पाश्चात्य नववर्ष 2026 भारत और विश्व के लिए संघर्ष, सख्ती और संतुलन का वर्ष
<p><strong>भारतीय राजनीति और प्रमुख नेताओं पर प्रभाव</strong></p><p><strong>सूर्य–मंगल योग : सत्ता में सख्ती, टकराव और अस्थिरता के संकेत</strong></p><p><strong>शनि का भ्रमण : प्रधानमंत्री मोदीजी के स्
Khulasa First
संवाददाता
भारतीय राजनीति और प्रमुख नेताओं पर प्रभाव
सूर्य–मंगल योग : सत्ता में सख्ती, टकराव और अस्थिरता के संकेत
शनि का भ्रमण : प्रधानमंत्री मोदीजी के स्वास्थ्य को कर सकता है प्रभावित
सप्तम भाव में शनि: पड़ोसी देशों से तनाव और कूटनीतिक परीक्षा
शनि भारत का प्रभुत्व बढ़ाएगा
खुलासा फर्स्ट।
ज्योतिष शास्त्र एक अत्यंत व्यापक एवं गूढ़ शास्त्र है। प्राचीनकाल में राजा-महाराजा अपने राज्य तथा प्रजा की सुख-समृद्धि के लिए निरंतर चिंतन-मनन करते थे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके सहयोगी राज-ज्योतिषी समय-समय पर उन्हें शुभ-अशुभ परिस्थितियों का बोध कराते थे।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष के भविष्यफल पर विचार करने की परंपरा रही है। इसके साथ-साथ राजा की कुंडली तथा उनके राज्याभिषेक (शपथ ग्रहण) की कुंडली का भी सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता था। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और लोग 1 जनवरी को पाश्चात्य नववर्ष मनाने लगे।
आइए, अब जानते हैं कि पाश्चात्य नववर्ष 2026 के सितारे क्या संकेत दे रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत कन्या लग्न, वृषभ राशि तथा मेष नवांश से हो रही है। ज्योतिष में लग्न किसी भी राष्ट्र की आत्मा, प्रशासनिक संरचना, कार्यशैली, एकता और दिशा का प्रतिनिधित्व करता है। कन्या लग्न का स्वभाव विश्लेषणात्मक, व्यावहारिक, योजनाबद्ध और सेवा-प्रधान माना जाता है।
अतः वर्ष 2026 भारत के लिए अव्यवस्था को सुधारने, नीतियों को परिष्कृत करने और प्रशासनिक कसावट लाने का वर्ष सिद्ध हो सकता है। यह समय भावनाओं से अधिक तर्क, नीति और परिणामों पर केंद्रित रहने का संकेत देता है।
लग्नेश बुध और जनता का भाव : आंतरिक पुनर्गठन का संकेत
इस वर्ष लग्न का स्वामी बुध, धनु राशि के चतुर्थ भाव में सूर्य, मंगल और शुक्र के साथ चतुर्ग्रही युति का निर्माण कर रहा है। चतुर्थ भाव जनता, भूमि, आंतरिक सुरक्षा, शिक्षा, आवास और राष्ट्रीय सुख-सुविधाओं का भाव होता है। लग्नेश का चतुर्थ भाव में होना सामान्यतः राष्ट्र के लिए शुभ संकेत माना जाता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि शासन का ध्यान सीधे जनता और आंतरिक विषयों पर केंद्रित रहेगा। हालांकि, चतुर्थ भाव में चतुर्ग्रही युति जनता के कष्ट को बढ़ावा दे सकती है।
बुध वाणी, संवाद, कूटनीति और नीति-निर्माण का कारक है। इस स्थिति में भारत वर्ष 2026 में न केवल आंतरिक स्तर पर, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी बात तर्कसंगत, स्पष्ट और आत्मविश्वास के साथ रखने में सक्षम रहेगा। शिक्षा नीति, डिजिटल गवर्नेंस, डेटा आधारित प्रशासन और बौद्धिक नेतृत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय निर्णय संभव है।
सूर्य–मंगल का प्रभाव: सख्ती, शक्ति, टकराव और जनता के कष्टों को बता रहा है
2026 की ग्रह स्थिति कुछ अशांत और तनावपूर्ण संकेत देती है। चतुर्थ भाव में सूर्य और मंगल की युति विशेष चिंता का विषय है। सूर्य व्यय भाव का स्वामी होकर प्रशासन, शासन और केंद्रीय सत्ता पर दबाव दर्शाता है, वहीं मंगल अष्टम भाव का स्वामी होकर अचानक घटनाओं, हिंसा, दुर्घटनाओं और उग्र परिस्थितियों का कारक बनता है।
ये दोनों भाव स्वभावतः नकारात्मक प्रभाव वाले माने जाते हैं। इस योग का प्रभाव सत्ता को कठोर, निर्णायक और कई बार आक्रामक बना सकता है। सूर्य जहां प्रशासनिक अधिकार और सत्ता का प्रतीक है, वहीं मंगल सैन्य शक्ति, टकराव और संघर्ष का। इसका संकेत है कि वर्ष 2026 में सरकार को जनता के साथ टकराव, आंतरिक असंतोष, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति तथा भूमि और संसाधनों से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं, आगजनी, विस्फोट तथा पड़ोसी देशों के साथ तनाव या विवाद की आशंका भी प्रबल दिखाई देती है। राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के नाम पर कठोर निर्णय लिए जा सकते हैं, जिनका प्रभाव आम जनजीवन पर दबाव और अस्थिरता के रूप में सामने आ सकता है।
