देखिये वीडियो, नगरीय निकायों की खरीदी में गड़बड़ी पर कार्रवाई: मंत्री बोले- जिम्मेदारों को किया है सस्पेंड
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी को लेकर उठे सवालों के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कार्रवाई की जानकारी दी है।
पुराना वीडियो वायरल
विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे का पुराना वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आया, जिसमें सरकारी खरीद में कीमतों के बड़े अंतर और संभावित वित्तीय नुकसान का उल्लेख किया गया था।
उच्चस्तरीय जांच हो चुकी
मंत्री ने शुक्रवार रात इंदौर में कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो चुकी है, कुछ लोगों को निलंबित किया गया है और जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है।
करीब 1134 करोड़ रुपए की खरीदी की
विवाद का केंद्र प्रदेश के 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीद है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन निकायों ने तीन साल में सरकारी GeM पोर्टल के माध्यम से करीब 1134 करोड़ रुपए की खरीदी की।
250 करोड़ रुपए बचाए जा सकते थे
आरोपित अनियमितताओं के संदर्भ में दावा किया गया कि यदि सामान उचित औसत कीमतों पर खरीदा जाता, तो लगभग 250 करोड़ रुपए बचाए जा सकते थे।
अब सवाल केवल संभावित वित्तीय नुकसान का नहीं, बल्कि खरीद प्रक्रिया की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने का भी है।
दो लाख का कचरा वाहन कहीं छह लाख में कैसे खरीदा?
संजय दुबे का वायरल वीडियो भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई विभागीय बैठक का बताया जा रहा है।
बैठक में उन्होंने नगरीय निकायों की खरीद प्रक्रिया में सामने आए कीमतों के अंतर पर सवाल उठाए थे।
कीमत को लेकर उठ रहे सवाल
वीडियो में दुबे ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक निकाय ने कचरा वाहन दो लाख रुपए में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने उसी तरह के वाहन के लिए छह लाख रुपए खर्च किए।
उनके मुताबिक, दोनों वाहनों में मुख्य अंतर डस्टबिन की संख्या का था। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल तीन डस्टबिन बढ़ने से वाहन की कीमत तीन गुना कैसे हो सकती है।
उन्होंने कुछ निकायों में डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए के कचरा वाहन खरीदे जाने का भी उल्लेख किया।
सवाल यह था कि जिन निकायों में वार्डों की संख्या भी सीमित है, वहां इतने महंगे वाहनों की जरूरत और खरीद की उपयोगिता का आकलन किस आधार पर किया गया।
दुबे ने कहा था कि विभाग के पास इस बात का रिकॉर्ड उपलब्ध है कि किस निकाय ने कौन-सा सामान, कितनी मात्रा में और किस कीमत पर खरीदा। उन्होंने खरीद में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की बात कही थी।
146 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का दावा
वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने विभिन्न मामलों में की गई कार्रवाई का ब्योरा सामने रखा। विभागीय जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आठ संभागों में 62 मामलों की जांच की गई और कुल 146 अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध अलग-अलग प्रकार की कार्रवाई की गई।
बताए गए विवरण के मुताबिक
सात कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया। 76 अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकी गई। 17 लोगों की पेंशन से मिलने वाली राहत में कटौती की गई।
38 लोगों से सरकारी नुकसान की भरपाई के लिए वसूली की गई। पांच कर्मचारियों को चेतावनी दी गई।
दो मामलों में कार्रवाई समाप्त की गई। 22 लोगों को जांच में दोषमुक्त पाया गया। ये आंकड़े विभाग की ओर से बताई गई कार्रवाई का विवरण हैं।
अलग-अलग श्रेणियों में कार्रवाई के आधार, संबंधित खरीद का कुल मूल्य और वास्तव में कितनी राशि की वसूली हुई, इसका विस्तृत ब्यौरा सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
जांच हुई, लेकिन निगरानी पर सवाल बरकरार
मंत्री के बयान और विभागीय कार्रवाई की जानकारी के बावजूद सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर कुछ अहम सवाल बने हुए हैं।
यदि एक ही तरह के सामान की कीमतों में इतना बड़ा अंतर था, तो खरीद के समय इसकी जांच क्यों नहीं हुई?
क्या सभी निकायों में बाजार दरों की तुलना की गई थी? और संभावित वित्तीय नुकसान का कितना हिस्सा वास्तव में वसूल किया जा चुका है?
सरकारी GeM पोर्टल के जरिए खरीद होने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि हर खरीद उचित कीमत पर हुई।
खरीद की मात्रा, सामान की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, परिवहन और अन्य शर्तों को ध्यान में रखकर ही कीमतों की तुलना की जा सकती है।
इसलिए प्रत्येक मामले में अनियमितता और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर होना जरूरी है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जांच जारी है और शेष जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जांच के निष्कर्षों और वसूली की स्थिति को लेकर विभाग कितना विस्तृत विवरण सार्वजनिक करता है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
इंदौर में बातचीत के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के बाद देश ने इतना गैरजिम्मेदार विपक्ष नहीं देखा।
विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने नेताओं से देश को प्राथमिकता देने और नकारात्मक राजनीति से बचने की अपील की। ये टिप्पणियां मंत्री के राजनीतिक विचारों और विपक्ष के प्रति उनके रुख को दर्शाती हैं।
गर्मी से पहले जलसंकट की आशंका, भोपाल में होगी बैठक
विजयवर्गीय ने आगामी गर्मी में संभावित जलसंकट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस बार पानी की कमी की आशंका को देखते हुए लोगों को अभी से तैयार रहने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।
मंत्री के मुताबिक, नर्मदा का जलस्तर बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि जलस्तर पंपिंग के लिए आवश्यक सीमा से नीचे चला जाता है, तो पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर जल्द ही भोपाल में बैठक करेंगे और लोगों को संभावित जलसंकट के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने इसे केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का विषय बताया।
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