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40 सिमों से जिस्मफरोशी ऑपरेट करता था सरगना : सरगना सहित सभी नौ आरोपियों को आज रिमांड पर लेगी पुलिस

25-11-2021 13:44:25
सरगना सहित सभी नौ आरोपियों को आज रिमांड पर लेगी पुलिस

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। देश में जिस्मफरोशी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चलाने वाले बांग्लादेशी तस्कर का आखिरकार इंदौर पुलिस ने खुलासा कर दिया। 19 नवंबर को ही आईजी हरिनारायणचारी मिश्र के निर्देश पर पूर्वी क्षेत्र के एसपी आशुतोष बागरी के स्वच्छता में नंबर वन शहर में तेजी से पनप रहे जिस्मफरोशी के धंधे को जीरो टॉलरेंस के तहत शहर से साफ करने संबंधी खबर खुलासा फर्स्ट ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। अफसरों का कहना है कि देश के इस सबसे बड़े तस्कर के साथियों सहित पकड़ाने के बाद काफी हद तक शहर में पैर पसार रही इस गंदगी पर लगाम लगेगी। पुलिस ने देह व्यापार के सरगना को उसके नौ साथियों के साथ बाणगंगा थाना क्षेत्र की कालिंदी गोल्ड से पकड़ा था। बताते हैं सरगना से 40 सिम कार्ड बरामद हुई हैं जिनसे वह देशभर में जिस्मफरोशी का धंधा चला रहा था। विजयनगर पुलिस सरगना सहित मंगलवार रात गिरफ्तार सभी छह आरोपियों को आज कोर्ट से रिमांड पर लेगी।

शीतल नगर की होटल लव में सेक्स रैकेट में पकड़ाए और पूर्व में पकड़े जा चुके आरोपियों से देश के जिस्मफरोशी के सबसे बड़े सरगना मामुन पिता तफज्जुल हुसैन उर्फ विजय पिता विमल दत्त (पाबना, बांग्लादेश), देश के दूसरे सबसे बड़े एजेंट और उसके साथी बबलू उर्फ पलाश पिता संजीव सरकार (नाला सुपारा, मुंबई) को आखिरकार इंदौर पुलिस ने पकड़ लिया। इन दोनों को मंगलवार रात इनके साथियों प्रमोद पिता शिवराम पाटीदार (विद्या नगर, खरगोन),  उज्ज्वल पिता अवधेश प्रसाद (कालिंदी गोल्ड, बाणगंगा), दिलीप बाबा पिता द्वारकादास सावलानी (स्कीम 78) और नेहा, आकिजा, दीपा व रजनी के साथ एसपी आशुतोष बागरी द्वारा गठित एसआईटी ने पकड़ा। 

खास बात यह कि जब सिपाही योगेश झोपे, नीरज रघुवंशी, प्रणीत भदौरिया विजय दत्त की लोकेशन कालिंदी गोल्ड (बाणगंगा) की आने पर उसे दबोचने पहुंचे तो तलाशने में लंबी जद्दोजहद करना पड़ी। सिपाहियों के पास उसका नाम और सिर्फ डांस करता हुआ एक वीडियो था। उसे वीडियो देखकर भी कोई पहचान नहीं पा रहा था। आखिरकार उसके एक साथी को सिपाही ने पहचान लिया। वह सिगरेट पीने बाहर निकला था। उसे पकड़ने फ्लैट पर पहुंचे तो छत पर खड़ी युवतियों और विजय दत्त ने सिपाहियों को आता देख लिया। युवतियों ने तुरंत अपने मोबाइल छुपा दिए। उन्हें लगा किसी मामूली मामले में पुलिसकर्मी आए हैं, लेकिन सच्चाई पता चलते ही होश उड़ गए।  सिपाहियों ने सभी को दबोच लिया। मोबाइल का पूछने पर युवतियां बोलीं कि उन्होंने छत से मोबाइल दूर झाड़ियों में फेंक दिए हैं। करीब आधे घंटे तक मोबाइल तलाशे गए। आखिरकार सख्ती से पूछताछ में युवतियां टूट गईं। उन्होंने फ्लैट में ही मोबाइल होना बताए। छिपाए तीनों मोबाइल  बरामद किए तो विजय दत्त की निशानदेही पर 40 सिमकार्ड भी बरामद हुई। पता चला कि विजय दत्त सामान्य फोन में इनमें से जरूरत के हिसाब से सिम कार्ड डालकर देशभर में जिस्मफरोशी का नेटवर्क चलाता था। दो से तीन दिन में ही वह मोबाइल तोड़कर फेंक देता और सिम कार्ड निकाल लेता था। 

