आंदाेलन को लेकर डॉक्टरों में दो फाड़: एक गुट हड़ताल के पक्ष में तो दूसरा विरोध में; मरीजों को हो सकती है परेशानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 22 अक्टूबर से प्रस्तावित आंदोलन को लेकर डॉक्टरों के बीच मतभेद सामने आए हैं। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) के पदाधिकारियों ने आंदोलन को कार्यकारिणी और जनरल बॉडी की बैठक में लिया गया सामूहिक निर्णय बताया है।
वहीं, दूसरे गुट के डॉक्टरों ने हड़ताल से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि मरीजों का इलाज उनकी प्राथमिकता है और बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहेगा।
एमटीए पदाधिकारियों ने कुछ डॉक्टरों की ओर से मीडिया में दिए गए बयानों को भ्रामक बताया है। उनका आरोप है कि ये बयान प्रशासन के प्रभाव में दिए गए प्रतीत होते हैं।
दूसरी ओर, हड़ताल का विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि मांगों को शासन और कॉलेज प्रबंधन के सामने संवैधानिक तरीके से रखा जाना चाहिए। काम बंद करने से मरीजों को परेशानी हो सकती है।
एमटीए अध्यक्ष डॉ. राहुल रोकडे, उपाध्यक्ष डॉ. साधना सोडानी और डॉ. बजरंग कुमार सिंह तथा सचिव डॉ. अशोक ठाकुर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एसोसिएशन एमजीएम मेडिकल कॉलेज और डेंटल कॉलेज के चिकित्सा शिक्षकों की पंजीकृत संस्था है। इसके नियमों के तहत चुनाव के जरिए पदाधिकारी चुने गए हैं और कार्यकारिणी गठित की गई है।
एसोसिएशन के अनुसार, चिकित्सा शिक्षकों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इनके निराकरण के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन समाधान नहीं होने पर कार्यकारिणी और जनरल बॉडी की बैठक में आंदोलन का निर्णय लिया गया। एमटीए ने कहा कि 22 अक्टूबर से आंदोलन के चरण जल्द तय कर अधिकारियों और मीडिया को इसकी जानकारी दी जाएगी।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के तहत आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं बंद करने का आह्वान नहीं किया गया है। साथ ही दूसरे डॉक्टरों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है। एमटीए ने चेतावनी दी कि निर्वाचित पदाधिकारियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संस्था के नाम का गलत इस्तेमाल किए जाने पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, डॉ. डीके शर्मा और अन्य डॉक्टरों की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एसोसिएशन के अधिकांश सदस्य और डॉक्टर प्रस्तावित आंदोलन से सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है कि चिकित्सा शिक्षकों की जायज मांगों को शासन और एमजीएम प्रबंधन के सामने संवैधानिक तरीके से रखा जाना चाहिए, न कि काम बंद करके मरीजों को परेशानी में डाला जाए।
इस गुट ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जाएंगे और ओपीडी में सामान्य दिनों की तरह मरीजों का इलाज जारी रहेगा।
बयान में कहा गया कि यदि किसी पदाधिकारी के खिलाफ शिकायतों की जांच चल रही है, तो उसे आंदोलन का रूप देकर मरीजों को परेशान नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों ने यह भी दावा किया कि वेतनवृद्धि सहित अन्य मामलों का स्थानीय और शासन स्तर पर क्रमशः निराकरण किया जा रहा है।
हड़ताल का विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि मीडिया में अपनी बात रखने वाले डॉक्टर जनरल बॉडी की बैठक में भी पक्ष रख सकते थे, लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, एमटीए पदाधिकारियों ने आंदोलन के निर्णय को नियमानुसार हुई बैठकों का नतीजा बताया है।
अब 22 अक्टूबर से आंदोलन किस रूप में होगा और इसका अस्पताल की नियमित सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह एसोसिएशन की ओर से विस्तृत कार्यक्रम जारी होने के बाद स्पष्ट होगा।
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