यशवंत क्लब के मास्टर प्लान पर बढ़ रहा विवाद: प्रबंध समिति के सदस्यों ने उठाए सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

निर्माण कार्यों की प्रक्रिया और पार्किंग व्यवस्था पर मांगा स्पष्टीकरण, पदाधिकारियों के जवाब को बताया गोलमोल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यशवंत क्लब में प्रस्तावित करीब ढाई करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विकास कार्यों के लिए जारी निविदाओं और उनकी प्रक्रिया पर प्रबंध समिति के पांच सदस्यों ने सवाल उठाए हैं।
इस संबंध में उन्होंने पहले अध्यक्ष और सचिव को पत्र लिखकर अपनी असहमति जताई थी। इसके जवाब में अध्यक्ष और सचिव ने विरोध करने वाले सदस्यों को विकास विरोधी बताया था।
अब इन सदस्यों ने एक बार फिर पत्र लिखकर पदाधिकारियों के जवाब पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनके वैध प्रश्नों का तथ्यात्मक उत्तर देने के बजाय उन्हें महत्वहीन बताने और विकास कार्यों में बाधा के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
यशवंत क्लब के अध्यक्ष जितेंद्र जैन और सचिव विजय कुमार कस्तूरी को लिखे पत्र पर प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव तेजवीर जुनेजा तथा सदस्य राजेश तलवार, गुनीत सिंह चड्ढा, वैभव दुआ और विकास थमन (बॉबी) के हस्ताक्षर हैं।
सदस्यों ने कहा है कि निर्माण समिति को अधिकार सौंपने का अर्थ यह नहीं है कि उसके निर्णय जांच-पड़ताल से परे हो जाएं। निर्वाचित प्रतिनिधियों से बिना प्रश्न किए हर निर्णय स्वीकार करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
उनका कहना है कि क्लब के हितों और संसाधनों की रक्षा के लिए परियोजना से जुड़े निर्णयों पर स्पष्टीकरण मांगना उनकी जिम्मेदारी है।
मास्टर प्लान की स्वीकृति को बताया अपर्याप्त आधार
सदस्यों ने पत्र में कहा है कि 6 अप्रैल 2025 को हुई असाधारण आमसभा (ईओजीएम) में मास्टर प्लान प्रस्तुत कर स्वीकृत किया गया था। हालांकि, इस स्वीकृति का बार-बार हवाला देकर परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े सवालों से बचा नहीं जा सकता।
किसी योजना को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसके तहत लिए जाने वाले सभी निर्णयों को जांच से मुक्त मान लिया जाए। निर्माण समिति को यह स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना क्लब के हितों और संसाधनों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने निर्माण समिति के निर्णयों को अंतिम और सभी पर बाध्यकारी बताने वाले प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं। सदस्यों के अनुसार, समिति को अधिकार दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह अपने निर्णयों का आधार बताने या प्रबंध समिति के निर्वाचित सदस्यों की चिंताओं का जवाब देने से मुक्त हो गई है।
उनका कहना है कि संविधान और आमसभा के निर्णयों का सम्मान करने का अर्थ हर कार्रवाई को बिना सवाल स्वीकार करना नहीं है।
टेंडर प्रक्रिया की जानकारी मांगी
पत्र में कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया से संबंधित जानकारी मांगना किसी अनियमितता का आरोप नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास है। तकनीकी और वित्तीय निविदाओं, बीओक्यू, अनुमानों, प्रचार-प्रसार और चयन प्रक्रिया का उल्लेख कर देना उनके सवालों का पूरा जवाब नहीं है।
यदि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है, तो संबंधित जानकारी साझा करने और निर्णयों का आधार स्पष्ट करने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। सदस्यों ने प्रस्तावित विकास योजना में पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है।
उनका कहना है कि पार्किंग क्लब के प्रत्येक सदस्य से जुड़ी व्यावहारिक आवश्यकता है, लेकिन इसे विकास योजना के पहले चरण में शामिल करने का प्रस्ताव नहीं है। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से परियोजना की उपयोगिता और दीर्घकालीन प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए निर्माण समिति को स्पष्ट करना चाहिए कि योजना में क्लब की सभी आवश्यकताओं पर विचार किया गया है और भूमि का उपयोग क्लब के हित में किया जा रहा है।
बैठकों और परियोजना के विवरण पर भी सवाल
सदस्यों ने पत्र में घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्तमान प्रबंध समिति ने जुलाई 2026 के तीसरे सप्ताह में कार्यभार संभाला था, लेकिन सितंबर के अंत तक कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी।
उनके अनुसार, निर्माण समिति की पहली बैठक 2 अक्टूबर 2026 को हुई, जो कथित तौर पर सार्वजनिक अवकाश का दिन था और उस दिन क्लब का कार्यालय भी कार्यशील नहीं था।
उन्होंने बैठक के समय और उसमें लिए गए निर्णयों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि परियोजना से संबंधित आवश्यक विवरण सदस्यों के साथ पर्याप्त रूप से साझा नहीं किए गए हैं।
ऐसे में योजना और उसके क्रियान्वयन की कमियों का आकलन करना मुश्किल है। सदस्यों का कहना है कि जिन जानकारियों के आधार पर निर्णयों की समीक्षा की जानी है, वे उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जिन व्यक्तियों या समिति ने निर्णय लिए हैं, उन्हें ही उनका विवरण और आधार स्पष्ट करना चाहिए।
सवाल उठाने को विकास में बाधा बताने पर आपत्ति
सदस्यों ने निर्माण समिति को प्रबंध समिति का विकल्प मानने और उसके प्रत्येक निर्णय को बिना जांच के स्वीकार करने की अपेक्षा पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी समिति को परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपने से प्रबंध समिति के निर्वाचित सदस्यों की जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती।
वैध सवालों को विकास में बाधा या असहमति को अवज्ञा के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। पत्र में सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि वे परियोजना रोकना या उसे अनिश्चितकाल तक टालना नहीं चाहते, बल्कि पहले उठाए गए सवालों के स्पष्ट उत्तर चाहते हैं।
उनका कहना है कि क्लब के हितों और मूल्यवान संसाधनों की रक्षा करना निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। किसी भी समिति को इस जिम्मेदारी से ऊपर नहीं माना जा सकता और न ही उसके निर्णयों को जवाबदेही से परे रखा जा सकता है।
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