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पुष्यमित्र भार्गव अब तक के सबसे युवा मेयर : खेलकूद और सोशल एक्टिविटी में रहे आगे

05-08-2022 : 03:42 pm ||

खुलासा फर्स्ट…इंदौर।

महापौर बने पुष्यमित्र भार्गव आज 24वें महापौर के रूप में अभय प्रशाल में शपथ लेने जा रहे हैं। पहली बार देखिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अनदेखी तस्वीरें। भार्गव बचपन से ही खेलकूद और सोशल एक्टिविटी में आगे रहे हैं। वकालत को पेशे के रूप में चुना और अतिरिक्त महाधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद तक भी पहुंचे। आज वे शहर विकास के लिए महापौर पद की शपथ लेंगे। साल 2000 से लगातार भाजपा के खाते में रहे महापौर के इस पद पर चुने जाने के बाद पुष्यमित्र से इंदौरवासियों को बहुत उम्मीदें हैं। शहर में ढाई दशक में पांच मेयर रहे, इनमें से 4 भाजपा के रहे। 2000 में वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय भाजपा समर्थित महापौर रहे। तब से अब तक इस पद पर भाजपा ही काबिज है। इंदौरियों को नव निर्वाचित महापौर पुष्यमित्र भार्गव से हैं कई उम्मीदें। तस्वीरों में जानिए उनके बचपन से लेकर महापौर तक का सफरनामा।


1995-2000 कांग्रेस के मधुकर वर्मा बने थे महापौर

पूर्व में महापौर के अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते थे। इसके तहत 1995 में तत्कालीन कमिश्नर एके सिंह की अध्यक्षता में निर्वाचन प्रक्रिया हुई। इसमें महापौर के पद पर पिछड़ा वर्ग समर्थित कांग्रेस के मधुकर वर्मा व उप महापौर रमेश गागरे निर्वाचित हुए। खास बात यह कि तब रमेश गागरे भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए थे और कांग्रेस के समर्थन से वे उप महापौर बने थे। वर्मा 1995 से 2000 तक महापौर पद पर रहे।


2000-2005 अप्रत्यक्ष चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय बने महापौर

वर्ष 2000 में भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय विधानसभा दो से विधायक थे। इसी साल महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होना शुरू हुए। इसके तहत लंबे समय बाद महापौर पद पर भाजपा समर्थित विजयवर्गीय चुने गए। तब प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी। उस दौरान प्रदेश सरकार से पर्याप्त राशि नहीं मिलने पर विजयवर्गीय ने जनभागीदारी का मॉडल शुरू किया था जिससे अच्छा रिस्पांस मिला। वे 2005 तक महापौर रहे।


2005-2010  डॉ. उमाशशि शर्मा रही महापौर

2005 में फिर प्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर के चुनाव हुए। इसमें भाजपा की डॉ. उमाशशि शर्मा महापौर पद पर निर्वाचित हुई। उनके पांच साल के कार्यकाल में शहर में 1 हजार गार्डन बनाने का लक्ष्य रखा गया था जिनमें से 635 गार्डन बनाए गए। इसी दौरान नर्मदा का तृतीय चरण शुरू हुआ और 21 बड़ी टंकियों का निर्माण हुआ। कबीट खेड़ी का ट्रीटमेंट प्लांट भी इसी अवधि में शुरू हुआ।


2010-2015 कृष्णमुरारी मोघे रहे महापौर

2010 में महापौर पद पर भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे निर्वाचित हुए। उनके कार्यकाल में फीडर रोड के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में सड़कों का निर्माण, अप्रोच रोड, लिंक रोड के साथ स्कूल भवनों का निर्माण किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में मल्टीलेवल पार्किंग का भी निर्माण हुआ। देवगुराडिया पर कचरा प्लांट स्थापित किया गया। शहर में एलईडी लाइट, हाई मास्ट के अलावा यशवंत सागर, बिलावली, सिरपुर, लालबाग, राजबाडा और पितृ पर्वत पर विकास कार्य हुए।


2015 मालिनी गौड महापौर बनी, पांच बार लहराया परचम

2015 में दूसरी बार विधायक बनी मालिनी गौड महापौर निर्वाचित हुई। खास बात यह कि उनके तथा तत्कालीन निगम कमिश्नर मनीष सिंह के नेतृत्व ने इंदौर पहली बार स्वच्छता में देश में नंबर वन रहा। इसके बाद सिलसिला चल पड़ा और लगाचार पांच बार देश में परचम लहराया। इसके अलावा वाटर प्लस, वैक्सीनेशन में भी इंदौर अव्वल रहा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के काम शुरू हुए और गति मिलना शुरू हुई। 


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