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शास्त्री ब्रिज तोड़कर सिक्सलेन करने के निर्णय का भाजपा में ही विरोध : नेताओं ने महापौर के समक्ष जताई आपत्ति

26-09-2022 : 03:20 pm ||

खुलासा फर्स्ट… इंदौर

शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया सिक्सलेन ब्रिज बनाने के निर्णय का भाजपा में ही विरोध शुरू हो गया है। तमाम नेताओं ने कहा है कि इसकी जरूरत नहीं है। मेट्रो ट्रेन का रास्ता बिना ब्रिज को तोड़े ही मिल जाएगा। ब्रिज को तोड़ा तो दो साल न केवल आसपास के मार्गों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनेगी, बल्कि आसपास के बाजारों के व्यापार-धंधे भी चौपट हो जाएंगे।


वर्ष 1950 में बने इस ब्रिज से आज रोजाना करीब दो लाख वाहन गुजरते हैं। ये ब्रिज इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है कि ये शहर को पूर्वी और पश्चिमी हिस्से को जोड़ता है। हाल ही में मेट्रो ट्रेन के लिए रास्ता बनाने के लिहाज से इस ब्रिज को तोड़कर सिक्सलेन बनाने का निर्णय हुआ है। सांसद शंकर लालवानी इसके लिए पहल कर रहे हैं। पूर्व विधायक और पूर्व नगराध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा कल महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पास पहुंचे और ब्रिज को तोड़ने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा निर्णय करने के पूर्व व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।

 

अक्सर होता ये है कि ब्रिज बनकर तैयार हो जाते हैं, लेकिन पटरी के ऊपर का हिस्सा बनाने में रेलवे या तो वक्त लेता है या फिर नहीं बनाता। नेमा ने कहा कि मेट्रो ट्रेन का रूट डिजाइन करते वक्त शास्त्री ब्रिज मेट्रो टीम को शायद दिखाई नहीं दिया या यह ब्रिज अचानक पैदा हो गया? जो मेट्रो टीम इस को तोड़ने की पैरवी कर रही है कि यह प्रोजेक्ट में रुकावट है या अन्य कोई कारण है। पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग है, जिस पर रोजाना दो लाख से ज्यादा लोग निकलते हैं, टूटने पर इसका  विकल्प क्या होगा? पटेल ब्रिज, राजकुमार ब्रिज वैसे ही व्यस्त यातायात से ग्रस्त हैं। सिक्सलेन बनने की स्थिति में शास्त्री मार्केट का भविष्य क्या होगा? ब्रिज टूटने पर एमजी रोड व पूर्वी क्षेत्र के बड़े बड़े शोरूम का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। 


नया पुल कितने समय में बनेगा, इसके निर्माण की राशि कौन सा विभाग वहन करेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। पश्चिम क्षेत्र का व्यक्ति सरवटे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और पूर्वी क्षेत्रों के हॉस्पिटलों में सुगमतापूर्वक कैसे पहुंचेगा, ये भी बड़ा सवाल है। शहर के पूर्व आईडीए अधिकारी और वरिष्ठ कंसल्टेंट अतुल शेठ का कहना है कि ब्रिज को लेकर कोई भी निर्णय बंद कमरे न होकर जनता के बीच हो। ब्रिज तोड़ा तो दो साल तक परेशानी भोगनी पड़ेगी। ब्रिज नया बनाने पर ऊंचाई बढ़ने से पुल की दोनों तरफ की भुजाएं हाई कोर्ट तक और जिला कोर्ट तक हो जाएंगी। इससे काफी दिक्कतें होंगी। आरएनटी मार्ग और शास्त्री मार्केट की तरफ जाने वाले ट्राफिक का प्रबंधन मुश्किल होगा? उनका सुझाव है कि ब्रिज को तोड़ने के बजाय मेट्रो ट्रेन अहिल्या लाइब्रेरी के बगीचे से होते हुए शास्त्री ब्रिज के पास, शास्त्री मार्केट और इंदौर प्रीमियर को-ऑपरेटिव बैंक के मध्य से होते हुए, मेहतानी मार्केट से छोगालाल उस्ताद मार्ग होते हुए, मेट्रो सीधे खातीपुरा होते हुए कृष्णपुरा पुल पर निकल सकती है।


ब्रिज तोड़ने की जरूरत नहीं

इस रूट से न ब्रिज को तोड़ने की आवश्यकता पड़ेगी, न कृष्णपुरा पुल से लेकर गांधी हॉल तक एमजी रोड को और शहर को खोदने की। इस निर्माण से ट्रैफिक प्रबंधन भी बहुत अच्छा हो पाएगा।


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