SIR सर्वे के दौरान पकड़े पश्चिम बंगाल के कारीगर कपड़ा कारखाने में कर रहे थे काम; पुलिस जांच में जुटी
<p><strong>खुलासा फर्स्ट, इंदौर। <br></strong>शहर में एसआईआर सर्वे के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक कारखाने में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के कारीगरों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। कार्यकर्ताओं ने
Khulasa First
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में एसआईआर सर्वे के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक कारखाने में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के कारीगरों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। कार्यकर्ताओं ने इन लोगों पर बांग्लादेशी नागरिक होने का शक जताया है, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
कारखाने से पकड़कर थाने लाए गए कारीगर
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सभी संदिग्ध लोगों को मल्हारगंज थाने पहुंचाया। इस दौरान रानी लक्ष्मीबाई मंडल के अध्यक्ष चंदन सिंह बैस अपने समर्थकों के साथ मौजूद रहे। उनका आरोप है कि ये लोग पुलिस और प्रशासन की जानकारी के बिना कारखाने में रह रहे थे।
फर्जी दस्तावेज होने का आरोप
बीजेपी नेता चंदन सिंह ने दावा किया कि इन लोगों के पास मौजूद आधार कार्ड और वोटर आईडी संदिग्ध हैं और प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
करीब 17 लोगों को बैठाया गया थाने में
जानकारी के अनुसार, कमला नेहरू नगर से करीब 17 मुस्लिम कारीगरों को थाने लाया गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये सभी अवैध तरीके से कारखाने में रह रहे थे और उनकी पहचान स्पष्ट नहीं है।
पुलिस कर रही दस्तावेजों की जांच
मल्हारगंज थाना पुलिस ने सभी लोगों को थाने में बैठाकर उनके दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि संबंधित लोग देश के नागरिक हैं या नहीं। फिलहाल किसी के खिलाफ औपचारिक अपराध दर्ज नहीं किया गया है।
जांच के बाद होगा आगे का खुलासा
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। सभी कारीगरों के दस्तावेजों की वैधानिक प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है।
मंडल अध्यक्ष चंदन सिंह बैस ने कहा कि
करीब 17 बांग्लादेशी मुस्लिमों में से 4 के आधार कार्ड के ओटीपी ही आए हैं। बाकी के अपडेट भी नहीं हैं। मोबाइल नंबर भी नहीं बदले गए। वह नंबर बंद हो चुके हैं। वहीं उन्होंने बताया कि यहां करीब 5 साल से ये लोग रहकर काम कर रहे हैं। ठेकेदार ने भी इनकी जानकारी थाने पर नहीं दी है।
टीआई वीरेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया-
कारीगरों के पास जो आधार कार्ड मिले हैं वे पश्चिम बंगाल के हैं। वह खुद को भी पश्चिम बंगाल का रहने वाला बता रहे हैं। पुलिस उनके दस्तावेज लेकर जांच करवा रही है। उन्हें लाने वाले ठेकेदार पर भी थाने पर सूचना नहीं देने को लेकर कार्रवाई की जा रही है। सभी कारीगर काफी समय से यहां पर सिलाई कारखाने पर काम करते हैं।
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