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42.74 लाख नाम हटे, निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर उठे प्रश्न एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के गंभीर सवाल

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Khulasa First

संवाददाता

30 दिसंबर 2025, 7:35 पूर्वाह्न
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42.74 लाख नाम हटे, निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर उठे प्रश्न: एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के गंभीर सवाल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
मध्यप्रदेश सहित देश के कुछ राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा एवं अन्य अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में 42 लाख 74 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिनमें सर्वाधिक संख्या शहरी क्षेत्रों की बताई गई है।

इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय चुनाव आयोग के अधीन प्रत्येक राज्य में राज्य निर्वाचन आयोग कार्य करता है, जिसके अंतर्गत जिला निर्वाचन अधिकारी, बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) एवं अन्य अधिकारी सालभर मतदाता सूची के सत्यापन, नाम जोड़ने एवं हटाने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

42 लाख नाम हटे तो सूची सार्वजनिक क्यों नहीं?: द्विवेदी ने सवाल किया कि जब इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं तो ऐसे मतदाताओं की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? जिनके नाम हटाए गए, उनके मतदाता पहचान पत्र निरस्त करने के आदेश क्यों जारी नहीं हुए? मतदाता पहचान पत्र के आधार पर बने आधार कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि पर क्या निर्णय लिया गया? प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 933 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष: 2,74,82,233, महिला: 2,56,48,831, थर्ड जेंडर: 919 इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने मतदाता शरणार्थी हैं, कितनों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया है, कितने लोग वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहे हैं, और गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुए।

शहरी क्षेत्रों में ही अधिक नाम क्यों कटे?
द्विवेदी ने सवाल उठाया कि जब रोजगार के लिए पलायन मुख्य रूप से गांवों से हुआ है, तो फिर शहरी क्षेत्रों में ही सबसे अधिक मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए? इंदौर में 4.47 लाख नाम हटने पर बड़ा सवाल उन्होंने बताया कि इंदौर जिले में 4.47 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि वर्तमान में इंदौर में कुल मतदाता संख्या 24,20,171 है। इसमें पुरुष: 12,20,628, महिला: 11,99,450, थर्ड जेंडर: 93 उन्होंने दावा किया कि नंदलालपुरा और विजय नगर जैसे क्षेत्रों में थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक बताई जाती रही है।

‘सब कुछ कागजों पर’ चलने का आरोप: अंत में उन्होंने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारियों के सालभर के आयोजनों, खर्च और दावों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा तंत्र सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। खासतौर पर इंदौर, भोपाल और बुरहानपुर में 2003 के बाद पाकिस्तान से आकर बसे नागरिकों, वीजा समाप्ति के बाद रह रहे लोगों और उनके मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या अब तक स्पष्ट नहीं की गई है।

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