डिप्टी कलेक्टर से 3 लाख की ठगी सीएम-ऑफिस का कर्मचारी बनकर किया फ्रॉड
<p><strong>खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।</strong> <br>साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक डिप्टी कलेक्टर को ही ठगों ने करीब 3 लाख रुपए की चपत लगा दी। ठगों ने खुद को सीएम ऑफिस से जुड़
Khulasa First
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक डिप्टी कलेक्टर को ही ठगों ने करीब 3 लाख रुपए की चपत लगा दी। ठगों ने खुद को सीएम ऑफिस से जुड़ा अधिकारी बताकर विभागीय जांच में राहत दिलाने का झांसा दिया और किस्तों में रकम वसूल ली।
ऐसे रची गई ठगी की साजिश
ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित न्यू अशोक कॉलोनी में रहने वाले अरविंद सिंह माहौर (41), जो उस समय मुरैना के सबलगढ़ में डिप्टी कलेक्टर पद पर पदस्थ थे, इस साइबर फ्रॉड का शिकार बने।
पीड़ित अधिकारी के अनुसार, 19 सितंबर 2025 की रात करीब 8:17 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। अज्ञात नंबर होने के कारण उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
इसके बाद ठग ने उनके कलेक्टर महोदय को फोन कर खुद को CM Portal Office से जुड़ा बताते हुए शिकायत की कि डिप्टी कलेक्टर फोन नहीं उठा रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद जब दोबारा कॉल आई, तो अधिकारी ने फोन उठा लिया।
ट्रूकॉलर पर दिखा “CM Portal
कॉल करने वाले नंबर को जब ट्रूकॉलर पर चेक किया गया, तो वह “CM Portal – Ashwini” के नाम से शो हो रहा था। वरिष्ठ अधिकारी का संदर्भ और सरकारी पहचान दिखने के कारण डिप्टी कलेक्टर को कॉल पर भरोसा हो गया।
राहत दिलाने के नाम पर मांगे पैसे
फोन पर मौजूद व्यक्ति ने खुद को सीएम ऑफिस का कर्मचारी बताते हुए कहा कि विभागीय जांच में सजा कम कराने के लिए कुछ “योगदान राशि” जमा करनी होगी।
ठग की बातों में आकर डिप्टी कलेक्टर ने 19 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच अलग-अलग समय पर ऑनलाइन वॉलेट और बैंक खातों के माध्यम से विभिन्न नंबरों पर करीब 2 लाख 95 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
लगातार पैसों की मांग से हुआ शक
रकम ट्रांसफर करने के बाद भी आरोपी लगातार और पैसे मांगता रहा। इसी दौरान डिप्टी कलेक्टर को संदेह हुआ और उन्होंने खुद मामले की जांच शुरू की।
जांच में सामने आया पूरा फ्रॉड
जानकारी जुटाने पर पता चला कि सीएम ऑफिस में “अश्विनी” नाम का कोई भी कर्मचारी पदस्थ नहीं है। जब डिप्टी कलेक्टर ने आरोपी से पैसे वापस मांगे, तो उसने बातचीत पूरी तरह बंद कर दी।
1930 पर दर्ज कराई शिकायत
फ्रॉड की पुष्टि होते ही पीड़ित अधिकारी ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत CCTNS सिस्टम के माध्यम से थाटीपुर थाना पहुंची, जहां साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
MP में चल रहा है E-Zero FIR अभियान
इस मामले पर एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि मध्य प्रदेश में E-Zero FIR अभियान के तहत साइबर अपराधों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ है कि ठगों ने सरकारी अधिकारी बनकर 2.95 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी की है।
महिला ने डिप्टी कलेक्टर पर लगाए थे आरोप
इस मामले में फरियादी अरविंद माहौर के साथ एक विवाद भी जुड़ा है, जिसमें वह सस्पेंड हैं। ग्वालियर की एक महिला ने उन पर बेटी को फोन कर परेशान करने का आरोप लगाया था। महिला ने जनसुनवाई में वीडियो समेत शिकायत भी की थी।
फोन पर गाली-गलौज का आरोप
शिकायतकर्ता महिला और उसके पति ने बताया था कि एसडीएम ने उनकी बेटी का मोबाइल नंबर पता कर लिया और पिछले एक साल से देर रात फोन कर गंदी-गंदी बातें करते हैं।
जब उनकी बेटी ने फोन उठाना बंद कर दिया तो रिश्तेदारों को फोन पर धमकाने लगे। उन्होंने बताया- एसडीएम ने सबलगढ़ में देवर की दुकान पर पहुंचकर उन्हें घर बुलाया और धमकी दी कि तेरी बेटी और तेरी भाभी में बहुत गर्मी है, झूठे केस में फंसा दूंगा। मुझसे बड़ा कोई अधिकारी नहीं है।
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