा है जिसे देखते हुए कुछ पाइप लाइन मैंने अपने निजी खर्चे से डलवाई है। रहवासियों की इस दूषित पानी की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा।- धर्मेंद्र मौर्य, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 23, परदेशीपुरा, इंदौर

पूर्व कलेक्टर पी. नरहरि करेंगे मौतों की जांच
भागीरथपुरा में मौतों की जांच के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने उच्चस्तरीय समिति गठित की है। खास बात इसमें पूर्व कलेक्टर और पीएचई के प्रमुख सचिव पी. नरहरि भी हैं। समिति महाधिवक्ता से राय लेकर गठित की गई है।

कमेटी की अध्यक्षता एसीएस सामान्य प्रशासन करेंगे। नगरीय प्रशासन संचालनालय आयुक्त संकेत भोंडवे सदस्य सचिव होंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इंदौर में समीक्षा की थी।

एसीएस नगरीय प्रशासन संजय दुबे से तात्कालिक जांच कराई थी। इसके आधार पर अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया फिर निगमायुक्त दिलीप यादव को हटा दिया था साथ ही सीएम ने प्रारंभिक तौर पर इसमें अपर कलेक्टर आईएएस पवार नवजीवन विजय से भी जांच कराने का ट्वीट किया था। लेकिन मामला सीनियर आईएएस तक पहुंच गया तो इसका कोई मतलब नहीं रहा। अब नई हाईलेवल कमेटी का गठन हुआ है।

हाई कोर्ट में याचिकाएं-सीएस से मांगा जवाब... हाई कोर्ट में चार जनहित याचिकाएं लगी हैं। सभी में हाई कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच या स्पेशल जांच कमेटी बनाने व जिम्मेदारों पर आपराधिक केस की मांग है। हाई कोर्ट एक सुनवाई में सीएस अनुराग जैज से वीसी के जरिए जवाब मांग चुका है। गंदे पानी की समस्या को लेकर उन्हें फिर वीसी के जरिए उपस्थित होने को कहा गया है।

दिग्विजय सिंह की पब्लिक हियरिंग की मांग... पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी लगातार हमलावर हैं और न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही इसमें पब्लिक हियरिंग की बात उठा रहे हैं, जिससे सभी को पता चले जांच कैसे हो रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जनवरी को इंदौर आकर सरकार को घेर चुके हैं। कहा है सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार में किसी की तो जिम्मेदारी तय हो। इन सभी दबाव के चलते राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाने का फैसला लिया है।

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