बंटी नागर की जांच ठंडे बस्ते में: आत्महत्या की गुत्थी 23 दिन बाद भी अनसुलझी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मदनलाल-छगनलाल ज्वेलर्स परिवार से जुड़े शहर के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी संदीप उर्फ बंटी नागर की खुदकुशी का मामला गहराता जा रहा है। 23 दिन बाद भी पुलिस आत्महत्या के कारणों का पता नहीं लगा पाई है।
एक ओर पलासिया पुलिस हाल ही इंदौर में हुए इंटरनेशल क्रिकेट मैच और त्योहार के चलते लॉ एंड ऑर्डर में व्यस्त रही, दूसरी ओर बंटी नागर के परिजन भी मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
संदीप उर्फ बंटी नागर ने 27 सितंबर को द मार्क बिल्डिंग स्थित अपने 404 नंबर के ऑफिस में पत्नी की साड़ी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली थी। सुसाइड नोट नहीं मिलने से आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका था। हालांकि शंका जताई जा रही थी कि व्यवसायिक लेनदेन के चलते बंटी ने जान दी। वहीं पिछले अंकों में खुलासा फर्स्ट ने अशोक भाटिया, हंसराज जैन, चित्रेश मेहता, सतीश नीमा, सुनील कपूर, आशीष और झांझरिया ज्वेलर्स वाले के नामों का खुलासा किया था।
बताया था कि अशोक भाटिया ने बंटी को पांच करोड़ रुपए दे रखे थे। वहीं हंसराज जैन से 1.10 करोड़ रुपए बंटी को दिला रखे थे। चित्रेश मेहता ने 6 करोड़, सतीश नीमा (मालक) ने 8 करोड़, आशीष ने 7 करोड़, सुनील कपूर ने 2 करोड़ और झांझरिया ज्वेलर्स वाले ने 7 करोड़ रुपए दे रखे थे। बंटी नागर के शहर में कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे थे।
बंटी ने अपने ज्यादातर प्रोजेक्ट का माल डायरियों पर बेचा, जिनकी कोई पक्की लिखा-पढ़ी नहीं है। सुत्रों का कहना है कि बंटी ने कई लोगों को दाे से ढाई करोड़ में अपने कुछ प्रोजेक्टों का माल डायरियों पर बेचा है।
अब खरीदारों को पैसा डूबने की चिंता सता रही है। ज्यादातर निवेशकों ने नागर से माल के सौदे इस चक्कर मेंे किये थे कि दिवाली पर माल निकालकर मौटा मुनाफा कुटेंगे, लेकिन अब मुनाफा तो दूर उन्हें अब निवेश किये पैसे ही की चिंता सता रही है।
टीआई सुरेंद्रसिंह रघुवंशी के अनुसार मामले में परिजन के कथन हो गए हैं। बंटी नागर के ड्राइवर, ऑफिस बॉय और अकाउंटेंट के बयान लिए हैं। हालांकि परिजन भी सिर्फ व्यवसायिक लेनदेन को लेकर परेशान होने की बात बता रहे हैं।
परिजन द्वारा सीए और अकाउंटेंट से प्रोजेक्टों की जानकारी निकलवाई जा रही है। उन्हें जल्द ही दस्तावेजों के साथ थाने उपस्थित होने को कहा है। वहीं पिछले दिनों परिजन इलाहाबाद चले गए थे। इसके चलते भी उनके दोबारा बयान नहीं हो सके थे।
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