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सड़कों पर दौड़ रही खटारा बसें मेंटेनेंस फाइलों तक सीमित; करोड़ों रुपए डकार कर क्रेन के भरोसे एआईसीटीएसएल

<p><strong>चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।<br></strong>स्वच्छता में आठ बार परचम लहराने वाले इंदौर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब क्रेन और टोचन के भरोसे रेंग रही है। बीते दिन राजकुमार ब

Khulasa First

संवाददाता

30 दिसंबर 2025, 7:34 पूर्वाह्न
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सड़कों पर दौड़ रही खटारा बसें: मेंटेनेंस फाइलों तक सीमित; करोड़ों रुपए डकार कर क्रेन के भरोसे एआईसीटीएसएल

चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्वच्छता में आठ बार परचम लहराने वाले इंदौर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब क्रेन और टोचन के भरोसे रेंग रही है। बीते दिन राजकुमार ब्रिज पर जो तमाशा शहर की जनता ने देखा उसने अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) के दावों की बखिया उधेड़कर रख दी हैं।

कनाड़िया से हवा बंगला रूट पर चलने वाली रूट नंबर 5 की एक सिटी बस बीच सड़क पर टायर फटने के कारण इस कदर बेदम हुई कि उसे क्रेन की मदद से घसीटकर ले जाना पड़ा। यह मंजर शहर में चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि यह सिर्फ एक बस का खराब होना नहीं था, बल्कि नगर निगम और परिवहन विभाग की उस लापरवाह अफसरशाही का प्रदर्शन था, जो जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए मेंटेनेंस के नाम पर कागज में खपा रही है, जबकि सड़कों पर खटारा बसें लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं।

हैरानी और घोर लापरवाही का आलम तो यह दिखा कि जिस बस को क्रेन से टोचन किया जा रहा था, उसके आगे और पीछे कहीं भी रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित नहीं थे।

बिना नंबर प्लेट की बस का सड़क पर दौड़ना यह बताने के लिए काफी है कि एआईसीटीएसएल और आरटीओ के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत किस कदर गहरी है। बिना नंबर की बस से कोई बड़ा हादसा हो जाए तो पुलिस और प्रशासन उसकी पहचान तक नहीं कर पाएंगे। शहर में यह चर्चा आम रही कि क्या यह नंबर प्लेट जानबूझकर गायब की गई है ताकि जर्जर बसों की पहचान छिपाई जा सके और खराब मेंटेनेंस की आड में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा न हो सके?

हर महीने पास करा रहे लाखों के बिल: जनता के बीच इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश है कि हर महीने बसों के रखरखाव और कलपुर्जों के नाम पर लाखों रुपए के बिल पास किए जाते हैं, फिर भी बसों की हालत इतनी जर्जर कैसे है कि चलते-चलते टायर फट रहे हैं।

राजकुमार ब्रिज पर क्रेन से खिंचती वह बस असल में इंदौर की बदहाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का शव वाहन नजर आ रही थी। स्मार्ट सिटी के वादे और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला अब जनता की जान पर भारी पड़ने लगा है।

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