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'अभ्युदय' से 'अभयदान' भाजपा के ‘शाह' की मिली ‘वाह' से गद्‌गद् ‘मोहन'; अमित शाह बता गए ‘शिवराज' से ज्यादा ऊर्जावान ‘मोहन राज'

<p><strong>देश के गृहमंत्री व भाजपा के मुख्य रणनीतिकार शाह के मध्य प्रदेश दौरे से प्रदेश की सियासत हुई गर्म</strong></p><p><strong>‘मोटा भाई' ने ‘सुशासन दिवस' पर मध्य प्रदेश में चल रहे ‘यादवी शासन' को

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संवाददाता

30 दिसंबर 2025, 7:35 पूर्वाह्न
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'अभ्युदय' से 'अभयदान': भाजपा के ‘शाह' की मिली ‘वाह' से गद्‌गद् ‘मोहन'; अमित शाह बता गए ‘शिवराज' से ज्यादा ऊर्जावान ‘मोहन राज'

देश के गृहमंत्री व भाजपा के मुख्य रणनीतिकार शाह के मध्य प्रदेश दौरे से प्रदेश की सियासत हुई गर्म

‘मोटा भाई' ने ‘सुशासन दिवस' पर मध्य प्रदेश में चल रहे ‘यादवी शासन' को ‘मामा युग' से ज्यादा अच्छा बताकर दिए संकेत

‘डॉक्टर साहब' की ‘चलाचली की बेला' को शाह लगा गए विराम, महीनों से चल रहे कयासों को मिला आराम

प्रदेश के मुखिया के आए दिन हो रहे दिल्ली दरबार के दौरे, क्षत्रपों की शाह से ‘खुसुर-पुसुर' मुलाकातों से बढ़ते संशय को दूर कर गए शाह

अटलजी की जयंती पर, अटलजी के शहर में सिंधिया-तोमर की उपस्थिति में साफ नजर आया मुख्यमंत्री पर ‘दिल्ली' का ‘वरदहस्त'

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश की भाजपाई सियासत में सबको हतप्रभ करते हुए ‘डॉक्टर साहब' का एकाएक ‘अभ्युदय' तो दो बरस पहले ही सूबे में हो गया था। ‘सूबे की सरदारी' के साथ हुए इस ‘अभ्युदय' को ‘अभयदान' अब दो बरस बाद जाकर मिला। ‘अभयदान' इसलिए, क्योंकि जिस दिन से अभ्युदय हुआ था, उसी दिन से किसी को भी ‘हजम' नहीं हुआ था।

तब से अब तक बस सबको इसी बात का मलाल था कि ऐसा कैसे हो गया, ऐसा कैसे हो सकता है और ऐसा कैसे किया जा सकता है? लिहाजा अंदरखाने ‘यथास्थिति' के पुरजोर प्रयास पहले दिन से ही शुरू हो गए थे, जो प्रदेश की सियासत में ऊहापोह को जन्म दे रहे थे।

अब सब थमता नजर आए तो कोई आश्चर्य नहीं। पार्टी के ‘शाह' ने सब स्पष्ट कर दिया। इस बहुप्रतीक्षित ‘अभयदान' के लिए दिन भी खास चुना गया और मुकाम भी खास मुकर्रर किया गया। मंचीय किरदारों की मौजूदगी में भी खास को जोड़ा गया और तब जाकर ‘अभयदान' का ‘वरदान' दिया गया।

‘अभयदान' के इस ‘वरदान' ने प्रदेश की सियासत में ‘डॉक्टर साहब' की ‘चलाचली की बेला' को विराम दे दिया और इससे जुड़े तमाम कयासों, बोलवचनों पर हाल फिलहाल आराम दे दिया। ‘कुलगुरु' शाह की इस वाह से अब ‘मोहन' के मन का गद्‌गद् होना लाजमी ही है और शेष का मन मसोसना भी जाहिर है।

बा त है मध्य प्रदेश में कल, यानी गुरुवार को हुई ‘अभ्युदय ग्रोथ समिट' की। ये समिट भाजपा के पितृपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर स्व. वाजपेयी के गृह नगर ग्वालियर में ही आहूत की गई थी। देश के गृहमंत्री अमित शाह इस समिट के मुखिया बनकर आए थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सदारत में बिछी इस जाजम पर प्रदेश की भाजपाई सियासत के दो दिग्गज नेता- पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर व मौजूदा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी विराजमान थे।

