वीडियो देखिये, धर्मनगरी से शुरू हुई दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा: महाकाल के दरबार में माथा टेककर लिया सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा का संकल्प; मंदिरों के चढ़ावे में पारदर्शिता की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ मंगलवार को उज्जैन से शुरू हो गई। यात्रा के शुभारंभ से पहले दिग्विजय सिंह ने बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेककर भगवान भोलेनाथ से सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के संकल्प को पूरा करने की प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने पत्नी अमृता सिंह के साथ चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित करीब 950 किलोमीटर की यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। दिग्विजय सिंह इस यात्रा के जरिए मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं। यात्रा शुरू होते ही मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही भगवान राम और मंदिरों की याद आने लगी है।
महाकाल के दरबार में पूजा, फिर यात्रा का शुभारंभ
यात्रा शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करते हुए कहा कि सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के उनके संकल्प को भगवान पूर्ण करें। इसके बाद उन्होंने पत्नी अमृता सिंह के साथ चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए।
बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। राम और शिव धुन के भजनों के बीच पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह के बेटे और कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह भी व्यवस्थाओं की देखरेख करते नजर आए।
कन्या पूजन और भोजन प्रसादी के बाद दोपहर करीब 1:15 बजे यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा में शिव-पार्वती की झांकी, एलईडी वैन, डीजे, भजन मंडली, बैंड दल, राष्ट्रीय ध्वज, धर्म ध्वज और ढोल के साथ साधु-संत शामिल हुए। यात्रा उज्जैन के विभिन्न मार्गों से होते हुए कानीपुरा पहुंचेगी।
हर्षा रिछारिया ने उठाए सवाल, बोलीं- चुनाव नजदीक आते ही राम याद आ रहे
यात्रा शुरू होने के साथ ही हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, तब वैसी खुशी और उत्साह क्यों नहीं दिखाई दिया, जैसा अब मंदिर से जुड़े मुद्दों को लेकर दिखाया जा रहा है।
हर्षा ने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर भगवान राम की याद आ रही है और अब उन्हें इंसाफ दिलाने का संकल्प लिया जा रहा है। उनके बयान के बाद यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक संदर्भ को लेकर बहस तेज हो गई है।
मंदिरों के चढ़ावे में पारदर्शिता की मांग
दिग्विजय सिंह की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठाना है। यात्रा के आयोजकों के अनुसार, धार्मिक स्थलों के संचालन और वहां आने वाले चढ़ावे से जुड़े विषयों पर जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
यात्रा में साधु-संतों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों और महिला प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों ने पहले दिन करीब 3 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया है। आगे के पड़ावों पर प्रतिदिन 1,000 से 1,500 लोगों के जुड़ने की संभावना बताई गई है।
रोजाना 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना
यात्रा को लगभग 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए पहले से ही रोजाना लगभग 8 किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे।
यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ते और ठहरने की व्यवस्थाओं में स्थानीय लोगों के सहयोग की बात कही गई है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, लोग खुद आगे आकर भोजन और भंडारे की व्यवस्था में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी कई लोग अपने भंडारे को यात्रा में शामिल कराने के लिए आग्रह करते थे।
कांग्रेस विधायक महेश परमार के अनुसार, छोटे ग्रामीण पड़ावों पर रोजाना करीब 20 से 30 हजार रुपये और बड़े पड़ावों पर 50 से 60 हजार रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। यात्रा के कुल खर्च को लेकर आयोजकों ने अलग-अलग पड़ावों की व्यवस्थाओं के आधार पर आकलन बताया है।
भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की प्रतिमाओं वाला रथ भी चलेगा
यात्रा के साथ एक विशेष रथ भी शामिल रहेगा। इसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे जाएंगे। आयोजकों के मुताबिक, भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा ने इस रथ का निर्माण किया है। यात्रा के दौरान धार्मिक झांकियों और भजन मंडलियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़ा जाएगा।
संतों का समर्थन, मुस्लिम महिला भी यात्रा में शामिल
यात्रा में महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित कई संतों के शामिल होने की बात कही गई है। कांग्रेस विधायक महेश परमार के मुताबिक, ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है। अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि श्रीमद् रामकृष्णानंद जी महाराज ने भी यात्रा की सफलता की कामना की है।
यात्रा में शामिल होने पहुंचीं फराह खान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस यात्रा का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने मंदिरों से सोने की चोरी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। फराह के अनुसार, उन्हें अपने समाज की ओर से किसी तरह की धमकी नहीं मिली है। उन्होंने शुरुआती पांच-छह दिनों तक यात्रा में रहने और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद फिर शामिल होने की बात कही। उनके मुताबिक, रायसेन जिले से भी मुस्लिम समाज के कुछ लोग यात्रा में जुड़ेंगे।
उज्जैन से अयोध्या तक इन शहरों से गुजरेगी यात्रा
‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई शहरों से होकर गुजरेगी। प्रस्तावित मार्ग में तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी शामिल हैं। इसके बाद यात्रा तालबेहट, जेरोन और ओरछा होते हुए चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव अयोध्या स्थित राम मंदिर होगा।
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