35 करोड़ की संपत्ति का खुलासा: लोकायुक्त पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद पुलिस प्रधान आरक्षक निलंबित
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस विभाग में चालक के पद पर तैनात प्रधान आरक्षक फिरोज खान की करोड़ों रुपये की संपत्ति का मामला सामने आने के बाद विभाग में हलचल मच गई है। लोकायुक्त पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) की एसपी वाहिनी सिंह ने फिरोज खान को निलंबित कर दिया है। उसके खिलाफ लंबे समय से ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के मामले में भी अलग से विभागीय जांच शुरू की गई है।
लोकायुक्त की जांच में अब तक 38 संपत्तियों का पता चला है, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य 35.46 करोड़ रुपये आंका गया है। जांच एजेंसी अब इन संपत्तियों के साथ बैंक खातों, जमीन के कारोबार और आर्थिक लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
14 अक्टूबर को हुई थी छापामार कार्रवाई
फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई 14 अक्टूबर को की गई थी। इसके बाद से उसकी संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की जांच तेज कर दी गई है।
जांच में सामने आई संपत्तियों का संबंध केवल उसके नाम से ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों, परिचितों और उससे जुड़ी फर्मों के नाम पर दर्ज संपत्तियों से भी बताया जा रहा है। जांच एजेंसी इन सभी संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद-बिक्री और उनके लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।
संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य 35.46 करोड़ रुपये सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस सेवा में कार्यरत एक कर्मचारी के ज्ञात आय स्रोतों और इतनी बड़ी संपत्ति के बीच कितना अंतर है। हालांकि, संपत्ति के मूल्यांकन और आय के स्रोतों की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
लोकायुक्त पुलिस फिरोज खान से जुड़े बैंक खातों की भी जांच कर रही है। अब तक उसके 22 बैंक खातों की जानकारी सामने आई है, जिनमें से 17 खातों का सत्यापन किया जा चुका है। इन खातों में 10 लाख रुपये से अधिक की रकम मिलने की जानकारी सामने आई है। शेष पांच बैंक खातों की जांच की जानी है।
जांच एजेंसी खातों में जमा रकम, लेन-देन और संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत का मिलान कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि जमीन के कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में कितनी रकम का लेन-देन हुआ। बैंक खातों में रकम मिलना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। उसके स्रोत और वैधता का निर्धारण जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर ही होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फिरोज खान पुत्र फारुख खान की वर्ष 2002 में मंदसौर पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुई थी। उसकी नौकरी का बड़ा हिस्सा देवास में बीता। बाद में उसका तबादला पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में हुआ, जहां वह चालक के पद पर तैनात था। बताया जा रहा है कि वहां आमद देने के कुछ दिन बाद ही वह ड्यूटी से गैरहाजिर हो गया था।
उसकी लंबे समय से अनुपस्थिति को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाएगा कि वह किस अवधि से ड्यूटी पर अनुपस्थित था, उसकी गैरहाजिरी के संबंध में क्या दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और इस दौरान नियमानुसार क्या कार्रवाई हुई। जानकारी के अनुसार, नोटिस मिलने पर उसके द्वारा बीमारी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात भी सामने आई है। इन तथ्यों का सत्यापन संबंधित अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद विभाग ने उसे निलंबित करने के साथ ही गैरहाजिरी के मामले में अलग से जांच शुरू की है। इस तरह अब उसके खिलाफ एक ओर संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े मामले की जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर सेवा संबंधी नियमों के पालन की भी पड़ताल की जाएगी।
फिरोज खान के जमीन के कारोबार में सक्रिय रहने की जानकारी भी सामने आई है। खबरों में उसके कथित संपर्कों और पुराने कार्यकाल से जुड़ी कुछ गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के संरक्षण में नेटवर्क तैयार करने का दावा भी सामने आया है। संबंधित अधिकारी उस समय उज्जैन में उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बताया गया है कि फिरोज खान को उस दौरान अपराध शाखा में भी संबद्ध किया गया था।
इसके अलावा, खातेगांव-कन्नौद के जंगलों से सागौन की कथित तस्करी करवाने और विवादित जमीनों के सौदों में सक्रिय रहने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित लोगों की भूमिका जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल लोकायुक्त की मौजूदा कार्रवाई में संपत्तियों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण है।
मामले के बीच विशेष शाखा में पदस्थ निरीक्षक महेंद्र पटेल का देवास से भोपाल तबादला भी चर्चा में आया है। बताया गया है कि पटेल करीब 12 वर्षों से देवास में पदस्थ थे। इसी दौरान फिरोज खान के साथ उनकी एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुई थी। इसके बाद उनके तबादले की जानकारी सामने आई।
हालांकि, निरीक्षक महेंद्र पटेल के तबादले का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। केवल तस्वीर सामने आने और तबादले के समय के आधार पर दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध मानना उचित नहीं होगा।
प्रधान आरक्षक फिरोज खान के निलंबन और करोड़ों रुपये की संपत्तियों की जानकारी सामने आने के बाद अब जांच के निष्कर्षों पर नजर है। लोकायुक्त पुलिस संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक खातों में जमा रकम, जमीन के कारोबार और आय के ज्ञात स्रोतों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। वहीं पुलिस विभाग उसकी लंबे समय से चली आ रही गैरहाजिरी और उससे संबंधित अभिलेखों की जांच करेगा।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सामने आई संपत्तियों में कितनी संपत्ति फिरोज खान के नाम पर है, कितनी परिवार या अन्य संबंधित लोगों के नाम दर्ज है और इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया। सभी दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच पूरी होने के बाद ही संपत्ति और आय के बीच विसंगति तथा मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
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