जल संकट की आहट के बीच बरगद-नीम पर चली कुल्हाड़ी: जब 8 इमारतों में बूंद-बूंद पानी का संकट; तो दो नई हाईराइज बिल्डिंगों को किस आधार पर मिली मंजूरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
क्या इंदौर में जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने की कोशिशें सिर्फ कागजों और अभियानों तक सीमित रह गई हैं? यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि एक तरफ पूरा शहर कम बारिश के कारण भविष्य में उत्पन्न होने वाले संभावित जल संकट की आशंका से चिंतित है, तो दूसरी तरफ 15वीं वाहिनी परिसर में पुलिस हाउसिंग परियोजना के नाम पर दशकों पुराने हरे-भरे बरगद और नीम के पेड़ों को काट दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिसर में पहले से मौजूद आठ इमारतों में ही जलापूर्ति की गंभीर किल्लत बनी हुई है और रहवासी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दो और नई हाईराइज इमारतों के लिए जल उपलब्धता का आकलन किस तकनीकी आधार पर किया गया?
क्या निर्माण की मंजूरी देने से पहले भविष्य की जल जरूरतों और भूजल स्तर का कोई व्यापक अध्ययन कराया गया था?
15वीं वाहिनी परिसर में वर्षों से खड़े बरगद और नीम के विशालकाय वृक्षों को जड़ से काट दिया गया। इस दौरान नगर निगम की पीली गैंग, लिफ्टिंग मशीन और अन्य प्रशासनिक संसाधन मौके पर तैनात दिखाई दिए।
नियमानुसार, इस तरह के पारंपरिक और पुराने वृक्षों को काटने के बजाय सुरक्षित स्थान पर ट्रांसप्लांट किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा करने के बजाय सीधे पेड़ काट दिए गए। अब यह अनुत्तरित सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इन वृक्षों की कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार वैध अनुमति ली गई थी?
इसके साथ ही, काटे गए विशालकाय पेड़ों की बेशकीमती लकड़ियों का निस्तारण कहां और किस प्रक्रिया के तहत किया गया, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
परिसर की मैदानी स्थिति बेहद चिंताजनक है। पहले से निर्मित आठ इमारतों में रहने वाले परिवार पानी की भारी कमी झेल रहे हैं। ऐसे में जीआरपी के लिए प्रस्तावित दो नई हाईराइज इमारतों का प्रस्ताव पारित होना और निर्माण प्रक्रिया शुरू होना गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करता है।
नई इमारतों के निर्माण के बाद जल की मांग में भारी इजाफा होगा, लेकिन इसकी पूर्ति कहां से होगी, इसका कोई स्पष्ट खाका सामने नहीं आया है। मौजूदा इमारतों में जल संकट और नई इमारतों की अनुमानित जल खपत के बीच के संबंध की गहन और निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े जल संकट से बचा जा सके।
इस पूरे मामले में पारदर्शिता की सख्त जरूरत है। निर्माण एजेंसी, नगर निगम, वन विभाग और पुलिस प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से यह मांग उठ रही है कि वे परियोजना से संबंधित स्वीकृतियां, वृक्ष कटाई के अनुमति-पत्र, स्वीकृत नक्शे और जलापूर्ति की मास्टर प्लान रिपोर्ट सार्वजनिक करें।
इसके साथ ही, निर्माण स्वीकृति से पूर्व किए गए स्थल निरीक्षण और जल उपलब्धता की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पूरी स्थिति पारदर्शी हो सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्षम प्रशासनिक और उच्च अधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। 15वीं वाहिनी परिसर का तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए, काटे गए पेड़ों की कटाई की वैधता की जांच हो और परियोजना स्थल पर भूजल तथा सतही जल की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
इस बात की भी जांच हो कि क्या पुराने पुलिस क्वार्टरों को तोड़ने और नए निर्माण के बीच पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया है या नहीं।
जब तक इस पूरे मामले की जांच पूरी नहीं होती और जल उपलब्धता तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक निर्माण और पेड़ों की कटाई से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए।
यदि जांच के दौरान प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन, पर्यावरण को क्षति पहुंचाने या बिना अनुमति पेड़ काटने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित निर्माण और कटाई कार्य पर नियमानुसार तत्काल अंतरिम रोक लगाने का निर्णय लिया जाना चाहिए।
15वीं वाहिनी का प्रभार प्रथम वाहिनी के कमांडेंट अभिषेक आनंद के पास है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय होना अत्यंत आवश्यक है।
नियमानुसार ट्रांसप्लांट कराया जाना चाहिए
नगर निगम उद्यान विभाग द्वारा इस मामले में पेड़ कटाई की अनुमति दी गई है, लेकिन बरगद, पीपल और नीम जैसे वृक्षों की कटाई नहीं होनी चाहिए। इन्हें नियमानुसार ट्रांसप्लांट कराया जाना चाहिए।
श्रृंगार श्रीवास्तव, अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर
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