जो नहीं आए, उनसे पूछो, मुझसे क्यों पूछते हो: जलसंकट पर मंत्री विजयवर्गीय की बैठक से 5 विधायक नदारद; सवाल पर बोले
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कम बारिश के चलते आगामी महीनों में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंता के बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में एआईसीटीएसएल कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में शहर में पानी की उपलब्धता, वैकल्पिक व्यवस्थाओं और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल संसाधनों के प्रबंधन पर चर्चा हुई। हालांकि, बैठक में पांच विधायकों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बन गई।
बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल किया गया। इस पर विजयवर्गीय ने कहा, ‘जो विधायक नहीं आए, उनसे पूछो, मुझसे क्यों पूछते हो। उनके इलाके में पानी की कमी नहीं होगी, इसलिए नहीं आए।'
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा और महेंद्र हार्डिया सहित एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर, अभिषेक बबलू शर्मा तथा संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
जलापूर्ति और वैकल्पिक इंतजामों पर चर्चा: बैठक का मुख्य उद्देश्य कम वर्षा को देखते हुए इंदौर की जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाना और उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन करना था। इसमें पानी की उपलब्धता, वैकल्पिक व्यवस्थाओं और आने वाले समय की जरूरतों पर विचार-विमर्श किया गया।
शहर में जलसंकट की आशंका को देखते हुए यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में बैठक में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठे।
पांच विधायक बैठक में नहीं पहुंचे: बैठक में विधायक मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, गोलू शुक्ला, तुलसी सिलावट और मनोज पटेल शामिल नहीं हुए। जलसंकट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में इन विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
विधायक मालिनी गौड़ ने निकाली भड़ास!
एक कनेक्शन तो करवा नहीं सकते... जब समस्याओं का हल नहीं होता तो ऐसी बैठकों में जाकर क्या करेंगे..? इंदौर में गुरुवार को दिनभर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा बुलाई गई जलसंकट की बैठक को लेकर ‘जुबानी कुश्ती’ जारी रही... पहले मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि जो विधायक या नेता बैठक में नहीं आए, हो सकता है उनके क्षेत्र में पानी की समस्या ना हो... उधर, अब विधानसभा क्रमांक चार की विधायक मालिनी गौड़ ने बैठक में ना पहुंचने को लेकर भड़ास निकालते हुए मीडिया में बयान दिया कि ‘नगर निगम में छोटी-मोटी समस्याएं ही हल नहीं होती, तो इस तरह की बैठकों में जाने का मतलब ही क्या..? गोदवले धाम की पानी की टंकी मैंने अपने महापौर कार्यकाल में बनवाई थी, लेकिन उसके बाद से आज तक वहां बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ...जब शिवम वर्मा निगम में आयुक्त थे, तब से कई बार पानी की टंकी पर बिजली कनेक्शन करवाने के लिए गुहार लगा चुकी, अनेकों बार मिल भी चुकी, लेकिन आज तक एक कनेक्शन नहीं करवा पाए... जब समस्याओं का हल ही ना हो तो बैठक में जाकर क्या करेंगे..?’
