20 साल-11 कलेक्टर: फिर भी नहीं रुकी ट्रकों की आवाजाही; पुरानी लोहामंडी के रहवासी परेशान
KHULASA FIRST
संवाददाता

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
निरंजनपुर में नई लोहामंडी बनने के बाद भी पुरानी लोहामंडी में ट्रकों की आवाजाही नहीं रुकी है। पालदा, नवलखा, अग्रसेन चौराहे पर भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इससे रहवासी परेशान हो रहे हैं और यातायात बदहाल हो रहा है। 20 साल में 11 कलेक्टर बदले, लेकिन कोई भी समस्या का समाधान नहीं कर सका।
शहर के बीचोबीच लोहामंडी के कारण भारी वाहनो को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए मुसीबत था इस पर लोहामंडी को शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। इंदौर विकास प्राधिकरण ने 2006 में निरंजनपुर में नई लोहामंडी का लोकार्पण कराया।
लोहा व्यापारियों को भूखंड आवंटित किए गए। नई लोहामंडी से लोहा कारोबारियो ने कामकाज शुरु किया तो पुरानी मंडी में ट्रासपोर्टरों ने कब्जा जमा लिया।
इनके यहां ट्रकों से सामान आने लगा, जिससे कलेक्टर की यह मंशा कि लोहामंडी शिफ्ट होने के बाद ट्रकों की अवैध आवाजाही थम जाएगी, पूरी तरह फेल हो गई। नई लोहामंडी बने करीब 20 वर्ष हो गए है। इस बीच 11 कलेक्टर पदस्थ हुए। सभी ने प्रयास किया ट्रकों की आवाजाही पुरानी लोहामंडी में रोक दी जाए लेकिन ट्रासपोर्टर प्रशासन पर हावी रहे।
लोहा व्यवसाय में इंदौर का प्रमुख स्थान
प्रदेश में इंदौर लोह व्यवसाय का प्रमुख केंद्र है। प्रदेश में टीएमटी बार (सरिया) का निर्माण पीथमपुर, सांवेर रोड पर होता हैं। प्रमुख टीएमटी सरिया उत्पादक और अन्य स्टील का बड़ा कारोबार है। शहर में कई छोटी बड़ी रोलिंग मिल भी हैं। बताया जाता है इंदौर में लोहे का व्यवसाय वर्ष 1955 में मात्र 20-22 व्यापारियों के माध्यम से शुरू हुआ था।
जो दिनोदिन व्यापार बढ़ता गया, जिससे ट्रकों की आवाजाही बढ़ी। इससे प्रशासन को यातायात की समस्या हुई और नई लोहा मंडी की जरूरत महसूस होने लगी। लोहा व्यापारी एसोसिएशन के प्रयास व शासन के सहयोग से तत्कालीन इंदौर विकास प्रधिकरण चेयरमेन मधु वर्मा, कलेक्टर विवेक अग्रवाल ने नई लोहामंडी की योजना को मूर्तरूप दिया।
पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन, हिम्मत कोठारी, कैलाश वियावर्गीय व इल्वा अध्यक्ष देवेंद्र बंसल भी सहयोगी रहे। इस तरह 12 मार्च 2006 को नई लोहा मंडी का निरंजनपुर देवास नाका पर लोकार्पण हुआ।
ये रहे कलेक्टर: इंदौर में नई लोहामंडी का शुभारंभ करने वाले तत्कालीन कलेक्टर विवेक अग्रवाल के बाद राकेश श्रीवास्तव, राघवेंद्र सिंह, आकाश त्रिपाठी, पी. नरहरि, निशांत वरवड़े, लोकेश जाटव, मनीष सिंह, टी इलैयाराजा, आशीष सिंह एवं वर्तमान शिवम वर्मा सहित बीस साल में 11 कलेक्टर पदस्थ रहे।
लेकिन एक भी कलेक्टर पुरानी लोहामंडी में ट्रको की आवाजाही नहीं रोक सका। इससे कहा जाने लगा है प्रशासन पर ट्रांसपोर्टर हावी है।
बेहतर है लेकिन कमी भी: बताया जाता है नई लोहामंडी देश की सबसे व्यवस्थित मंडी है। चौड़ी सडक़े, विशेष पार्किंग व्यवस्था के साथ ही लोहा व्यापारी एसोसिएशन का तौल कांटा भी है।
लोहा व्यापारी बताते है मंडी की बाउंड्रीवॉल होना चाहिए। यहां भी ट्रकों की अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, स्ट्रीट लाइट की समस्या है। माल लाने-लेजाने के लिए गाड़ियांं नहीं मिलती है। भाड़ा बहुत ज्यादा है।
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