भ्रष्ट पुलिसवाले का लाइन में सालों तक डेरा: कथित कारोबार का साम्राज्य आखिर कैसे
KHULASA FIRST
संवाददाता

फिरोज और जावेद खान की तैनाती, फिर वाहनों/जमीनों का खेल
लोकायुक्त कार्रवाई के बाद पुराने मामलों की पड़ताल पर निगाहें
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस की नौकरी, वर्दी का रुतबा और पुलिस लाइन में लंबे समय तक रहने के बीच प्रधान आरक्षक फिरोज खान और उनके भाई जावेद खान को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने उनकी तैनाती, ड्यूटी और संपत्ति के स्रोतों की जांच का सवाल खड़ा कर दिया है।
आरोप हैं कि दोनों भाइयों ने पुलिस सेवा के दौरान लकड़ी के कथित अवैध परिवहन, वाहनों और जमीन से जुड़े कारोबार से कई मकान, प्लॉट, वाहन और जेसीबी जैसी संपत्तियां बनाई हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद फिरोज खान की संपत्ति और संपर्कों को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है। अब जांच का अहम पहलू यह भी है कि उनकी पदस्थापना कहां-कहां रही, पुलिस लाइन में रहने की अवधि कितनी थी, उस दौरान ड्यूटी का स्वरूप क्या था और क्या किसी निजी कारोबार में उनकी भूमिका के संबंध में पहले शिकायतें हुई थीं।
यदि सरकारी सेवा के साथ निजी गतिविधियों या पद के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं, तो विभागीय रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर जवाबदेही तय की जा सकती है। फिरोज और जावेद खान पर लगे आरोपों में दावा किया गया है कि दोनों लंबे समय तक पुलिस लाइन में रहे और नियमित थानों में तैनाती के बजाय निजी गतिविधियों में समय बिताते थे।
इस दावे की पुष्टि के लिए उनकी सेवा पुस्तिका, पदस्थापना आदेश, ड्यूटी रजिस्टर, उपस्थिति और विभागीय रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है। सवाल यह है कि पुलिस लाइन में रहने की वास्तविक वजह क्या थी?
क्या यह विभागीय आदेशों के अनुरूप था, उनकी ड्यूटी किस प्रकृति की थी और क्या उनके खिलाफ कभी अनधिकृत अनुपस्थिति या निजी कारोबार में संलिप्तता की शिकायत हुई? इन सवालों के जवाब अनुमान से नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के रिकॉर्ड से ही मिल सकते हैं।
लकड़ी के कथित कारोबार से वाहनों तक संपत्ति का हिसाब जरूरी... दोनों कथित भाइयों पर लगे आरोपों में देवास जिले के टोंकखुर्द, सोनकच्छ और आसपास के इलाकों में लकड़ी के कथित अवैध परिवहन का उल्लेख किया जा रहा है।
दावा है कि इस गतिविधि से जुड़े वाहनों और मशीनरी का इस्तेमाल कारोबार में होता था। यह भी आरोप लगाया गया है कि परिवहन पर कार्रवाई करने वाले कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती थी।
इन दावों की सच्चाई सामने लाने के लिए वन विभाग की जब्ती, परिवहन विभाग के रिकॉर्ड, वाहनों के पंजीकरण, पुलिस की पुरानी शिकायतों और विभागीय कार्रवाई की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी वाहन का अवैध परिवहन में इस्तेमाल हुआ था, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसका मालिक कौन था और संबंधित पुलिसकर्मी की उसमें क्या भूमिका थी।
फिरोज खान और उनके भाई के नाम पर कई मकान, प्लॉट तथा अन्य संपत्तियां होने के दावे भी किए जा रहे हैं। ऐसे में संपत्तियों के दस्तावेज, खरीद की तारीख, भुगतान के स्रोत और घोषित आय से उनका मिलान जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।
केवल संपत्तियों की संख्या के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन यदि आय और संपत्ति में अंतर मिलता है तो संबंधित एजेंसियां इसकी जांच कर सकती हैं।
जमीन और सरकारी रास्ते को लेकर भी पड़ताल जरूरी... कुछ आरोपों में आसपास के परिवारों की जमीन खरीदने और सरकारी रास्ते को बाधित कर संपत्ति का विस्तार करने की बात कही गई है। इन दावों की पुष्टि के लिए राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, सीमांकन और संबंधित निकाय के दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
यदि किसी सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण की शिकायत दर्ज हुई है, तो संबंधित विभाग की रिपोर्ट से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।इसी तरह, चोरी की मोटरसाइकिलों से जुड़े कथित मामले में नाम आने और बाद में भूमिका स्पष्ट नहीं होने के दावे की भी पुराने पुलिस रिकॉर्ड से पुष्टि की जानी चाहिए।
शिकायत या चर्चा मात्र से किसी व्यक्ति की संलिप्तता सिद्ध नहीं होती।इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या फिरोज खान की संपत्ति, उनकी घोषित आय और सेवा के दौरान की गतिविधियों के बीच कोई ऐसा अंतर है, जिसकी जांच जरूरी हो। साथ ही, जावेद खान की भूमिका और दोनों भाइयों से जुड़े आरोपों को भी अलग-अलग प्रमाणों के आधार पर परखना होगा।
फिलहाल, पुलिस लाइन में लंबे समय तक रहने, कथित लकड़ी परिवहन, वाहनों और जमीनों से जुड़े आरोप जांच की मांग कर रहे हैं। इन आरोपों की पुष्टि, संबंधित पक्षों का जवाब और विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
बड़े लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाने का शौक, शकील खान का भाइयों से संबंध नहीं
फिरोज खान और उसके भाई जावेद खान की कई लोगों के साथ तस्वीरें सामने आती रही हैं। इसी तरह देवास के पत्रकार शकील खान के साथ भी उनकी एक पुरानी तस्वीर है। जानकारी के मुताबीक यह तस्वीर पुरानी है और उनका फिरोज खान व जावेद खान से कोई लेना-देना नहीं है।
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