जल के सदुपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए
कम वर्षा के चलते शहर में पानी की कमी की संभावना को देखते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक में कहा कि हमें अभी से जलसंकट की आहट सुनाई दे रही है और हम सभी को इससे निपटने के लिए एक जागरुकता अभियान चलाना चाहिये। घरों में किस तरह से पानी का सदुपयोग कर सकते हैं इसकी प्लानिंग अभी से हमें बनाना चाहिये।
गरबा मंडलों में जल संकट की शिकायतें आ रहीं
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इस बार बारिश औसत से 40 प्रतिशत कम हैं इसलिए भविष्य में जलसंकट की संभावना है और अभी से हमें उसकी तैयारी करना होगी। इसके लिए हमने जिन जिलों में बारिश कम हुई है, वहां पर जलसंकट के समाधान के लिए बैठक करना प्रारंभ कर दिया है। वर्तमान में जब मैं गरबा मंडलों में जा रहा हूं तो जलसंकट की शिकायतें आ रही हैं।
इंदौर शहर के लिए हमारे पास तीन प्रकार की योजनाएं
जलसंकट के लिए हमने संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर चर्चा की। इंदौर शहर के लिए हमारे पास तीन प्रकार की योजनाएं हैं। पहली तत्काल, दूसरी मध्यकालीन और तीसरी लंबे समय की योजना।
लंबे समय की योजना में 2029 में नर्मदा का चौथा चरण आ रहा है। इसमें 2050 तक का पर्याप्त पानी हमारे पास रहेगा। मंत्री विजयवर्गीय इन दिनों जलसंकट को लेकर जनता के बीच जाकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
इसके लिए वे नवरात्रि के अवसर पर गरबा मंडलों का सहारा ले रहे हैं। गरबा मंडलों में जाकर विजयवर्गीय जल के सदुपयोग की सीख दे रहे हैं। गरबा पंडालों में लोगों को पानी की बचत की शपथ दिलवा रहे हैं और यह बता रहे हैं कि कैसे वे कम से कम पानी में अपनी दिनचर्या का संचालन कर सकते हैं।
शहर के 17 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा जल नहीं पहुंचता
अभी भी शहर के 17 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा जल नहीं पहुंचता है। वहां पर पेयजल की आपूर्ति बोरवेल और टैंकरों द्वारा की जाती है। इस साल बोरिंगों के सूखने की संभावना है। उन क्षेत्रों में पानी कैसे पहुंचाया जाए, इस पर चर्चा की गई। बोरिंग अगर खराब होते हैं तो उनको तत्काल सुधरवाया जाए। पाइप कम है तो बढ़ाए जाएं।
मीडिया जल के सदुपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाए
मेरा मीडिया के माध्यम से अनुरोध है कि जल के सदुपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए। शावर की बजाय बाल्टी में पानी भरकर स्नान करें। आरओ के वेस्ट वाटर का उपयोग घर की साफ-सफाई में करें अर्थात हमारे पास उपलब्ध पानी का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करें।
यदि कोई पाइप लगाकर कार धोता है तो मैंने महापौर से कहा कि उसका तत्काल चालान बनाएं, इतना महंगा पानी कार धोने के लिए नहीं है। नए कनेक्शन देने और बोरवेल पर प्रतिबंध को लेकर उन्होंने कहा कि अभी इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन जनहित में आगे जैसी जरूरत होगी निर्णय लिया जाएगा।
पानी को लेकर आपातकाल लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आपातकाल नहीं, लेकिन कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में यह आता है कि यदि आपातकालीन स्थिति है तो वे किसी के भी बोरिंग का अधिग्रहण कर सकते हैं। यदि संकट की स्थिति में कोई पानी बेच रहा है और जनता के पास पानी नहीं है तो उसका अधिग्रहण कर सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर 100 करोड़ भी देंगे जब मंत्री विजयवर्गीय से पूछा गया कि जलसंकट से निपटने के लिए 50 करोड़ की मांग की गई है तो उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर 100 करोड़ भी देंगे। इंदौर स्वच्छता में नंबर वन शहर के प्रबुद्ध नागरिकों की बदौलत आया है और आज शहर में स्वच्छता संस्कार हो गया है।
यह संस्कार देश में किसी शहर के नहीं हैं। इसको व्यवहार में लेने में 10 से 15 सालों का समय लगा और हमने शहर की बड़ी हस्तियों का इसमें सहयोग लिया। इसी तरह पानी के लिए भी हमें शहर के प्रबुद्धजनों के साथ एक वातावरण बनाना है कि हम पानी का सदुपयोग करें ना की दुरुपयोग करें।
उपचारित पानी के भी ज्यादा से ज्यादा उपयोग की उन्होंने बात कही। दोपहर 2 बजे से मालवा-निमाड़ के जिलों में जलसंकट को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने नगरीय निकायों के अधिकारियों से जिलों में विभिन्न स्थानों पर वर्तमान में जलप्रदाय की स्थिति की जानकारी ली।
उन्होंने भविष्य में हर 15 दिन में जलप्रदाय की हर संभावना और आ रही समस्या पर प्लानिंग बनाकर कांक्रीट रिपोर्ट सबमिट बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि जलसंकट से निपटने के लिए कानून में कुछ बदलाव करना आवश्यक हो तो हम भोपाल से उसे करेंगे।
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