देखिये वीडियो, यहां आया 7.0 तीव्रता का भूकंप: 16 लोगों की मौत; कई घायल, 12 हजार से ज्यादा को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, तिब्बत।
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है।
शुक्रवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि घायलों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है।
12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
भूकंप प्रभावित इलाकों से 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
राहत और बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों के अनुसार, 330 से ज्यादा मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय प्रशासन ने शुक्रवार को घायलों की संख्या बढ़कर 65 होने की जानकारी दी, जबकि मृतकों की संख्या 16 पर बनी हुई है।
400 से अधिक छोटे झटके दर्ज किए गए
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, भूकंप के बाद 400 से अधिक आफ्टरशॉक यानी छोटे झटके दर्ज किए गए।
लगातार झटकों के कारण प्रभावित क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा और क्षतिग्रस्त इमारतों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
नागक्यू के बाछेन काउंटी में था भूकंप का केंद्र
भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागक्यू शहर के बाछेन काउंटी क्षेत्र में बताया गया है। यह इलाका तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर है।
भूकंप जमीन के भीतर कम गहराई पर आया, जिसके कारण आसपास के क्षेत्रों में तेज कंपन महसूस किया गया। भूकंप के बाद कई मकानों को नुकसान पहुंचा।
स्थानीय प्रशासन और राहत दल प्रभावित इलाकों में पहुंचकर नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद लोगों की मदद में जुटे हैं।
ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में ठंड और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
12 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
भूकंप के बाद एहतियात के तौर पर 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बड़ी संख्या में कर्मियों को तैनात किया गया है।
प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आवास, टेंट, बिस्तर और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, घायलों का उपचार किया जा रहा है और क्षतिग्रस्त मकानों की स्थिति का आकलन जारी है।
आफ्टरशॉक की आशंका के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है।
भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की हलचल से आता है भूकंप
तिब्बत और हिमालय का क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट से टकराती है।
इन प्लेटों की हलचल से हिमालय और तिब्बती पठार के क्षेत्र में भूगर्भीय तनाव पैदा होता है, जिसके कारण यहां भूकंप आते रहते हैं।
पहले भी बड़े भूकंप मचा चुके हैं तबाही
तिब्बत और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था।
उस घटना में तिब्बत में 120 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में इमारतें क्षतिग्रस्त हुई थीं।
इसके झटके नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए थे। इससे पहले 2010 में पड़ोसी चीनी प्रांत छिंगहाई के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था।
इस आपदा में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 300 लोग लापता हो गए थे।
अगस्त में बाढ़ और भूस्खलन से भी हुआ था नुकसान
तिब्बत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में अगस्त में भी प्राकृतिक आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया था।
पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिरने से पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ था।
इसके बाद नेपाल की ओर बढ़े तेज बहाव ने कई गांवों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया।
ताजा भूकंप के बाद प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, घायलों का उपचार और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाना है।
बचाव अभियान जारी रहने के कारण नुकसान और प्रभावित लोगों की स्थिति से जुड़े आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है।
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