पटाखा कारोबारियों की मनमानी जारी: विस्फोटक अधिनियम को बनाया मजाक; जिम्मेदारी टाल रहे अधिकारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दीपावली से पहले रीजनल पार्क स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम नंबर-97 की जमीन पर संचालित पटाखा बाजार को लेकर सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक ओर जमीन के उपयोग से जुड़ी लाखों-करोड़ों रुपए की देनदारी और वसूली का मामला उलझा हुआ है, वहीं दूसरी ओर जमीन आवंटन, लाइसेंस नवीनीकरण और विस्फोटक सुरक्षा संबंधी अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बाजार के संचालन को लेकर सवाल उठने के बावजूद आईडीए और जिला प्रशासन के अधिकारी एक-दूसरे की ओर जिम्मेदारी बढ़ाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि नियमों का पालन सुनिश्चित कौन करेगा और सरकारी राजस्व की जवाबदेही किसकी होगी?
इंदौर पटाखा व्यापारी एसोसिएशन को कथित संरक्षण मिलने और अधिकारियों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन बकाया राशि, आवंटन प्रक्रिया और लाइसेंस संबंधी सवालों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट न होने से मामले की जांच जरूरी हो गई है।
1.07 करोड़ रुपए से अधिक की देनदारी, वसूली कहां अटकी?
रीजनल पार्क में अस्थायी थोक पटाखा बाजार के लिए उपयोग की गई जमीन से जुड़े दो मामलों में 1.07 रुपए करोड़ से अधिक की राशि और उस पर जीएसटी निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। आईडीए के संपदा अधिकारी ने 9 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र भेजा था।
अतिरिक्त क्षेत्रफल के उपयोग की राशि वसूलने की जिम्मेदारी सहायक यंत्री कपिलदेव भल्ला को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुरानी देनदारियों का पूरा हिसाब और वसूली सुनिश्चित किए बिना अगले वर्ष की आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।
सवाल यह है कि सरकारी जमीन के उपयोग की राशि बकाया होने के बाद वसूली के लिए क्या कार्रवाई की गई? यदि राशि में संशोधन, छूट या समझौता हुआ तो किस सक्षम अधिकारी ने इसकी अनुमति दी?
दस्तावेजों पर स्थिति स्पष्ट नहीं- इसी मामले में करीब 62 लाख रुपए की बकाया राशि का मुद्दा भी सामने आया है। अस्थायी थोक पटाखा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर होतचंदानी का कहना है कि आईडीए अधिकारियों के साथ बातचीत में करीब 36 लाख रुपए की राशि पर सहमति बनी थी और उनके अनुसार यह रकम जमा कर दी गई है।
हालांकि, इस संबंध में मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाए, इसलिए भुगतान और कथित समझौते की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब सवाल यह है कि 62 लाख बकाया राशि और 1.07 करोड़ रुपए से अधिक की देनदारी वाले मामलों का आपसी संबंध क्या है? 36 लाख किस आदेश के तहत जमा किए गए और वर्तमान में कितनी राशि बकाया है? आईडीए को भुगतान रसीद, मांग-पत्र और लेखा रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
एडीएम ने एसडीएम को सौंपी कार्रवाई, एसडीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों पर छोड़ा फैसला- मामले में एडीएम नवजीवन पवार से कार्रवाई को लेकर सवाल किए गए। उन्होंने बताया कि संबंधित कार्रवाई के लिए जूनी इंदौर के एसडीएम को कहा गया था।
इसके बाद एसडीएम घनश्याम धनगर ने बताया कि एडीएम के आदेश पर रीजनल पार्क स्थित पटाखा बाजार का निरीक्षण किया गया था। इसमें सामने आई वस्तुस्थिति से एडीएम को अवगत करा दिया गया है और आगे की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर होना है।
एसडीएम के बयान के बाद कई सवाल अनुत्तरित हैं। निरीक्षण में क्या पाया गया? क्या जमीन आवंटन के दस्तावेज, लाइसेंस, भंडारण की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई? यदि कोई अनियमितता मिली तो कार्रवाई का आदेश कब जारी होगा?
एसडीएम ने यह भी बताया कि रीजनल पार्क में दुकानों का संचालन स्थायी पटाखा व्यापारियों द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि स्थायी व्यापारियों द्वारा संचालन किस अनुमति और व्यवस्था के तहत हो रहा है तथा अस्थायी लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया का इससे क्या संबंध है।
लाइसेंस नवीनीकरण पर सवाल, पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में
शिकायतों में जिला प्रशासन की ओर से पटाखा कारोबारियों के लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में संबंधित लाइसेंसों की वैधता और कारोबार की अनुमति की स्थिति सार्वजनिक की जाना जरूरी है। विस्फोटक पदार्थों के भंडारण और बिक्री के लिए लागू लाइसेंस तथा सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन अनिवार्य है।
केवल दुकानें आवंटित कर देने या चालान भरवा लेने से सभी कानूनी अनुमतियां पूरी नहीं हो जातीं। इस घटनाक्रम में संबंधित थाना क्षेत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित अनियमितताओं के बावजूद कारोबार जारी है।
यदि आवश्यक अनुमतियों के बिना दुकानें संचालित हो रही हैं तो पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई करना चाहिए। हालांकि, किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की मिलीभगत का आरोप जांच के बिना प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
अधिकारियों की व्यस्तता या निगरानी का अभाव?
जिला प्रशासन में एडीएम स्तर पर सीमित अधिकारियों के बीच विभागों का कार्य विभाजन होने की जानकारी सामने आई है। अधिक विभागों की जिम्मेदारी के कारण निगरानी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, यह अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन पटाखा बाजार जैसे संवेदनशील कारोबार में लाइसेंस, जमीन आवंटन और सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों को समयबद्ध जांच करना चाहिए।
सरकारी जमीन के उपयोग से राजस्व वसूली और विस्फोटक सुरक्षा नियमों का पालन दो अलग-अलग विषय हैं। दोनों पर जवाबदेही तय होना चाहिए। बकाया राशि की वसूली और वैधानिक अनुमतियों की जांच को एक-दूसरे के इंतजार में लंबित नहीं रखा जा सकता।
अब आईडीए और जिला प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि बकाया राशि की वास्तविक स्थिति क्या है, जमीन का विधिवत आवंटन कब हुआ और पटाखा बाजार के संचालन के लिए सभी जरूरी अनुमतियां वैध हैं या नहीं। पटाखा बाजार में सुरक्षा नियमों का पालन किसी हादसे के बाद नहीं, बल्कि कारोबार शुरू होने से पहले सुनिश्चित होना चाहिए।
यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कारोबारियों पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है। सवाल सिर्फ राजस्व का नहीं, बल्कि विस्फोटक पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, आम लोगों की सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही का भी है।
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