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कोर्ट ने कहा- यह छात्रों के भविष्य के साथ सीधा अन्याय 12 मुन्ना भाइयों को 5-5 साल की सजा, इंदौर सीबीआई कोर्ट सख्त

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Khulasa First

संवाददाता

30 दिसंबर 2025, 7:34 पूर्वाह्न
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कोर्ट ने कहा- यह छात्रों के भविष्य के साथ सीधा अन्याय: 12 मुन्ना भाइयों को 5-5 साल की सजा, इंदौर सीबीआई कोर्ट सख्त

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में अदालत ने तीखी टिप्पणी देते हुए 12 मुन्ना भाइयों को दोषी करार देते हुए 5-5 साल की सजा और जुर्माना से दंडित कर जेल भिजवा दिया। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने पीएमटी-2011 परीक्षा में फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के मामले में सजा सुनाई।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह अपराध सिर्फ कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि मेहनती और योग्य छात्रों के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है। अपर सत्र न्यायाधीश (सीबीआई) शुभ्रा सिंह की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली को खोखला करने की साजिश को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

दोषी करार दिए गए आरोपियों में अभ्यर्थी, फर्जी परीक्षार्थी (इम्पर्सोनेटर) और बिचौलिए शामिल हैं। इनमें आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह, सत्येंद्र वर्मा, धीरेंद्र तिवारी, ब्रजेश जायसवाल, दुर्गा प्रसाद यादव, राकेश कुर्मी, नरेंद्र चौरसिया, अभिलाष यादव, खूबचंद राजपूत, पवन राजपूत, लखन धनगर और सुंदरलाल धनगर शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि सजा पाने वालों में से कई आरोपी उच्च शिक्षित और मेडिकल पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं।

ऐसे हुआ था फर्जीवाड़े का खुलासा... 24 जुलाई 2011 को पीएमटी परीक्षा के दौरान शासकीय उत्कृष्ट (उत्कर्ष) विद्यालय, इंदौर में उस समय हड़कंप मच गया था जब सत्येंद्र वर्मा को असल अभ्यर्थी आशीष यादव की जगह उसी के एडमिट कार्ड पर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया।

विद्यालय के उपप्राचार्य की शिकायत पर तुकोगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसने पूरे व्यापमं नेटवर्क की परतें खोल दीं। शुरुआत में राज्य पुलिस ने केवल दो आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया।

सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि पीएमटी-2011 परीक्षा में बिचौलियों का पूरा संगठित नेटवर्क सक्रिय था। फर्जी परीक्षार्थियों को इंदौर बुलाकर होटलों में ठहराया गया, फर्जी दस्तावेज और एडमिट कार्ड तैयार किए गए और फिर असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दिलवाई गई। जांच के दौरान मिले दस्तावेजी साक्ष्य, होटल रिकॉर्ड और आरोपियों के खुलासों ने यह साबित कर दिया कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि योजनाबद्ध आपराधिक साजिश थी।

फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के अपराध शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को खोखला करते हैं और ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों को कुचलते हैं। ऐसे मामलों में कठोर दंड जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हिमाकत न कर सके। व्यापमं घोटाले में यह फैसला न केवल दोषियों के लिए सजा है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।

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