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कब कर सकेंगे रामलला के दर्शन... : राममंदिर निर्माण के दो साल

05-08-2022 : 03:37 pm ||

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंदिर की नींव रखी जाने के 2 वर्ष पूरे हो रहे हैं... इस दौरान मंदिर के चबूतरे को तैयार की जाने के साथ ही गर्भगृह पर भी मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है...


राम जन्मभूमि परिसर में भगवान श्री राम की भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। पूरे देश की नजरें राम मंदिर पर हैं। सबके मन में एक ही सवाल है, कब राम मंदिर बनकर तैयार होगा। कब से दर्शन करने की इजाजत मिलेगी ? इस सवाल का जवाब आसानी से मिल सकता है। अब तक राम मंदिर का काम कितना हुआ है। राम मंदिर के निर्माण का 40 प्रतिशत पूरा हो चुका है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नींव रखे जाने के बाद अब तक मन्दिर में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंदिर की नींव रखी जाने के 2 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दौरान मंदिर के चबूतरे को तैयार की जाने के साथ ही गर्भगृह पर भी मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। 5 अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मंदिर निर्माण की नींव रखे जाने के बाद अब तक मन्दिर में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यानी की मंदिर की फाउंडेशन तो तैयार किए जाने के बाद 21 फुट ऊंचे फर्श को भी तैयार कर लिया गया है और गर्भगृह स्थल पर नक्काशी किये गए स्टोन को जोड़ने की प्रक्रिया को भी तेजी के साथ शुरू कर दिया गया है।


जानकारी के मुताबिक मंदिर निर्माण के लिए भूमि के अंदर किये जाने वाले कार्य को किया जा चुका है। राम मंदिर का निर्माण कार्य कब पूरा होगा तो इस सवाल का जवाब राम मंदिर ट्रस्ट ने दिया है, उन्होंने बताया है कि साल 2025 तक राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरी तरह खत्म होगा हालांकि राम लला के दर्शन 2023 के दिसंबर माह से कर सकेंगे। राम मंदिर परिसर का विस्तार 70 एकड़ से बढ़ाकर 107 एकड़ करने की योजना के तहत ‘राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र› ने इसी साल फरवरी में राम जन्मभूमि परिसर के पास 7,285 वर्ग फुट जमीन खरीदी है।


5 अगस्त 2020… तारीख नहीं, पीढ़ियों के संघर्ष का गौरवमयी क्षण

पां च अगस्त 2020... वह तारीख जो भले ही पांच सदी की प्रतीक्षा और पीढ़ियों के संघर्ष के बाद आई, लेकिन शताब्दियों के लिए इतिहास में अंकित हो गई। बंदनवार, कलश और शुभ प्रतीकों से सुसज्जित अयोध्या ने युगों बाद पुन: उस क्षण को जिया जब राम वनवास से लौटे थे। इसी दिन राम मंदिर के भूमिपूजन के लिए प्रधानमंत्री के साष्टांग होते ही धर्मध्वजा शिखर पर थी और भावनाएं सरयू की लहरों की तरह निर्मल। अब उस तारीख का दो वर्ष पूरे हो चुके हैं तो अवलोकन कर आत्मगौरव की अनुभूति स्वाभाविक है। मंदिर के रूप में कोटि-कोटि राम भक्तों की चिर साध साकार हो रही है। इन दो वर्ष की यात्रा में राम मंदिर अपेक्षित आकार लेने लगा है। चार सौ फीट लंबे एवं तीन सौ फीट चौड़े विस्तृत भू क्षेत्र में 12 से 15 मीटर तक गहरी कृत्रिम चट्टान गत वर्ष ही ढाली जा चुकी है। पांच फीट मोटी एक और परत ढाल कर कृत्रिम चट्टान रूपी नींव को अभेद्य बनाया गया है।


