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सरकारी शिक्षक ने रख लिया एवजी : सांप, बिच्छू के बीच खुले आसमान में पढ़ने को मजबूर बच्चे

05-08-2022 : 04:17 pm ||

खुलासा फर्स्ट… विदिशा

देश में आजादी के अमृत महोत्सव की चारों ओर गूंज है। इसी बीच राजधानी भोपाल और विदिशा बॉर्डर के बीच बसे आदिवासी बाहुल्य भूतपरासी पंचायत के उदलाखेड़ी के आदिवासी बच्चे कई सालों से पढ़ाई के लिए मोहताज हैं। इन बच्चों को न स्कूल की छत नसीब हुई है और न सरकारी स्कूल में मिलने वाला खाना। सरकारी शिक्षक भी ऐसे मिले कि जो महीने में एक दो बार ही अाते हैं। 


आधे नंगे बदन बच्चे गांव के किनारे मंदिर के बड़ के पेड़ के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर हैं। सांप, बिच्छू और खुले आसमान के नीचे  यह बच्चे सालभर पढ़ाई करते हैं। बारिश के चार माह स्कूल ही नहीं लगता।


ग्रामीणों ने बताया गांव में 56आदिवासी बच्चे दर्ज हैं। इन्हें महीने में एक दो बार ही मिड डे मिल दिया जाता है। 10 साल पहले गांव में स्कूल की बिल्डिंग मंजूर की गई थी लेकिन वह कभी पूरी नहीं हो पाई। 10 सालों से बच्चे बड़ के पेड़ के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं। सरपंच मजहर खान का कहना है 10 साल में कलेक्टर, विधायक को कई बार आवेदन दिया कि स्कूल की बिल्डिंग के को पूरा किया जाए। सीएम हेल्पलाइन में भी कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन स्कूल नहीं बन पाया। खास बात यह है कि इस स्कूल में दो टीचर हैं जो कभी समय पर नहीं आते। 


गुरुवार काे मीडियाकर्मियों ने जब स्कूल का जायजा किया तो 53 बच्चे स्कूल के आसपास भटक रहे थे। इनमें कक्षा 1 से लेकर 5 तक के बच्चे थे। इनके पास न यूनिफॉर्म है न चप्पल। अभी तक किताबें भी नहीं मिलीं। सरपंच का कहना है राजेन्द्र सिंह राजपूत शिक्षक हैं। वे नहीं आते, गुरुवार को राजेन्द्र सिंह राजपूत ने एक भाड़े का शिक्षक सुर्जन सिंह मेहर को बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा था। जबकि इस प्रायवेट शिक्षक को न तो गांव के बच्चे जानते थे और न ही यह शिक्षक बच्चों को जानता था। 


बीआरसी लक्ष्मण यादव का कहना है यदि वहां पर पदस्थ सरकारी शिक्षक किसी अन्य को अपनी जगह पर पढ़ाने के लिए भेज रहा है तो इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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