‘हाथ’ में ही फूटा ‘हाइड्रोजन बम’ 140वें स्थापना दिवस के ठीक पहले संघ-मोदी की तारीफ कर दिग्विजय सिंह ने किया कांग्रेस-भाजपा को हतप्रभ
<p><strong>प्रियंका की मोदी संग चाय, दिग्गी को आरएसएस ‘भाय’</strong></p><p><strong>आडवाणी, प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी तस्वीर के जरिये दिग्विजय सिंह ने कसा पार्टी के मौजूदा हालातों पर तंज</strong></p>
Khulasa First
संवाददाता
प्रियंका की मोदी संग चाय, दिग्गी को आरएसएस ‘भाय’
आडवाणी, प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी तस्वीर के जरिये दिग्विजय सिंह ने कसा पार्टी के मौजूदा हालातों पर तंज
राहुल गांधी खफा, दिग्विजय से कहा- आपने अपना काम कर दिया, पार्टी में दो खेमे, खुर्शीद ने किया बयान का बचाव
दिग्विजय सिंह ने सफाई दी- मोदी-आरएसएस की तारीफ
नहीं, सिर्फ संगठन के तौर-तरीके पर रखी बात
कांग्रेस सांसद मणिकन टैगोर ने आरएसएस की तुलना अलकायदा से
कर विवाद को बढ़ाया, भाजपा आगबबूला
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जो ‘राघोगढ़ के राजा’ को राजनीतिक रूप से थोड़ा-सा भी जानते-मानते हैं, वे ये अच्छे से समझते हैं कि दिग्विजय सिंह कोई भी बात यूं ही ‘चलते-चलते’ या ‘छपते-छपते’ नहीं कह देते। उनके कहे-बोले के कई मायने होते हैं। वे बिना सोचे-विचारे यूं ही नहीं मुंह खोलते हैं। ‘आगा-पीछा’ सोचकर ही वे ऐसा रणनीतिक बयान देते हैं। उनका कोई भी वक्तव्य सही समय, परिस्थिति व मौजूदा हालातों से परे नहीं होता।
बाद में वे भले कितना ही किंतु-परंतु कर लें, लेकिन वे ये अच्छे से जानते हैं कि उन्होंने जो कहा-किया, वो गलत नहीं है और जहां असर होना है, वहां तक कहा हुआ अच्छे से ‘मार’ करेगा। अब बोले गए ‘बोलवचन’ पार्टी के स्वयंभू नेताओं को आईना दिखा रहे हैं और दल के अंदर ‘डेमोक्रेसी’ व ‘कैडर’ की अहमियत की ‘दुर्गति’ का खुलासा कर रहा है।
‘योगिराज’ का ये ‘हाइड्रोजन बम’ रूपी बयान का वक्त भी गजब का रहा। जिस समय देश का सबसे बड़ा दल कांग्रेस अपनी स्थापना की 140वीं वर्षगांठ मनाने को पूरी तरह तैयार होती है, ठीक उसी समय आरएसएस व प्रधानमंत्री की तारीफ का बयान आता है। इस एक चौंकाने वाले बयान के जरिये वे एक तीर से अनेक निशाने साधने में कामयाब हो गए।
अब भले ही उनके इस बेबाक व ‘ईमानदार’ बयान की उनके ही दल में नुक्ताचीनी हो, ये साफ हो गया कि कांग्रेस में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। अगर दिग्विजय सिंह जैसा पार्टी का बड़ा नेता पार्टी के सबसे बड़े ‘दुश्मन’ नेता व संगठन की तारीफ करता है तो ये कांग्रेस ही नहीं, भारत की राजनीति की एक बड़ी घटना है। एक ऐसा नेता, जो कांग्रेस में अर्जुन सिंह के बाद उनकी राजनीतिक लाइन का ही एकमात्र प्रतिनिधित्व कर रहा है, वह एकाएक ऐसा यूं ही नहीं बोल सकता।
धर्मनिरपेक्ष राजनीति के सदैव पक्षधर दिग्विजय सिंह का बोला गया ये महज एक बयान और बयान के बाद की सफाई तक सीमित रहने वाली बात नहीं है। इस बयान के कांग्रेस की अंदरूनी व देश की भावी राजनीति में बेहद गहरे व मारक मायने हैं। दिग्विजय जैसा नेता ऐसा बयान भी दे सकता है, ये किसे अहसास था? उनके बयान ने कांग्रेस को ही नहीं हतप्रभ किया, बल्कि कमलदल भाजपा को भी भौचक कर दिया।
न कांग्रेस को सूझ रहा कि वह क्या बोले। वहीं भाजपा के भी सम्पट नहीं बैठ रही कि वह ‘सांप्रदायिक राजनीति’ के पैरोकार दिग्विजय सिंह को क्या जवाब दे? मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा उन्हें पार्टी में आने का न्योता देने की बात सामने जरूर आई है, लेकिन भाजपा का ‘दिल्ली दरबार’ फिलहाल तो किंकर्त्तव्यविमूढ़ है।
दिग्विजय सिंह के कहे पर अब उनके दल में बवाल है। बताते हैं कि स्वयं राहुल गांधी जबरदस्त रूप से खफा हैं। उनकी नाराजगी बनती भी है, क्योंकि वे पानी पी-पीकर नित्य-प्रतिदिन, अष्टयाम आरएसएस व मोदी को जमकर कोसते हैं। ऐसे में उनके ही दल का द्वितीय वरीयता प्राप्त नेता संघ-मोदी के गुणगान गाए, ऐसा कैसे हो सकता है?
