कैबिनेट बैठक में मंत्रियों के बीच हुई नोकझोंक: इस बात को लेकर हुई बहस; मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में पंचायतों के तालाबों के गहरीकरण से निकलने वाली काली मिट्टी के परिवहन का मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया।
इस विषय पर राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा जल संसाधन विभाग के मंत्रियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा।
बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा
दरअसल, कैबिनेट बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंचायत क्षेत्रों में तालाबों के गहरीकरण से निकलने वाली मिट्टी के परिवहन पर जल संसाधन विभाग की आपत्तियों के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता नहीं होने से पंचायतों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्मा के तर्क का पटेल ने किया समर्थन
करण सिंह वर्मा के इस तर्क का पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी समर्थन किया। उनका कहना था कि तालाबों के गहरीकरण और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को अनावश्यक रोक-टोक के कारण गति नहीं मिल पा रही है।
हालांकि, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि कई स्थानों पर काली मिट्टी की आड़ में पीली मिट्टी और अन्य खनिजों का अवैध उत्खनन एवं परिवहन किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों को रोकने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है।
माहौल कुछ समय के लिए गर्माया
बैठक के दौरान दावे और प्रतिदावे के बीच माहौल कुछ समय के लिए गर्म हो गया। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हस्तक्षेप किया और तीनों विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए।
समिति तय करेगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने समिति को यह तय करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि तालाबों के गहरीकरण के दौरान किस प्रकार की मिट्टी निकाली जा सकती है, उसके परिवहन की प्रक्रिया क्या होगी तथा भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं।
सरकार का मानना है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद पंचायतों में जल संरक्षण और तालाब गहरीकरण के कार्यों में आ रही प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी और मिट्टी के परिवहन को लेकर एक समान नीति लागू की जा सकेगी।
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