ऐसे हासिल की नागरिकता

बांग्लादेश से दंगों के समय किशोर अवस्था में भारत आ गया, यहां खेतीबाड़ी की। विमल दत्त को विश्वास में लेकर उसके राशन कार्ड में अपना नाम जुड़वा लिया। इससे मुंबई में पेन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पासपोर्ट  बना लिया। नालासोपारा में रहने के दौरान रूबिया असद मंडल से पहचान हुई और देह व्यापार में उतर गया। इस बीच वह बांग्लादेश की जोशना मामून से शादी कर चुका था। वह एनजीओ की आड़ में महिलाओं और युवतियों के उत्थान की आड़ में बांग्लादेश की गरीब परिवार की युवतियों को काम दिलाने के नाम पर अवैध रूप से भारत भेजने लगी। इसके बाद विजय दत्त ने कई एजेंट तैयार किए और देशभर में युवतियां भेजने लगा। 

ड्राइवरी करते बन गया बड़ा एजेंट

{विजयनगर टीआई तहजीब काजी के अनुसार खरगोन का प्रमोद पाटीदार पहले मुंबई रूट पर बस ड्राइवर था। बस में मुंबई-इंदौर आने-जाने के दौरान खूबसूरत लड़कियों से बात हुई तो देह व्यापार का पता चला। युवतियों से विजय दत्त का नंबर हासिल किया और फिर खंडवा, खरगोन और धार क्षेत्र का सबसे बड़ा एजेंट बन गया। इसने धीरे-धीरे विजय दत्त के अलावा दिल्ली, मुंबई और सूरत के कई एजेंटों से संबंध बना लिए। युवतियों को इंदौर बुलवाने के लिए बस की बुकिंग का काम भी यही देखता था। 

{विजय दत्त से जुड़ा इंदौर का सबसे बड़ा एजेंट सेजल सीतलानी है। यह बांग्लादेशी युवतियों को ठेके पर बुलवाता था। इंदौर का दूसरा सरगना दिलीप बाबा है। वह स्कीम 78 में 56 हजार वस्तुओं का बड़ा शोरूम चलाता है। इसकी आड़ में पहचान की महिलाओं के जरिए देह व्यापार करता था। वहीं, बाणगंगा क्षेत्र का पूरा काम उज्ज्वल ठाकुर कालिंदी गोल्ड में रहकर देखता था। वहीं, प्रमोद ठाकुर हीरानगर और बाणगंगा का काम संभालता था। इनके साथ वेलोसिटी टॉकिज के पास नीतू कुत्तेवाली भी जुड़ी थी।

मोटी और बाल सफेद होते ही देह व्यापार से बाहर

विजय दत्त बांग्लादेश में बैठी अपनी पत्नी के जरिए सुंदरता के हिसाब से 50 हजार रुपए से अधिकतम एक लाख रुपए में युवतियों को खरीदता था। वहीं, साथी बबलू उर्फ पलाश पिता संजीव सरकार भी पत्नी राबिया खातून के जरिए बांग्लादेश से युवतियां बुलवाता था। आरोपी पहले युवती के कौमार्य को खुद देखते थे। अपने पास नालासोपारा में रखकर उसका शोषण भी करते और देह व्यापार भी कराते। दी गई कीमत का चार से पांच गुना वसूलने के बाद देशभर में फैले अपने एजेंटों से बात करते और सप्ताहभर या पंद्रह दिन के हिसाब से युवतियों को उनके पास भेज देते। इंदौर में प्रमोद, उज्ज्वल के साथ मीना से विजय की बात होती थी। वीडियो कॉलिंग पर इंदौरी एजेंट युवतियों को देखते और सौदा तय हो जाता। पांच हजार रुपए एडवांस विजय और बबलू के खाते में डालते और फिर रोजाना के पांच हजार जितने दिन युवती रहती इंदौरी एजेंट डालते रहते। हालांकि ये लोग इंदौर आई युवतियों को प्रति ग्राहक 500 रुपए ही कमीशन देते थे। बताते हैं देह व्यापार में शामिल युवतियां गुजरात में जाना ज्यादा पसंद करती थीं। वहां ज्यादा पैसा तो मिलता ही था, लेकिन प्रताड़ित नहीं किया जाता था, जबकि इंदौर में उन्हें ज्यादा प्रताड़ना मिलती थी।


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