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सबसे बड़े सौर तूफान से जल उठी थी सारी धरती : सौर तूफान में सूर्य की सतह पर होते हैं बड़े ब्लास्ट

23-07-2022 : 08:15 pm ||

धरती से जल्द ही सौर तूफान टकरा सकता है। सौर तूफान के दौरान सूर्य की सतह पर बड़े ब्लास्ट होते हैं, जिसकी वजह से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन और तेज गर्मी पैदा होती है। अब इस बीच शोधकर्ता ने सूरज, सौर फ्लेयर्स और तूफाने के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।


शोधकर्ताओं ने दावा किया है उन्हें सबसे बड़े सौर तूफान के समय की जानकारी मिल गई है। उनका कहना है कि यह इतिहास का सबसे बड़ा सौर तूफान था जिसके प्रभाव से कई दिन तक धरती जलती रही। इसके साथ ही कई जगह पर आग भी लग गई थी।  विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौर तूफान बेहद खतरनाक था, जिसने सन् 1859 में घटी कैरिंगटन घटना (बड़ा सौर तूफान) का रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सौर तूफान 774 और 775 CE (Common Era) के बीच आया था। माना जाता है कि कथित तौर पर कैरिंगटन घटना से 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली था। 


जानिए क्या थी कैरिंगटन घटना 

कैरिंगटन इवेंट एक बड़ा सौर तूफान था, जो सितंबर 1859 की शुरुआत में आया था। कैरिंगटन इवेंट नाम की इस घटना से टेलीग्राफ सेवा पर बुरा प्रभाव पड़ा था। इस बड़े सौर तूफान को ही कैरिंगटन घटना कहा जाता है। 


हर साल नए छल्ले का होता निर्माण 

वैज्ञानिकों ने 2012 से 774 सीई के सौर तूफान के सबूत को खोजा है। उन्होंने हाल ही में पेड़ के छल्ले का विश्लेषण किया जिससे इसके अस्तित्व के सबूत मिले। प्राचीन देवदार के पेड़ में हर साल नए छल्ले का निर्माण होता है। इसमें एक प्रकार का कार्बन पदचिह्न पाया जाता है अगर सौर तूफान के दौरान इस तरह से कोई पेड़ बढ़ रहा है, तो कार्बन का एक आइसोटोप सी-14 के बढ़े स्तरों के साथ छल्ले का निर्माण होगा। शोधकर्ताओं ने एक पेड़ के डेटाबेस का इस्तेमाल किया है और बताया है कि 774 से 775 तक, कार्बन-14 सामग्री 12 फीसदी बढ़ गई थी और ऐसा एक बार में ही हो गया। दुनियाभर के दूसरे पेड़ों में यही स्पाइक दिखा था जिससे पता चलता है कि कार्बन-14 स्पाइक एक वैश्विक घटना थी। डेटा से यह भी जानकारी मिलती है कि 774 में तीव्र सौर गतिविधि हुई थी। 


यह है सोलर फ्लेयर्स

नासा के मुताबिक सोलर फ्लेयर्स सनस्पॉट से जुड़ी चुंबकीय ऊर्जा के रिलीज होने से आने वाले विकिरण का एक तीव्र विस्फोट है। सोलर फ्लेयर्स हमारे सौर मंडल की सबसे बड़ी विस्फोटक घटनाएं हैं। इसे सूर्य पर उज्ज्वल क्षेत्रों के रूप में देखा जाता है और वे मिनटों से लेकर घंटों तक रह सकते हैं। सोलर फ्लेयर को कोरोनल मास इंजेक्शन (सीएमई) के रूप में भी जाना जाता है। सौर मंडल में ये फ्लेयर्स अब तक के सबसे शक्तिशाली विस्फोट माने जाते हैं, इनमें अरबों हाइड्रोजन बमों की तुलना में ऊर्जा रिलीज होती है। ये फ्लेयर्स मध्यम, मजबूत और तेज रोशनी वाले हो सकते हैं।


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