दुष्कर्म पीड़िता को बयान बदलने की दी धमकी कोर्ट में भी जारी दबंगई
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Khulasa First
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बहुचर्चित लव जिहाद और दुष्कर्म कांड में फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला सनसनीखेज घटनाक्रम सामने आया है। जेल में बंद आरोपी ड्रीम ओलंपिक शूटिंग रेंज के संचालक मोहसिन खान के परिजनों ने इंसाफ की आखिरी चौखट कोर्ट को भी नहीं छोड़ा। दुष्कर्म पीड़िता को खुलेआम बयान बदलने के लिए धमकाया, जिस पर पीड़िता को एमजी रोड थाने की शरण लेना पड़ी।
पीड़िता ने थाने में दिए आवेदन में कहा है अन्नपूर्णा थाने में मोहसिन खान के खिलाफ दुष्कर्म और धर्मांतरण का गंभीर प्रकरण दर्ज कराया था। 26 दिसंबर को कोर्ट में बयान दर्ज कराने गई थी।
कोर्ट परिसर में आरोपी मोहसिन खान के भाई, भाभी और उसके करीबी दोस्तों ने घेर लिया और बयान पलटने के लिए दबाव बनाया। जब उसने साफ शब्दों में कहा बयान नहीं बदलेगी तो आरोपी के परिजन बौखला गए। जान से मारने की धमकी दी, गालियां दी गईं और कहा बयान नहीं बदला तो तुझे और तेरे पूरे परिवार को बर्बाद कर देंगे। धमकियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। मेरे माता-पिता को भी डराने का प्रयास किया।
मोहसिन पर लव जिहाद के आठ प्रकरण
मोहसिन खान का नाम पहले ही इंदौर के सबसे घिनौने और चर्चित मामलों में शुमार है। उसके कृत्यों का खुलासा बजरंग दल ने किया था, जिस पर पुलिस को एक के बाद एक मामलों में कार्रवाई करना पड़ी। मोहसिन खान पर अन्नपूर्णा थाने में लव जिहाद के 7 और महू थाने में 1 प्रकरण दर्ज हैं।
यह आंकड़ा उसके काले कारनामों की गवाही देाने के लिए काफी है। महीनों से जेल में है, लेकिन बताया जा रहा है उसका परिवार उसे किसी भी कीमत पर जमानत दिलाने की जुगत में है। जब कानूनी रास्तों से राहत नहीं मिली, तो अब पीड़िता को डराने-धमकाने का तरीका अपनाया।
सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था
सबसे गंभीर सवाल जब एक दुष्कर्म पीड़िता कोर्ट परिसर में सुरक्षित नहीं तो अन्य जगह का क्या भरोसा? आरोपी जेल में है, लेकिन परिजन खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। यह न सिर्फ न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप है, बल्कि कानून को खुली चुनौती भी। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस पर दबाव है वह सिर्फ आवेदन तक सीमित न रहे, बल्कि धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और पीड़िता व उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराए। वरना यह मामला एक बार फिर साबित करेगा दबंगों के हौसले बुलंद और पीड़ितों की लड़ाई आज भी कठिन है।
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