सुप्रीम कोर्ट का आदेश सख्त: ओवरलोडिंग पर कार्रवाई कितनी प्रभावी
KHULASA FIRST
संवाददाता

बसों में यात्रियों से ज्यादा सामान, डंपरों में ज्यादा माल भरने की शिकायतें
33 वाहनों के चालान और 18 हजार रुपए जुर्माने तक सिमटी आरटीओ की कार्रवाई पर सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोडिंग को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए निर्देश दिए हैं कि निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहनों को अतिरिक्त माल उतरवाए बिना आगे जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
केवल जुर्माना वसूलकर ओवरलोड वाहन को रवाना कर देना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में इंदौर में बसों, ट्रकों और रेत के डंपरों में कथित ओवरलोडिंग के बीच परिवहन विभाग की जांच व्यवस्था और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इंदौर आरटीओ द्वारा हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई में 33 वाहनों के चालान बनाकर कुल 18 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया। हालांकि, यह कार्रवाई नंबर प्लेट के नियमों से संबंधित है।
इसे ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं माना जा सकता। ऐसे में सवाल है कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए विभाग ने कितनी जांच की और कितने वाहनों से अतिरिक्त माल उतरवाया?
बसों में लगेज कारोबार, परमिट के इस्तेमाल पर सवाल... इंदौर से दूसरे राज्यों के लिए अंतरराज्यीय बसों का संचालन होता है। कई ट्रैवल्स एजेंसियों के मुख्य कार्यालय भी शहर में हैं।
आरोप हैं कि कुछ एजेंसियां यात्री परिवहन के साथ बड़े पैमाने पर सामान की बुकिंग और ढुलाई भी कर रही हैं। इसके लिए निजी कार्यालयों में अलग से लगेज विभाग संचालित किए जाने की शिकायतें हैं, जहां से प्रदेश और दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों के जरिए सामान भेजा जाता है।
शिकायतों के मुताबिक, कुछ बसों की डिक्की के अलावा केबिन और छत तक सामान रखे जाने की स्थिति बनती है। यदि बसों का इस्तेमाल स्वीकृत परमिट और लागू सुरक्षा नियमों के विपरीत माल ढुलाई के लिए किया जा रहा है, तो यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ परिवहन नियमों के पालन का भी गंभीर विषय है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए मौके पर जांच, परमिट की शर्तों और सामान के परिवहन से जुड़े नियमों का सत्यापन जरूरी है।
डंपरों और ट्रकों के वजन की जांच कौन करेगा?... शहर में रेत के डंपरों और मालवाहक ट्रकों में निर्धारित क्षमता से अधिक भार ले जाने की शिकायतें भी उठती रही हैं। ओवरलोडिंग की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए पर्याप्त तौल कांटों, वेट ब्रिज और अन्य वजन जांच व्यवस्थाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
यदि पर्याप्त जांच केंद्र नहीं हैं या इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रभावी नहीं है, तो ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संबंधित अधिकारियों को ओवरलोडिंग मिलने पर केवल चालान तक सीमित रहने के बजाय अतिरिक्त भार उतरवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
जरूरत पड़ने पर अधिकृत अधिकारियों को पुलिस सहायता भी उपलब्ध कराई जानी है। वेट-इन-मोशन सिस्टम, वेट ब्रिज और टोल प्रबंधन प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।
हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले... ओवरलोडिंग पर रोक से संबंधित आवेदन में वर्ष 2019 से 2023 के बीच ओवरलोडिंग के कारण 1,40,945 दुर्घटनाओं और 60,082 मौतों का उल्लेख किया गया है।
ये आंकड़े सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता पैदा करते हैं। ऐसे में इंदौर में भी बसों, ट्रकों और डंपरों की नियमित जांच, वजन सत्यापन और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
टोल प्लाजा पर जांच का दावा, अमल पर नजर... स्थानीय स्तर पर टोल प्लाजा पर वाहनों की जांच किए जाने की बात कही गई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था फिलहाल कुछ ही टोल प्लाजा तक सीमित बताई जा रही है।
ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच का दायरा कितना बढ़ाया जाता है और ओवरलोडिंग पाए जाने पर वास्तव में अतिरिक्त माल उतरवाने की कार्रवाई होती है या नहीं।
बड़ा सवाल यह है कि इंदौर में बसों के जरिए सामान की ढुलाई, रेत के डंपरों और मालवाहक ट्रकों की ओवरलोडिंग की शिकायतों पर नियमित और दस्तावेजी जांच कब होगी? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का वास्तविक पालन तभी माना जाएगा, जब कार्रवाई केवल चालान और जुर्माने तक सीमित न रहकर ओवरलोडिंग रोकने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तक पहुंचे।
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