इन दिनों इसी अभेद्य और लगभग 50 फीट मोटी नींव पर मंदिर का प्रतिष्ठान (प्लिंथ) निर्माण पूर्णता की ओर है। राम मंदिर के गर्भगृह यानी जहां रामलला स्थापित किए जाएंगे, उसकी प्लिंथ तैयार होने के साथ गत एक जून से उसका भी निर्माण शुरू हो चुका है। इसी माह के अंत अथवा अगले माह के मध्य तक तक प्लिंथ निर्माण पूरा हो जाएगा और इसके बाद निर्धारित मानचित्र के अनुरूप संपूर्ण मंदिर के लिए शिलाएं संयोजित करने का काम शुरू हो जाएगा। गौरवमय अतीत के अनुरूप आकार पाने की प्रक्रिया से गुजर रही रामनगरी उस दिन के लिए आतुर भी प्रतीत हो रही है, जब भव्य राम मंदिर और दिव्य अयोध्या का स्वर्णिम शिखर प्रशस्त हो रहा होगा। मंदिर निर्माण पांच एकड़ में ही हो रहा है और परिसर की बाकी 70 एकड़ भूमि पर भव्य मंदिर के पूरक प्रकल्प के तौर पर सांस्कृतिक उपनगरी विकसित की जानी है। इसके बावजूद मंदिर निर्माण की हलचल परिसर के बाहर से ही अनुभूत होती है।


श्रद्धालुओं के दबाव को आत्मसात करने के लिए प्रशासन ने हनुमानगढ़ी चौराहा को पार करती सड़कों को लगभग दो गुणा बढ़ाने का ब्लूप्रिंट तैयार कर रखा है। तब यह चौराहा भी आठ गुणा अधिक प्रशस्त हो उठेगा। प्रशासन रामजन्मभूमि, पुण्य सलिला सरयू और कई अन्य प्रमुख स्थलों एवं मंदिरों से जुड़ते मार्गों को विकसित-विस्तृत करने की तैयारी में है। मार्ग चौड़ीकरण की योजना भव्य मंदिर के साथ दिव्य अयोध्या की परिकल्पना को साकार करने का किंचित आयाम भर है। केंद्र एवं प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से अयोध्या को दुनिया की शीर्ष सांस्कृतिक एवं पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है।


राममंदिर निर्माण के लिए दिल खोलकर दान

श्रीराम जन्मभूमि में इस समय राममंदिर की प्लिंथ, गर्भगृह व रिटेनिंगवाल का निर्माण एक साथ संचालित है। राममंदिर निर्माण के लिए भक्त दिल खोलकर दान दे रहे हैं। ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक हर माह करीब एक करोड़ का दान मंदिर निर्माण के लिए नगदी सहित चेक, आरटीजीएस व ऑनलाइन माध्यमों से आ रहा है। राममंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पिछले साल 15 जनवरी मकर संक्रांति से 27 फरवरी तक पूरे देश में निधि समर्पण अभियान चलाया गया था। भक्तों ने दिल खोलकर दान किया, जिसके चलते इस अभियान में करीब 3400 करोड़ रुपये ट्रस्ट को प्राप्त हुए। इसके अलावा विभिन्न माध्यमों से भी करीब दो हजार करोड़ का दान प्राप्त हो चुका है। ट्रस्ट सूत्रों की मानें तो अब तक राममंदिर निर्माण के लिए करीब 5500 करोड़ की धनराशि प्राप्त हो चुकी है, हालांकि अंतिम आंकड़ा निधि समर्पण अभियान की ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


हर माह कम से कम एक करोड़ का दान आ रहा है

ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि मंदिर निर्माण के लिए दान का सिलसिला लगातार जारी है। बताया कि ट्रस्ट कार्यालय पर प्रतिदिन 50 हजार से लेकर एक लाख तक की नगदी दान के रूप में आ रही है। हर माह कम से कम एक करोड़ का दान राममंदिर के लिए आ रहा है। ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या भी बढ़ गई है। प्रतिदिन करीब 10 हजार भक्त दर्शन को आते हैं। वीकेंड में यह संख्या दो गुनी तो पर्व व त्योहारों पर चार गुना हो जाती है। वहीं रामलला के चढ़ावे में भी वृद्धि हुई है। बताया कि पहले जहां प्रतिमाह 10 से 12 लाख का चढ़ावा आता था वहीं अब हर माह से 40 से 50 लाख का चढ़ावा आ रहा है। उन्होंने बताया कि रामलला के दानपात्र में मिले चढ़ावे की गिनती हर माह की पांच व 20 तारीख को की जाती है। जून माह में एक से 15 जून तक रामलला के दानपात्र में लगभग 25 लाख का चढ़ावा आया है।


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