अवसर था उस ‘सुशासन दिवस' का, जो अटलजी की याद में देशभर में मनाया जा रहा था। इसी सुशासन दिवस पर मध्य प्रदेश के शासन की बात भी हुई और वह भी भाजपा के शाह, यानी अमित शाह की मुंहजुबानी।

गृहमंत्री शाह ने प्रदेश की तरक्की की यात्रा को कांग्रेस के सीएम दिग्विजय सिंह से याद किया और उस यात्रा को भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक लेकर आए। तयशुदा रणनीति के तहत दिग्विजय सिंह के कार्यकाल को तो शाह ने बीमारू करार दिया, लेकिन शिवराज के दौर को प्रदेश की बीमारी ठीक करने वाला बताया।

जब बारी आई ‘मोहनराज' की तो शाह ने बगैर किसी लाग-लपेट व ‘आगा-पीछा' देखे मोहनराज को ‘शिवराज' से ज्यादा ऊर्जावान बता दिया। बस, शाह की इसी बेबाकी से ‘अभ्युदय' से ‘अभयदान' की कहानी बनकर मुकम्मल हो गई।

ग्वालियर पहुंचे गृहमंत्री ने सरकार के दो साल पूरे होने पर सीएम डॉ. मोहन यादव को सराहा और जो कहा, उससे प्रदेश में चल रही भाजपाई गुटबाजी व मुख्यमंत्री की कथित विदाई की बातों पर सीएम को संबल मिल गया। शाह ने कहा, किसी जमाने में यहां दिग्विजय सिंह का शासन था, प्रदेश बीमारू राज्य बनकर रह गया था।

शिवराज ने बीमारू राज्य का टैग हटाया और वे भाजपा में लंबे समय तक किसी राज्य की कमान संभालने वाले सीएम बने। अब मोहन यादव शिवराजजी से ज्यादा ऊर्जा के साथ मध्य प्रदेश को विकसित राज्य बनाने का काम कर रहे हैं। सर्वाधिक निवेश प्राप्त करने में मध्य प्रदेश देश का तीसरा राज्य बन गया है।

शाह यहीं नहीं रुके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम की तुलना से मुख्यमंत्री मोहन यादव को जोड़ते हुए कहा कि देश में इंडस्ट्रियल समिट की शुरुआत मोदीजी ने वाइब्रेंट गुजरात के साथ की, लेकिन मोहन यादव ने एक कदम आगे जाकर इसे रीजनल इंडस्ट्रियल समिट तक पहुंचा दिया।

इससे निवेश के अवसर तेज हुए। देश के अन्य राज्यों को भी इससे प्रेरणा लेना चाहिए। हम मोहन सरकार के रीजनल समिट के मॉडल को अब सभी राज्यों तक पहुंचाएंगे। मध्य प्रदेश की जमीन इतनी उपजाऊ है कि यहां कुछ रुपए बोकर निवेशक करोड़ों कमा सकते हैं।

‘दिल्ली' के ‘दिल' में ‘मोहन' का ही ‘मोह'..!!
शाह के मुखारविंद से हुई मोहनराज की तारीफ ने मध्य प्रदेश में चल रही उन सब बातों पर विराम लगा दिया कि मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। इन बातों को बल भी उन घटनाओं से मिल रहा था, जो प्रदेश के नेताओं के बार-बार दिल्ली दौरे से जुड़ी थीं।

मुख्यमंत्री स्वयं बात-बात में दिल्ली दौड़ रहे थे। बीच-बीच में पार्टी क्षत्रपों की भी दिल्ली दरबार में दस्तक हो रही थी। कुछ दस्तक ‘ऐलानिया' थी तो कुछ ‘गुपचुप'। क्षत्रपों की पार्टी के शाह से ‘खुसुर-पुसुर' भी आए दिन चर्चाओं को हवा दे रही थी कि अब प्रदेश में ‘मोहनराज' ज्यादा दिन की बात नहीं।

बिहार चुनाव के पूर्व से इस विदाई को बिहार चुनाव के बाद तक जोड़ा जा रहा था और अब मार्च-अप्रैल की डेडलाइन तय की जा रही थी। लेकिन ‘पार्टी के शाह' ने अटलजी की जयंती पर, अटलजी के शहर में, सिंधिया-तोमर जैसे क्षत्रपों की मौजूदगी में ‘मोहनराज' पर ‘दिल्ली' के ‘वरदहस्त' का इशारा कर साफ कर दिया कि फिलहाल ‘चलाचली की बेला' जैसा देश के दिल एमपी में कुछ नहीं। ‘दिल्ली' के ‘दिल' में हाल-फिलहाल तो ‘मोहन' का ही ‘मोह' है।

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