लिहाजा बताते हैं कि राहुल गांधी ने सोनिया गांधी की मौजूदगी में दिग्विजय को कहा- आपने एक दिन पहले ही अपना काम कर दिया। सूत्रों की मानें तो ये शब्द बोलते वक्त राहुल की भावभंगिमा आक्रोशित थी। हालांकि ‘राजा’ ने अपनी चिरपरिचित मुस्कान से इस तल्खी को धोने की कोशिश जरूर की।
आरएसएस अलकायदा, आगबबूला भाजपा
आरएसएस व मोदी की प्रशंसा के बयान ने कांग्रेस को दो खेमे में बांटने का काम शुरू भी कर दिया। जहां एक तरफ पार्टी सुप्रीमो मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर सुप्रिया सुनेत्र तक दिग्विजय सिंह के बयान पर हमलावर हैं, वहीं सलमान खुर्शीद जैसे दिग्विजय सिंह के समकालीन नेता बचाव में भी सामने आए।
खुर्शीद ने कहा कि ऐसे तो पार्टी में डेमोक्रेसी कैसे बचेगी, जब बयान के मायने ही समझ नहीं आएं? उधर, कांग्रेस सांसद मणिकन टैगोर ने आरएसएस की तुलना अलकायदा जैसे दुर्दांत आतंकी संगठन से कर पहले से लगी आग में घी डाल दिया। टैगोर ने कहा कि क्या अलकायदा से भी कुछ सीखा जा सकता है? आरएसएस भी उसी तरह नफरती विचारधारा वाला संगठन है। टैगोर के इस बयान ने भाजपा को आगबबूला कर दिया है।
ये तो ठीक वैसे ही हुआ न कि दुश्मन पर बमबारी के लिए रखा बम फेंकने से पहले हाथ में ही फट जाए? दिग्विजय सिंह का आरएसएस व प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा का बयान कांग्रेस के लिए ऐसा ही साबित हुआ। पार्टी के स्थापना दिवस के ठीक पहले आया बयान राहुल गांधी के ‘हाइड्रोजन बम’ जैसा मारक निकला, जो ‘हाथ’ में न सिर्फ फूट गया, बल्कि पूरे ‘पंजे’ को लहूलुहान कर दिया।
अब ‘हाथ’ की सर्जरी शुरू हुई है, लेकिन बम की मार से आए घाव आसानी से दुरुस्त होते नजर नहीं आ रहे। घाव सुधरे भी तो वक्त लगेगा, लेकिन ये महज एक संयोग है क्या कि एक तरफ प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चाय पीती हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस के द्वितीय वरीयता प्राप्त नेता को आरएसएस की कार्यशैली व मोदी का परिश्रम भा जाता है? नेता भी ऐसा, जिसने दल की नीति के लिए स्वयं की छवि की कभी परवाह नहीं की और कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए स्वयं को ‘खलनायक’ बनना भी स्वीकार किया। स्व. अर्जुन सिंह के बाद ‘सांप्रदायिक राजनीति’ का विरोध करने वाला दिग्विजय सिंह से बड़ा कोई नेता है देश में?
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