कुछ राज्यों में जनता और प्रशासन के बीच टकराव, आंदोलन अथवा असंतोष की स्थितियां भी बन सकती हैं। विशेषकर भूमि, रोजगार और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर परंतु दीर्घकाल में ये संघर्ष संरचनात्मक सुधारों की दिशा में ले जाने वाले सिद्ध हो सकते हैं।
नरेंद्र मोदी: निर्णायक, लेकिन चुनौतीपूर्ण वर्ष
वर्ष कुंडली के अनुसार 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कठोर निर्णयों और सशक्त नेतृत्व का वर्ष प्रतीत होता है। सूर्य–मंगल का प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार और विदेश नीति में आक्रामक रुख दर्शाता है। हालांकि कुछ निर्णयों पर तीखी आलोचना और विरोध भी संभव है। यह वर्ष उनकी छवि को कमजोर साबित कर सकता है। शारीरिक दृष्टि से कुछ न कुछ परेशानी चलती रहेगी, साथ ही भाजपा के अंतर्कलह उनकी चिंता का प्रमुख कारण बन सकता है।
कांग्रेस: आत्ममंथन और भाषा परिवर्तन
कांग्रेस नेतृत्व-सोनिया- राहुल गांधी के लिए 2026 आत्ममंथन और वैचारिक पुनर्संरचना का वर्ष है। बुध के प्रभाव दर्शाता में कांग्रेस अपनी भाषा, मुद्दों और संवाद शैली में बदलाव का प्रयास कर सकती है। राहुल गांधी का जनसंपर्क बढ़ सकता है, परंतु संगठनात्मक मजबूती के बिना बड़ी सफलता कठिन होगी।
भाजपा बनाम कांग्रेस और विपक्ष
भाजपा राष्ट्रवादी, प्रशासनिक और सुरक्षा केंद्रित एजेंडे के साथ आगे बढ़ेगी, जबकि कांग्रेस और विपक्ष महंगाई, रोजगार, सामाजिक संतुलन और संघीय ढांचे को लेकर सरकार को घेरेगी। 2026 राजनीतिक रूप से ध्रुवीकरण का वर्ष हो सकता है।
दशम भाव में गुरु: शासन, नेतृत्व और वैश्विक प्रतिष्ठा
मिथुन राशि के दशम भाव में गुरु इस कुंडली का सबसे सकारात्मक योग है। दशम भाव शासन, नेतृत्व, कर्म और अंतरराष्ट्रीय छवि का भाव है, जबकि गुरु ज्ञान, नीति, धर्म और विस्तार का ग्रह है। इसका दशम भाव में होना दर्शाता है कि भारत 2026 में नीति निर्माण, कूटनीति और वैश्विक मंच पर सम्मान प्राप्त करेगा।
आर्थिक सुधार, शिक्षा, स्टार्ट-अप, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। भारत की भूमिका एक नीतिगत मार्गदर्शक और संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर सकती है।
ममता बनर्जी और क्षेत्रीय दल: मंगल और शनि का प्रभाव क्षेत्रीय दलों को केंद्र से अधिक मुखर टकराव की ओर ले जा सकता है। ममता बनर्जी जैसे नेता राज्यों के अधिकार, संघीय ढांचे और सामाजिक मुद्दों पर केंद्र सरकार को चुनौती देते दिखाई दे सकते हैं। क्षेत्रीय दल जनता के मुद्दों को लेकर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेंगे।
शुक्र का योगदान: सामाजिक संतुलन और जन-सुविधाएं
चतुर्थ भाव का शुक्र जनता की सुविधाओं, सामाजिक कल्याण, महिलाओं, कला, संस्कृति और जीवन स्तर का कारक है। 2026 में आवास, परिवहन, महिला-केंद्रित योजनाओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और मनोरंजन उद्योग में गति देखने को मिल सकती है। सरकार जन-कल्याण और कठोर प्रशासन दोनों के बीच संतुलन साधने का प्रयास करेगी।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य: अमेरिका, रूस और वैश्विक संघर्ष
अमेरिका-रूस संबंध और रूस-यूक्रेन विवाद
शनि और राहु का प्रभाव दर्शाता है कि अमेरिका और रूस के संबंध 2026 में और अधिक जटिल हो सकते हैं। रूस-यूक्रेन विवाद पूरी तरह समाप्त होता नहीं दिखता, बल्कि उसका स्वरूप बदल सकता है। सीधे युद्ध के बजाय आर्थिक प्रतिबंध, साइबर युद्ध और कुटनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी राजनीति
राहु का प्रभाव अमेरिकी राजनीति में अचानक बदलाव, अप्रत्याशित निर्णय और टकराव की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
भारत की भूमिका
इन परिस्थितियों में भारत एक संतुलनकारी और मध्यस्थ शक्ति की भूमिका निभा सकता है। गुरु और बुध का प्रभाव भारत को वार्ताकार, नीति-निर्माता और वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में स्थापित कर सकता है। कुल मिलाकर वर्ष 2026 भारत और विश्व दोनों के लिए पुनर्संरचना, संघर्ष और संतुलन का वर्ष है।
भारत के लिए यह वर्ष आंतरिक मजबूती, प्रशासनिक सुधार और वैश्विक प्रभाव बढ़ाने का अवसर लेकर आता है, परंतु स्वास्थ्य, तकनीक और पड़ोसी देशों से जुड़े मामलों में सतर्कता अनिवार्य रहेगी। यह वर्ष स्पष्ट कर देगा कि सख्ती और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन ही सफलता की कुंजी होगा।
लेखक - आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा 'वैदिक', प्रदेशाध्यक्ष मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद
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