उपलब्धियों की फेहरिस्त, पर सवालों से बचती रहीं मंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने गिनाईं दो साल की उपलब्धियां
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Khulasa First
संवाददाता
महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट।
दो साल की सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा, योजनाओं के चमकदार आंकड़े और बड़े दावे, लेकिन जैसे ही मीडिया ने सवाल उठाने शुरू किए, प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल बदल गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की यह प्रेस कान्फ्रेंस उपलब्धियों के प्रदर्शन से अधिक सवालों से बचने और अव्यवस्था के कारण चर्चा में आ गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों को गिनाने के लिए शुक्रवार को आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में मंत्री ने योजनाओं की एक लंबी सूची प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण की अवधारणा को सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
मंत्री के अनुसार लाड़ली बहना योजना के तहत 1 करोड़ 26 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचाया गया है और 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित की जा चुकी है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, वन स्टॉप सेंटर, हेल्पलाइन 181, बाल विवाह में कमी और कुपोषण के स्तर में सुधार को सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
हालांकि, जब पत्रकारों ने योजनाओं के क्रियान्वयन, जमीनी हकीकत और कुछ संवेदनशील मुद्दों पर सवाल पूछने शुरू किए, तो मंत्री सवालों के स्पष्ट जवाब देने के बजाय उनसे बचती नजर आईं। इसी दौरान विभाग की ओर से प्रेस कान्फ्रेंस में वितरित किए जा रहे बैग को लेकर स्थिति बिगड़ गई। बैग लेने को लेकर मीडिया कर्मियों के बीच अव्यवस्था और खींचतान की स्थिति बन गई, जिससे प्रेस कांफ्रेंस असहज माहौल में तब्दील हो गई और प्रेस कान्फ्रेंस औपचारिक समापन के बजाय हड़बड़ी में समाप्त कर दी गई।
मंत्री ने बताईं ये प्रमुख उपलब्धियां
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना-1 करोड़ 26 लाख से महिलाएं लाभान्वित।जून 2023 से दिसंबर 2025 तक 31 किस्तों का भुगतान। अब तक 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित।
लाड़ली लक्ष्मी योजना-52 लाख से अधिक बालिकाओं का पंजीयन। बीते दो वर्षों में 6.40 लाख बालिकाओं को 350 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति का वितरण।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान-बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष फोकस।
पिंक ड्राइविंग लाइसेंस अभियान-6,134 महिलाओं एवं बालिकाओं को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस।
सशक्त वाहिनी कार्यक्रम-7 हजार से अधिक बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी।
शाला त्यागी बालिकाओं के लिए विशेष योजना-मुक्त स्कूल बोर्ड से 10वीं–12वीं परीक्षा की सुविधा। पढ़ाई जारी न रखने वाली बालिकाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण।
महिलाओं की सुरक्षा-57 वन स्टॉप सेंटरों से 54,627 महिलाओं को सुरक्षा सहायता। हेल्पलाइन 181 से 2.36 लाख से अधिक महिलाओं को तत्काल मदद।
कामकाजी महिलाओं के लिए आवास- 284 करोड़ रुपये की लागत से 5121 सीट क्षमता वाले भोपाल-इंदौर में 8 वर्किंग वूमन हॉस्टल।
कुपोषण के खिलाफ सफलता-बच्चों के कम वजन, ठिगनापन और गंभीर कुपोषण के मामलों में सुधार।
डिजिटल नवाचार-सम्पर्क ऐप, पोषण ट्रैकर और फेसियल रिकाग्निशन सिस्टम लागू किया गया।
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