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कागजों पर चल रहे मदरसों पर अब सरकार की निगाह : 7 हजार मदरसों का पंजीयन, 2200 को मान्यता सरकार देती है मान्यता प्राप्त मदरसों को अनुदान

05-08-2022 : 03:05 pm ||

बाल आयोग ने मांगी रिपोर्ट

खुलासा फर्स्ट… इंदौर

प्रदेश में अधिकांश मदरसे कागज पर चल रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब बाल आयोग ने मदरसा बोर्ड से इसकी जानकारी मांगी, हालांकि अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन यह सामने आया है कि प्रदेश में 7 हजार मदरसे चल रहे हैं, जो मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड भी हैं। खास बात यह है कि इनमें से महज 2200 ही मान्यता प्राप्त हैं। यानी कि पांच हजार केवल कागजों तक सीमित हैं। यहां न तो बच्चे हैं और न ही उनके लिए इंतजाम। 


इसे लेकर बाल आयोग ने मदरसा बोर्ड से इसकी जानकारी मांगी है कि इन मदरसों को फंडिंग कहां से हो रही है। यह सामने आया है कि प्रदेश में 7 हजार मदरसे चल रहे हैं जो मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड भी हैं। खास बात यह है कि इनमें से महज 2000 ही मान्यता प्राप्त हैं यानी कि पांच हजार केवल कागजों तक सीमित हैं। संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा जांच के बाद ऐसे अवैध रूप से चल रहे मदरसों को बंद किया जा सकता है।


कोरोनाकाल के दौरान से संचालन बंद हो गया

मध्यप्रदेश में मदरसा बोर्ड दीनी और दुनियावी तालीम देने वाले मदरसों का रजिस्ट्रेशन होता है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन है। प्रदेश में कोरोनाकाल के बाद से संचालित मदरसों की संख्या में कमी आ गई है। कई मदरसों का पंजीयन तो है, लेकिन कोरोनाकाल के दौरान से इनका संचालन बंद हो गया। आगे संचालन की मान्यता देने के लिए इन मदरसों के आवेदन मदरसा बोर्ड तक नहीं पहुंचे, जिससे इनका रजिस्ट्रेशन निरस्त हो गया, लेकिन इनका नाम अब भी संचालित मदरसों की सूची में है। 


बंद होंगे अवैध रूप से संचालित मदरसे 

दीनी तालीम के नाम पर मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में कागजों पर चल रहे मदरसे अब बंद होंगे। दरअसल, सिर्फ अनुदान हड़पने के लिए संचालित होने वाले ऐसे तमाम मदरसों की जानकारी राज्य के धर्मस्व विभाग तक पहुंची है। लिहाजा विभाग ने ऐसे तमाम मदरसों की जांच के बाद उन्हें बंद करने का निर्णय लिया है। धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग मंत्री उषा ठाकुर ने यह बात कही।


बिना मान्यता वाले मदरसों को कहां से हो रही फंडिंग, बाल आयोग ने मदरसा बोर्ड से मांगी जानकारी

2200 मदरसों को मान्यता प्राप्त है प्रदेश में 


7000 से अधिक मदरसे रजिस्टर्ड हैं वर्तमान में प्रदेश में


1198  को अनुदान दिया जा रहा है।


1578  मदरसे शामिल थे पहले अनुदान प्राप्त मदरसों में


1578  मदरसों को अनुदान दिए जाने वाली सूची भी 4 साल बाद अपडेट की 


बाल आयोग की पड़ताल में सामने आई सच्चाई 

मध्य प्रदेश में 7000 से अधिक मदरसे चल रहे हैं, जिनमें से मात्र 2200 को ही मान्यता प्राप्त है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बाकी मदरसे कैसे संचालित हो रहे हैं। मदरसा बोर्ड तीन साल के लिए रजिस्ट्रेशन करता है। बिना मान्यता के मदरसों का संचालन वैध नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग भी जांच के बाद इन्हें सत्यापित करता है, लेकिन कार्रवाई के अभाव में ये मदरसे संचालित हो रहे हैं। बाल आयोग ने शहर के कुछ मदरसों की पड़ताल की, जिनमें ऐसे कई मदरसों की हकीकत सामने आई। मप्र के कई बड़े शहरों में भी मदरसा संचालित हो रहा था। मौके पर एक कमरे पर केवल बोर्ड ही लगा मिला। यहां न तो बच्चे थे और न ही पढ़ाई कराए जाने जैसी कोई स्थिति। ऐसी स्थिति आयोग की जांच में कई जगह सामने आई। जिसके बाद मध्य प्रदेश बाल आयोग मदरसा बोर्ड को पत्र लिखकर मदरसों के संचालन की जानकारी मांगी है। आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान के मुताबिक प्रदेश में अवैध रूप से कई ऐसे मदरसे संचालित किए जाते हैं। आयोग को अब मदरसा बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार है।


ऐसे होता है मदरसों का रजिस्ट्रेशन

मदरसा बोर्ड के सचिव सैयद हुसैन रिजवी के मुताबिक नियमों के तहत मदरसों का रजिस्ट्रेशन फर्म एवं सोसायटी में रजिस्टर्ड संस्था के नाम पर होता है। इसके बाद संचालक मान्यता के लिए आवेदन करते हैं, जिसका जिला शिक्षा कार्यालय से सत्यापन होता है, लेकिन कोरोना काल के बाद से यहां हुए मदरसों के रजिस्ट्रेशन के संचालन की मान्यता लेने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। प्रदेश में मान्यता प्राप्त मदरसों को ही संचालन की अनुमति है। जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के बाद ये अनुमति इन्हें दी जाती है। वर्तमान में अधिकांश मदरसे रजिस्ट्रर्ड तो हैं, लेकिन इन्होंने संचालन की मान्यता नहीं ली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति के आधार पर अनुदान का प्रावधान है, जिसमें एक शिक्षक वाले मदरसे को 72000 रुपए, जबकि 2 शिक्षकों में अनुदान 144000 रुपए है। वहीं जिन मदरसों में 3 शिक्षकों द्वारा दीनी तालीम देना बताया जाता है उनमें सालाना अनुदान की दर 216000 रुपए के करीब है। केंद्र सरकार ने मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत अनुदान का यह प्रावधान किया है, इसके अलावा राज्य सरकार से छात्रवृत्ति पाठ्य पुस्तकों का वितरण एवं अन्य शासकीय स्कूलों को मिलने वाली सुविधाएं मदरसों को दी जाती हैं।


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